Konark to Martand : जानें भारत के सबसे प्रसिद्ध सूर्य मंदिरों का गौरवशाली इतिहास

News India live, Digital Desk : Konark to Martand: भारत में सूर्य देव को सिर्फ एक ग्रह नहीं, बल्कि जीवन और ऊर्जा का स्रोत मानकर पूजा जाता है। इसी गहरी आस्था ने देश के कोने-कोने में कुछ ऐसे भव्य सूर्य मंदिरों को जन्म दिया, जो आज भी अपनी कला, वास्तुकला और गौरवशाली इतिहास से दुनिया को हैरान करते हैं। आइए, जानते हैं भारत के कुछ ऐसे ही प्रसिद्ध सूर्य मंदिरों के बारे में।
1. कोणार्क सूर्य मंदिर, ओडिशा
यह मंदिर किसी पहचान का मोहताज नहीं है। ओडिशा में स्थित यह मंदिर यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है। इसकी बनावट एक विशाल रथ जैसी है, जिसे सात घोड़े खींच रहे हैं। रथ में 24 पहिए लगे हैं, जो सिर्फ खूबसूरती के लिए नहीं हैं, बल्कि ये एक धूप घड़ी का काम भी करते हैं, जिनसे समय का सटीक पता लगाया जा सकता है। यह मंदिर भारत की प्राचीन इंजीनियरिंग और वास्तुकला का एक जीता-जागता चमत्कार है।
2. मार्तंड सूर्य मंदिर, जम्मू-कश्मीर
जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में स्थित यह मंदिर आज भले ही खंडहर हो, लेकिन इसकी विशालता और भव्यता आज भी देखने वालों के रोंगटे खड़े कर देती है। 8वीं शताब्दी में बना यह मंदिर उस समय की बेहतरीन वास्तुकला का नमूना है। बर्फीले पहाड़ों के बीच स्थित यह मंदिर एक गौरवशाली अतीत की कहानी कहता है।
3. मोढेरा सूर्य मंदिर, गुजरात
गुजरात के मोढेरा में पुष्पावती नदी के किनारे बना यह मंदिर अपनी अद्भुत नक्काशी के लिए प्रसिद्ध है। इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत इसके सामने बना ‘सूर्य कुंड’ है, जो एक सीढ़ीदार तालाब है और इसकी दीवारों पर 108 छोटे-छोटे मंदिर बने हैं। हालांकि, अब यहां पूजा नहीं होती, लेकिन इसकी खूबसूरती आज भी पर्यटकों को अपनी ओर खींचती है।
4. सूर्यनायर कोविल मंदिर, तमिलनाडु
यह दक्षिण भारत का एक प्रमुख सूर्य मंदिर है, जो तमिलनाडु के कुंभकोणम में स्थित है। यह मंदिर इसलिए भी खास है क्योंकि यहां सूर्य देव के साथ-साथ अन्य सभी नवग्रहों की भी पूजा होती है। यह उन कुछ गिने-चुने सूर्य मंदिरों में से है, जहां आज भी नियमित रूप से पूजा-पाठ और दर्शन होते हैं।
5. अरसवल्ली सूर्य मंदिर, आंध्र प्रदेश
आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले में स्थित यह मंदिर बहुत प्राचीन माना जाता है। कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण 7वीं शताब्दी में कलिंग वंश के एक राजा ने करवाया था। इस मंदिर की खासियत है कि साल में दो बार, सूर्य की किरणें सीधी मंदिर में स्थापित भगवान की मूर्ति के चरणों पर पड़ती हैं। यह एक जीवंत मंदिर है, जहां भक्तों की भारी भीड़ रहती है।
ये मंदिर सिर्फ पूजा के स्थान नहीं, बल्कि हमारे गौरवशाली अतीत, उन्नत विज्ञान और अद्भुत कला के जीवंत सबूत हैं।
