कॉलेज संघर्ष समिति के पदाधिकारियों के खिलाफ पुलिस थाना भिनाय ने पेश की चार्जशीट

संघर्ष समिति ने विधायक पारीक के खिलाफ जताया आक्रोष

भिनाय/केकड़ी राजकीय महाविद्यालय भिनाय की संघर्ष समिति के 17 व्यक्तियों के खिलाफ 2 को पुलिस थाना भिनाय की और से अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या दो के न्यायालय में भारतीय दंड संहिता की धारा 283,143 व 149 में चार्जशीट पेश की गई।जिसमें भिनाय की सरपंच डा.अर्चना सुराणा सहित ओमप्रकाश आचार्य,राकेश कुमार शर्मा,प्रकाश चन्द आचार्य,दिलीप सिंह पॅवार,पुखराज दर्जी,सुरेश कुमार जोशी,सत्यनारायण कछोट,ताराचन्द कलवार,सुभाष वर्मा,शैलेन्द्र आचार्य,श्याम सुन्दर कछौट,रामेश्वर माली,वसीम अकरम मंसूरी,गजराज कलवार,रंगलाल माली,इरफान देशवाली को आरोपी बनाया गया है।आरोपीगण की और से एडवोकेट डॉ. मनोज आहूजा ने निःशुल्क पैरवी करते हुए ज़मानत आवेदन प्रस्तुत किया जिस पर न्यायाधीश ने दस हजार रुपये की जमानत मुचलका पेश करने पर रिहा करने के आदेश पारित किए।आरोपियों के अधिवक्ता डॉ. मनोज आहूजा ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी के अनुसार थानाधिकारी महावीर मीणा 10 मार्च 22 को सुबह 10.30 बजे अंबेडकर सर्किल पर पहुंचे जहां पर ग्राम भिनाय के काफी लोगों की भीड़ इकठ्ठी हो रखी थी।जिनकी मेरे द्वारा समझाईश की गई कि कानून व्यवस्था को नहीं बिगाड़ें व आमजन को परेशान करने जैसा कोई काम नहीं करें लेकिन उन लोगों पर समझाईश का कोई फर्क नहीं पड़ा वहां पर उपस्थित लोगों का नेतृत्व सरपंच अर्चना सुराणा सहित करीब पचास व्यक्तियों को उकसाकर भिनाय से केकड़ी जाने वाले आम रास्ते के बीच मे खड़े होकर नारेबाजी करते हुए स्वंय द्वारा अन्य लोगों को इस कृत्य के लिए उकसाकर आम रास्ते को अवरुद्ध करने के उद्देश्य से रास्ते पर पत्थर व कांटे डालकर रोड़ को बंद कर दिया।जिनको बार बार समझाईश की गई कि आप कॉलेज आवंटन के संबंध में नियमानुसार विधिक कार्यवाही करें।कानून व्यवस्था बिगाड़ कर आम रास्ते को अवरुद्ध नहीं करें।लेकिन वो लोग नहीं माने।उक्त रिपोर्ट पर बाद अनुसंधान आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट पेश की गई है।
क्या है मामला-मामले के संबंध में जानकारी देते हुए भिनाय सरपंच डॉ. अर्चना सुराणा ने बताया कि राज्य सरकार ने भिनाय के लिए राजकीय महाविद्यालय की घोषणा की थी जिसके लिए भूमि आवंटन का प्रस्ताव मांगे जाने पर स्थानीय प्रशासन ने मसूदा विधायक राकेश पारीक के निर्देश से भिनाय में भूमि नहीं होने की रिपोर्ट भेजकर महाविद्यालय भिनाय से आठ किलोमीटर दूर छछूंदरा खोलने का प्रस्ताव भेज दिया जिस पर भिनाय के नागरिकों ने महाविद्यालय संघर्ष समिति के बैनर से धरना प्रदर्शन व आंदोलन किया।जिस पर भी राज्य सरकार द्वारा भिनाय का महाविद्यालय भिनाय में नहीं खोलने पर संघर्ष समिति द्वारा राजस्थान उच्च न्यायालय की शरण ली गई।जहां पर राजस्थान उच्च न्यायालय की डीबी ने रिट याचिका स्वीकार कर छछुंदरा में महाविद्यालय खोले जाने के प्रस्ताव को निरस्त कर दिया तथा राज्य सरकार को महाविद्यालय भिनाय में ही खोले जाने के निर्देश दिए।
संघर्ष समिति को बार एसोसिएशन भिनाय व संयुक्त अधिवक्ता महासंघ ने समर्थन की घोषणा करते हुए निःशुल्क पैरवी की घोषणा की थी।उसी घोषणा की पालना में एडवोकेट डॉ.मनोज आहूजा द्वारा प्रकरण में निशुल्क पैरवी की जा रही है।
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने स्थानीय विधायक राकेश पारीक की कार्यप्रणाली के खिलाफ आक्रोश व्यक्त करते हुए मुकदमा दर्ज करने व झूठी चार्जशीट पेश करने की कार्यवाही का विरोध करते हुए मरते दम तक संघर्ष करने व महाविद्यालय भिनाय में ही बनवाने का आव्हान किया।उन्होंने कहा कि आए दिन लोग लाशों की राजनीति करते हुए नेशनल हाइवे जाम कर देते हैं जिनके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की जाती लेकिन विधायक पारीक के इशारे से अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण धरना देने वालों के खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज करवाया तथा झूठी चार्जशीट पेश की है जिसका जवाब आने वाले समय में वो जरूर देंगे।

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