साध्वी प्रेम बाईसा की मौत का खुलासा : हार्ट अटैक बनी वजह, जहर या साजिश की बात पुलिस ने नकारी; कंपाउंडर की 3 स्तर पर लापरवाही आई सामने
कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की मौत हार्ट अटैक से हुई थी। जोधपुर पुलिस कमिश्नर ओमप्रकाश ने यह खुलासा शनिवार शाम किया है।
कमिश्नर ने बताया- मेडिकल बोर्ड की विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार साध्वी की मौत का मुख्य कारण फेफड़ों की गंभीर बीमारी के चलते आया हार्ट अटैक (कार्डियोपल्मोनरी अरेस्ट) था।
जांच में यह भी सामने आया है कि इलाज के दौरान कंपाउंडर देवी सिंह की ओर से नियमों की अनदेखी की गई। इस स्थिति में लापरवाही सामने आई।
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि 12 फरवरी को मिली एफएसएल रिपोर्ट और हिस्टोपैथोलॉजिकल रिपोर्ट के आधार पर बोर्ड ने निष्कर्ष निकाला है कि मौत ‘शॉक’ के कारण हुई, जो फेफड़ों की बीमारी (अस्थमा/सीओपीडी) के परिणामस्वरूप आए कार्डियोपल्मोनरी अरेस्ट से हुई।
कमिश्नर ने स्पष्ट किया कि साइंटिफिक जांच और इन्वेस्टिगेशन में साध्वी के शरीर में जहर का नहीं पाया गया है। साथ ही किसी भी प्रकार के यौन अपराध या बाहरी व आंतरिक चोट के निशान भी शरीर पर नहीं मिले हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए गठित एसआईटी ने इस मामले में हर स्तर पर साक्ष्य जुटाए हैं।
इन पॉइंट पर जांच की गई
- जांच दल ने अब तक 44 लोगों के बयान दर्ज किए हैं।
- 106 लोगों की कॉल डिटेल और सोशल मीडिया एक्टिविटी का विश्लेषण किया गया है।
- साध्वी की मेडिकल हिस्ट्री खंगाली गई, जिसमें वे किन डॉक्टरों के संपर्क में थी और पूर्व में कौन सी दवाइयां ले रही थी, इसका पूरा ब्योरा जुटाया गया है।
- घटनाक्रम की सटीक टाइमलाइन तैयार करने के लिए सीसीटीवी फुटेज और उस दौरान मिलने वाले लोगों के बयानों का सहारा लिया गया है।
- जांच में सबसे गंभीर तथ्य कंपाउंडर देवी सिंह की ओर से दिए गए इंजेक्शन को लेकर सामने आया है
कंपाउंडर की तीन स्तर पर लापरवाही आई सामने
- ड्रग रूल्स की अवहेलना- जो इंजेक्शन दिया गया वह ‘शेड्यूल – एच’ श्रेणी का था, जिसे केवल एक रजिस्टर्ड डॉक्टर ही लिख या दे सकता है।
- नेशनल मेडिकल कमीशन एक्ट 2019 – कंपाउंडर एक रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर नहीं था, फिर भी उसने डॉक्टर के स्तर की दवा एडमिनिस्टर की।
- नेशनल नर्सिंग एंड मिडवाइफरी कमीशन एक्ट 2023- नर्सिंग कोर्स करने के बावजूद उसने उन सीमाओं का उल्लंघन किया जो एक नर्स या कंपाउंडर के लिए तय हैं। पुलिस ने पाया कि कंपाउंडर को साध्वी की मेडिकल स्थिति की पहले से जानकारी थी, इसके बावजूद उसने निर्धारित मानकों की अवहेलना की।
मेडिकल बोर्ड से दोबारा मांगी राय
पुलिस कमिश्नर ओमप्रकाश ने बताया कि कुछ दवाओं के प्रभाव को लेकर मेडिकल बोर्ड से दोबारा राय मांगी है। बोर्ड की अंतिम राय आने के बाद कंपाउंडर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और राजस्थान मेडिकल एक्ट 1952 के तहत कार्रवाई की जाएगी।
28 जनवरी को हुई थी साध्वी की मौत
बता दें जोधपुर शहर के बोरानाडा इलाके में आरती नगर स्थित आश्रम में 28 जनवरी को साध्वी प्रेम बाईसा की तबीयत बिगड़ी थी। तब उन्हें जुकाम होने और सांस लेने में परेशानी होना बताया गया था। तब इलाज के लिए कंपाउंडर देवीलाल सिंह को बुलाया गया था। कंपाउंडर देवीसिंह ने दो इंजेक्शन लगाए थे।
इंजेक्शन लगने के तुरंत बाद उनकी तबीयत अचानक और ज्यादा बिगड़ गई थी। परिजन उन्हें लेकर पाल रोड स्थित प्रेक्षा हॉस्पिटल पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया था। साध्वी के पिता वीरमनाथ हॉस्पिटल से शव को आरती नगर स्थित आश्रम ले आए थे। पुलिस की दखल के बाद देर रात को शव एमजीएच मॉर्च्युरी में रखवाया था। इसके अगले दिन 29 जनवरी को देर शाम एमजीएच हॉस्पिटल में पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंपा गया था।
30 जनवरी को बाड़मेर के परेऊ गांव में साध्वी प्रेम बाईसा को समाधि दी गई थी। 2 फरवरी को विसरा सैंपल जांच के लिए भेजे गए थे। 11 दिन में एफएसएल जांच पूरी हुई। इसके बाद रिपोर्ट गुरुवार को जोधपुर पुलिस को सौंप दी गई। पुलिस ने एफएसएल जांच और पोस्टमाॅर्टम रिपोर्ट के आधार पर विशेषज्ञों से भी राय ली।
