जनजाति क्षेत्र में पहली बार बाल संसद की बैठक हुई संपन्न,बाल संसद के बच्चों ने बाल विवाह से आजादी के नारे के साथ गाँव में निकाली रैली
बाल संसद हर बच्चे के अधिकार को सुनिश्चित करने एवम् उनकी सहभागिता हेतु कारगर पहल- डॉ. पण्ड्या
सलुम्बर,नितेश पटेल । भारतीय संविधान एवं सयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार अधिवेशन के तहत 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए विभिन्न अधिकार है,जिनमे सहभागिता का अधिकार महत्वपूर्ण अधिकारो में एक है।बच्चों को जागरूक कर उन्हें अपने अधिकार,बालश्रम एवम् बाल विवाह की रोकथाम हेतु जागरूक करना वो भी उनकी सहभागिता के साथ यह पहल बाल संसद सराहनीय है।उक्त विचार गायत्री सेवा संस्थान द्वारा सलूंबर की ग्राम पंचायत माकड़सीमा में आयोजित पहली वृहद स्तरीय बाल संसद की बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए राजस्थान बाल आयोग,राजस्थान सरकार के पूर्व सदस्य एवम् बाल अधिकार विशेषज्ञ डॉ. शैलेंद्र पण्ड्या ने व्यक्त किए l बैठक में गायत्री सेवा संस्थान से बाल संरक्षण परियोजना की समन्वयक आशिता जैन ने बच्चों को उनके मुख्य चार अधिकारो पर गतिविधि के माध्यम से समझ विकसित करते हुए सरकार द्वारा संचालित सामाजिक सुरक्षा योजना की जानकारी दी l बैठक में बाल संसद के सदस्यों के अलग-अलग ग्रुप बनाकर सपनों की ग्राम पंचायत पर अपने विचार एवं बिंदु बनाए गए जिसके बाद सभी ने अपने अपने ग्रुप के साथ प्रस्तुतीकरण किया गया एवं साथ ही सभी बाल संसद के सदस्यों ने बाल विवाह मुक्त समाज की शपथ ली एवं पूरे गांव में बाल विवाह, बालश्रम न करने की जन जागरूकता रैली निकाली गई जिसमें ब्लॉक प्रभारी खेमराज प्रजापत एवं रमेश चौबीसा, नारायण मीणा,दौलत राम मीणा,सानु जैन जतिन जैन,रूपी मीणा आदि उपस्थित रहे।बैठक में सलूंबर के विभिन्न गावों से कुल 80 से ज़्यादा बच्चे उपस्थित रहे l
