रुंडेड़ा में तीन दिवसीय नानी बाई रो मायरो का देर रात हुआ समापन, भजनों पर झूमे श्रद्धालु
बाँसड़ा,कन्हैयालाल मेनारिया । हनुमंत धाम के डॉ.कानन वाला, छैल बिहारी व वनपाल गोपीलाल मेनारिया के तत्वावधान में महादेव मंदिर परिसर, रुंडेड़ा में तीन दिवसीय नानी बाई रो मायरो का आयोजन का मंगलवार देर रात्रि समापन हुआ। तीसरे दिन रात्रि नानी बाई रो मायरो कथा शुरू हुई और श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़नी शुरू हुई जो देर रात्रि तक मायरा समापन तक डटे रहे, जिसमें रुण्डेड़ा एवं आसपास के मेनार, खरसान, चोरवडी, चौकड़ी, गवारड़ी, नवानियां, इंटाली, किशन करेरी, डुंगला सहित अन्य गाँवो से श्रीकृष्ण भक्त मायरो सुनने के लिए पहुँचे। कथावाचक माणक चंद मेनारिया ने अंतिम दिन कथा में भजनों की प्रस्तुतियो से श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। कथा के दौरान कथावाचक ने द्वारका सु कृष्ण पधारिया, राधा रुक्मण लाया ये, सोना चांदी रो रथ जुतवायो, बैल सवायो ये, बीरो थारो आयो ये, चाल चाल मारी नानी बाई, कलश बदाओ ये चौपाइयों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
मायरे में कथावाचक पंडित माणक चंद मेनारिया ने भक्त नरसी मेहता और नानी बाई के बारे श्री कृष्ण ने किस प्रकार से भक्त नरसी की लाज रखी और नानी बाई के 56 करोड़ का मायरा भरा गया का संगीतमय वर्णन किया। कथा में प. मेनारिया ने कहा कि भगवान कृष्ण का लोकप्रिय मनुष्य रूप है, कृष्ण के लोक और शास्त्र में बालक, योद्धा, प्रेमी, परमेश्वर, मुक्तिदाता आदि कई रूप मिलते हैं, लेकिन उनके इस रूप से ग्रामीण जनसाधाराण का अपनापा सबसे अधिक है। यह कृष्ण का ऐसा रूप है, जो मानवीय संबंधों में इस तरह गुँथा-बँधा हुआ है कि यह लोक को अपना घर-परिवारी और कुटुम्बी लगता है।
समापन में सेंशन मजिस्ट्रेट ममता मेनारिया, वल्लभनगर प्रधान देवीलाल नंगारची, बड़ीसादड़ी प्रधान नंदलाल मेनारिया, इंदौर मेनारिया समाज के महामंत्री गणपत लाल मेनारिया बतौर अतिथि के रूप में शामिल हुए, जिनका ग्रामीणों ने तिलक व उपरणा पहनाकर स्वागत किया।
वही ग्रामीणों की मांग पर वल्लभनगर प्रधान देवीलाल नंगारची ने गांव के मेनारिया समाज के नोहरे में इंटरलॉकिंग करवाने हेतु 5 लाख रुपए की घोषणा की गई।
