हरतालिका तीज पर क्षेत्र की महिलाओं ने पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन के लिए निराहार, निर्जल किया व्रत

महिलाओं ने बालू का शिवलिंग बना भगवान शिव की पुजा अर्चना की

बाँसड़ा 31 अगस्त :- भारतीय संस्कृति में पति-पत्नि के रिश्तों को बेहद खास माना जाता है, यही वजह है इनसे जुड़े कई त्योहारों कों काफी हर्षोल्लास के साथ मनाने की प्रथा है। हस्त नक्षत्र युक्त भाद्रप्रद मास की शुक्ल पक्ष तृतीया मंगलवार को वल्लभनगर, मेनार, रुण्डेड़ा, विजयपुरा, नवानिया, खरसान, भटेवर बाँसड़ा सहित गांवों में महिलाओं ने अपने सुहाग की लंबी उम्र और परिवार की सुख समृद्धि की कामना के लिए निराहार हरतालिका तीज का व्रत हर्षोल्लास एवं धूमधाम मनाया। महिलाओं के लिए यह व्रत को सबसे कठिन है, क्योंकि यह निराहार के साथ निर्जला रखा जाता है। हरतालिका तीज व्रत के अवसर पर कन्याओ ने सुयोग्य वर प्राप्ति के लिए शिव की आराधना की। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को करने वाली महिलाएं अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन प्राप्त करती हैं और यह व्रत करने से उनका निश्चित ही मनोरथ सिद्ध होता है।
हरतालिका तीज पर पति की लंबी आयु के लिए सौभाग्यवती स्त्रियां और अविवाहित युवतियां मन मुताबिक वर पाने के लिए व्रत किया। वही महिलाओ ने निराहार, बिना फलाहार और निर्जला होकर के व्रत किया और भगवान शिव-पार्वती के विवाह की कथा सुनी और महिलाओं ने घर की चौकी में भगवान शिव पार्वती की स्वर्ण की प्रतिमा स्थापित करके केले, पुष्प, बिल्वपत्र आदि के खंभे स्थापित करके जिसे हम स्थानीय भाषा में फुलेरा कहते हैं को वस्त्र के चंन्देवा तानकर बंदनवारे लगा कर के भगवान शिव की मूर्ति बालू का शिवलिंग स्थापित करके महिलाओ ने स्तुति की और विघ्नहर्ता भगवान गणेश की पूजा की, इसके बाद मां पार्वती को सुहाग का जोड़ा और श्रृंगार की सामग्री अर्पित की और भोले के जयकारों के साथ एवं शिव पार्वती के गीत के साथ भगवान शिव और माता पार्वती की आरती की, तत्पश्चात रात्रि को जागरण किया और भगवान शिव के पूजन के बाद फल फूल पकवान मेवा, लड्डू, मिष्ठान तरह-तरह के भोग की सामग्री बालू शिवलिंग पर समर्पण की गई और भगवान शिव की विधि विधान से पूजा अर्चना की।

इनपुट : कन्हैयालाल मेनारिया

0
0

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed

error: Content is protected !!