मानव को दुर्लभ मानव भव प्राप्त हुआ है, उसे हर प्राणी से आत्मीय प्रेम करना चाहिए, जिससे क्षमा भाव स्वयं ही आत्मा से उत्पन्न होता है : कोमल मुनि
बाँसड़ा 31 अगस्त :- गुरू मोती दरबार श्रमण संघीय पुज्य शिवाचार्य के आज्ञानुवर्ति एव गुरु अम्बेश सौभाग्य मदन सुशिष्य मेवाड उपप्रवर्तन युवा मनीषी गुरूदेव कोमल मुनि, नवदिक्षीत कवीहृदय हर्षित मुनि आदि ठाणा 2 के चातुमार्सिक सानिध्य में श्री वर्धमान स्थानक जैन श्रावक संघ वल्लभनगर एवं चातुर्मास सेवा समिति वल्लभनगर के तत्वाधान में आयोजित धर्मसभा में श्रावक श्राविकाओ की अपार उपस्थिति में पुज्य गुरु कोमल मुनि ने फरमाया कि मानव को दुर्लभ मानव भव प्राप्त हुआ है। उसे हर प्राणी से आत्मीय प्रेम करना चाहिए जिससे क्षमा भाव स्वयं ही आत्मा से उत्पन्न होता है। परिवार में प्रत्येक सदस्य जिस प्रकार आत्मीय प्रेम से मनुष्य जीता है उसी प्रकार समाज, संग, शहर में सभी से प्रेम से जियेगा तो मानव का चारित्र महान बन जायेगा एवं आर्दश व्यक्त्वि के रूप में विकसित हो जाएगा।

मुनि ने प्रवर्धन के दौरान परिवार, संघ, समाज से सौहार्द एवं प्रेम से रहने की प्रेरणा दी मानव में अगर आत्मीय प्रेम विकसित हो जाता है तो उसमें क्षमा भाव स्वमेव ही उत्पन्न हो जाता है। मंगलवार को सवत्सरी के पर्व को धर्मसभा में तप आराधना से मनाने की प्रेरणा करते हुए नगरवासियों में बड़ी तपस्या के तहत 10,9,8,7,6 उपवास के प्रत्याख्यान लिये। दोपहर में तपस्वीयों के सम्मान में चौबीसी का कार्यक्रम प्रायोजित कर प्रभावना वितरित की एवं कल्पसूत्र का वांछन किया गया। हर्षित मुनि ने अंतगढ़ सुत्र के सातवे वर्ग का वाछन कर उसे पुर्ण किया एवं आठवा वर्ग प्रारंभ किया। मुमुक्ष पंकज तातेड ने बताया कि धर्मसभा में मावली, फतेहनगर, सनवाड, भटेवर, खेरोदा, अमरपुरा श्रीसंघ से श्रावक-श्राविकाए उपस्थित हुए। धर्मसभा का संचालन संघ मंत्री रमेश बडाला ने किया।
इनपुट : कन्हैयालाल मेनारिया
