मिसाल-बेमिसाल, गुरु की विदाई आंखों में अश्रुधार भर लाई, स्थानांतरित शिक्षक की विदाई पर भावुक हुए छात्र, अभिभावक, पारिवारिक संस्कारों ने दी छात्रों से भावनात्मक लगाव की प्रेरणा

सरकारी विद्यालयों में प्राथमिक शिक्षा की बात होते ही मन में जो तस्वीर कौंधती है, यह तस्वीर उससे जुदा है। यहां शिक्षा के नाम पर मजाक नहीं हुआ। गुरुजी सात साल बच्चों को शिक्षा देने की साधना करते रहे और जब विदाई की बेला आई तो सबको रुला गए। यह नाता स्वार्थ का नहीं, कुछ देने के संकल्प और अपनेपन की कलक का था। ऐसे रिश्ते बनाने वाले लोग भले ही कम रह गए हों पर बन जाएं तो भुलाए नहीं भूलते।

उदयपुर जिले के वल्लभनगर ब्लॉक के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बाठेड़ाखुर्द में वरिष्ठ अध्यापक अंग्रेजी के रहे भरत कुमार जावत के विदाई समारोह में उपस्थित छात्र, अभिभावक, सहयोगी शिक्षक व उपस्थित अन्य लोग भी भावुक थे। सात साल बाद भरत कुमार जावत का तबादला उनके गांव पास खडोदा के लिए हुआ था। ऐसे में गुरुजी भी भावुक हुए बिना न रह सके। उनकी आंखों से भी आंसू बह निकले।

हाल ही में गावँ के पास खड़ोदा के लिए स्थानांतरित हुए भरत जावद ने ‘फ्रंट न्यूज 24’ से कहा कि वे अपने पिता मोहन लाल जावत की सीख ‘अपना शिक्षण कार्य सही ढंग से करोगे तो हर जगह अपनापन मिलेगा’ को गांठ बांधकर यहां आए थे। 
इसी विद्यालय के अध्यापक चंद्रशेखर ने बताया कि मास्टर साहब न केवल पढ़ाने, बल्कि उसके खाने-पीने का भी ध्यान रखते थे। सफाई के लिए टोकते रहते थे और अच्छे ढंग से पढ़ाते थे, कभी मारते नहीं थे। गुरुजी स्कूल में चोट, उल्टी-दस्त, बुखार आदि की दवा भी रखते थे और किसी की तबीयत खराब होने पर बेचैन हो उठते थे।
गांव के अनिल जोशी कहते हैं कि वे व्यवहार कुशल और मेहनती अध्यापक थे उनकी कमी हमेशा खलेगी।  प्रधानाध्यापिका किरण कोटिया,ईश्वर लाल मेनारिया,तुलसी राम जावत,धुला राम मीणा, चंदशेखर, सुमन,प्रिंयका कुंवर झाला मौजूद रहे।

इनपुट कन्हैयालाल मेनारिया

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