Jagannath Rath Yatra : सोने की झाड़ू से राजा ने साफ किया रास्ता, मौसी के घर चले भगवान जगन्नाथ

News India live, Digital Desk : Jagannath Rath Yatra : आज ओडिशा के पुरी में आस्था का ऐसा महासागर उमड़ा है, जिसकी लहरें दुनिया के कोने-कोने तक पहुंच रही हैं। ‘जय जगन्नाथ’ के जयकारों से पूरा आसमान गूंज रहा है, क्योंकि महाप्रभु जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ अपने भव्य रथों पर सवार होकर निकल पड़े हैं अपनी मौसी के घर, गुंडिचा मंदिर की ओर।
यह सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि भक्ति, समानता और परंपरा का एक जीवंत उत्सव है। इस यात्रा की सबसे खूबसूरत और अनोखी रस्म है ‘छेरा पहंरा’।
क्या है ‘छेरा पहंरा’ की दिव्य परंपरा?
‘छेरा पहंरा’ का मतलब है सोने की झाड़ू से सफाई करना। यह रस्म कोई और नहीं, बल्कि पुरी के गजपति महाराज खुद निभाते हैं। रथों के यात्रा शुरू करने से पहले, राजा एक सेवक की तरह अपने हाथों में सोने की मूठ वाली झाड़ू और सुगंधित जल लेकर तीनों रथों के मंच की सफाई करते हैं।
यह परंपरा एक बहुत गहरा संदेश देती है – भगवान के सामने कोई बड़ा या छोटा नहीं होता, राजा भी उनका पहला सेवक है। जब राजा खुद भगवान के रथ के आगे झाड़ू लगाते हैं, तो यह समानता और समर्पण का प्रतीक बन जाता है।
तीन रथ, तीन देवता और लाखों भक्त
इस यात्रा में तीन विशाल और भव्य रथ होते हैं:
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नंदीघोष: भगवान जगन्नाथ का रथ, जो लाल और पीले रंग का होता है।
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तालध्वज: भगवान बलभद्र का रथ, जो लाल और हरे रंग का होता है।
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दर्पदलन (या देवदलन): देवी सुभद्रा का रथ, जो लाल और काले रंग का होता है।
लाखों श्रद्धालु इन रथों की रस्सियों को खींचने के लिए आते हैं, क्योंकि माना जाता है कि ऐसा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह दृश्य वाकई अद्भुत होता है, जब लाखों लोगों की भक्ति की शक्ति इन विशाल रथों को आगे बढ़ाती है। यह उत्सव सिर्फ ओडिशा में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में मनाया जाता है, जो भगवान जगन्नाथ की महिमा को दर्शाता है।।
