आचार्य पुलक सागर का उदयपुर जिले में प्रवेश,खेरवाडा में निकली शोभायात्रा , रिमझिम बारिश के बीच गूंजे जयकारे
राष्ट्र संत मुनि पुलक सागर महाराज का आज उदयपुर जिले में प्रवेश हुआ। इस दौरान मुनि का उदयपुर के खेरवाड़ा कस्बे में ऐतिहासिक स्वागत किया। रिमझिम बारिश की बूंदों के संग जयकारों के बीच पुलक सागर महाराज और अन्य संतों की अगवानी की गई।
आचार्य श्री गुजरात से होते हुए मंगलवार को ससंघ डूंगरपुर जिले के भुवाली से होते हुए उदयपुर जिले की सीमा मोथली में प्रवेश किया। वहां पर खेरवाड़ा जैन समाज की और से मुनि का स्वागत किया गया। वहीं से भक्त मुनि के साथ खेरवाड़ा की तरफ आगे बढ़े।

इस दौरान रास्ते में बारिश की बूंदों से मौसम में शीतलता हो गई और भक्त बूंदों के बीच महाराज की जयकारों के साथ कदम आगे बढ़ाते गए। खेरवाड़ा में प्रवेश के दौरान जगह-जगह पुलक सागर महाराज और अन्य संतों के स्वागत के लिए कस्बेवासी आतुर थे। स्वागत द्वार लगाकर कस्बे को सजाया गया।

कस्बे के रोडवेज बस स्टैंड के बाहर जैन समुदाय की महिला बैंड ग्रुप ने बैंड बजाते हुए मुनि पुलक सागर महाराज की अगवानी की। नगर में विशाल शोभायात्रा निकाली गई जो नगर के मुख्य मार्गों से होती हुई मुख्य मंदिर परिसर पहुंची। वहां पर खेरवाड़ा के अलावा बाहर से आए भक्तों ने संतों के दर्शन कर उनसे आशीर्वाद लिया और धर्म चर्चा की।
शोभायात्रा नगर के मुख्य मार्गों से होते हुए शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर तहसील रोड पहुंची। स्थानीय जैन मंदिर सभागार में आयोजित धर्म सभा में आचार्य ने कहा कि संत समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं, उनके लिए सभी समाज जन एक समान है, चाहे वह कोई भी पथ हो।
आचार्य ने कहा कि प्रेम सबसे कीजिए, गुस्सा किसी पर मत कीजिए। क्रोध आपके व्यक्तित्व को धूमिल करता है, वही प्रेम उसे और अधिक निखारता है। धर्म सभा में पुलक सागर महाराज ने कहा कि आपकी भाषा ऐसी होनी चाहिए कि सामने वाले को लग जाए कि यह किस परिवार से है। उन्होंने कहा भाषा से ही आपके जीवन का परिचय हो जाता है, इसलिए अच्छी भाषा और शब्दों को चुने बात करते वक्त यहीं आपकी पहचान होगी।
धर्म सभा में स्थानीय दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष रमेश चंद्र कोठारी , महामंत्री भूपेंद्र कुमार जैन, उपाध्यक्ष रवि प्रकाश मेहता, पूर्व उपाध्यक्ष पारस जैन, दशा हुमड समाज के अध्यक्ष वीरेंद्र वखरिया, युवा परिषद महामंत्री कार्तिक गंगावत आदि उपस्थित थे।
मुनि पुलक सागर महाराज करीब 10 दिन तक का प्रवास खेरवाड़ा कस्बे में रहेगा। इसके बाद वे ससंघ ऋषभदेव विहार करेंगे जहां इस बार उनका चतुर्मास होगा। आचार्य 17 वर्षों के बाद ऋषभदेव में प्रवेश करने जा रहे है।
