आयुर्वेद चिकित्सा में 30 वर्षों की सेवाओं के बाद वैद्य (डॉ.) शोभालाल औदीच्य को मिला राज्य स्तरीय धनवंतरी पुरस्कार”, “आरोग्य समिति राजकीय आदर्श आयुर्वेद औषधालय, सिंधी बाजार उदयपुर की उत्कृष्ट सेवाओं का सम्मान

डीपी न्यूज नेटवर्क,उदयपुर,विनोद कुमार रेगर । आयुर्वेद चिकित्सा क्षेत्र में समर्पित सेवाएँ देने वाले वैद्य (डॉ.) शोभालाल औदीच्य, वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्साधिकारी, आरोग्य समिति राजकीय आदर्श आयुर्वेद औषधालय, सिंधी बाजार उदयपुर को इस वर्ष राज्य स्तरीय धनवंतरी पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार उन्हें राजस्थान सरकार द्वारा धन्वंतरि जयंती एवं नवें आयुर्वेद दिवस के शुभ एवं पावन अवसर पर प्रदान किया गया।

वैद्य शोभालाल औदीच्य को भगवतीसिंह मेहता सभागार, हरीश चंद्र माथुर, राजस्थान राज्य लोक प्रशासन संस्थान जयपुर में प्रमुख शासन सचिव भवानी सिंह देथा, वाइस चांसलर, अंतराष्ट्रीय वैदिक एवं वैलनेस यूनिवर्सिटी शिकागो यू. एस. ए. – प्रो. अभिमन्यु कुमार, उप शासन सचिव सावंत चायल, निदेशक आयुर्वेद आनंद कुमार शर्मा एवं अतिरिक्त निदेशक मेघना चौधरी आदि गणमान्य अतिथियों द्वारा प्रशस्ति पत्र स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया। इस पुरस्कार के माध्यम से उनकी 30 वर्षों की अथक सेवा, उत्कृष्टता और आयुर्वेद के प्रति समर्पण को सराहा गया है, जो उनके प्रयासों और परिश्रम का परिणाम है।

“आयुर्वेद के प्रति योगदान और प्रयास”

वैद्य औदीच्य ने अपने कार्यकाल में आयुर्वेद को आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के साथ जोड़ते हुए, राजस्थान के सबसे प्रतिष्ठित आयुर्वेदिक औषधालय का निर्माण किया है। उनके नेतृत्व में आरोग्य समिति राजकीय आदर्श आयुर्वेद औषधालय, सिंधी बाजार में अत्याधुनिक फिजियोथैरेपी, पंचकर्म, और योग यूनिट की शुरुआत की गई, जो विभिन्न रोगों के उपचार के लिए अत्यधिक लाभकारी सिद्ध हुई हैं। इन यूनिट्स के माध्यम से न केवल रोगियों को आधुनिक और पारंपरिक चिकित्सा का लाभ मिलता है, बल्कि उन्हें शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में संतुलन स्थापित करने का भी अवसर मिलता है।

वैद्य औदीच्य का मानना है कि आयुर्वेदिक चिकित्सा की महत्ता को समझने और अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने के लिए आवश्यक है कि इसे आधुनिक सुविधाओं के साथ विकसित किया जाए। उन्होंने विभिन्न भामाशाहों, स्वयंसेवी संस्थाओं और समाज के लोगों का आभार व्यक्त करते हुए बताया कि यह औषधालय उनके सहयोग से ही एक करोड़ 20 लाख रुपये से अधिक के जनसहयोग से बनाया जा सका है।

“अत्याधुनिक सुविधाएँ – रोगियों के लिए बेहतर उपचार का केंद्र”

आरोग्य समिति राजकीय आदर्श आयुर्वेद औषधालय, सिंधी बाजार उदयपुर की फिजियोथैरेपी यूनिट गठिया, पीठ दर्द, और जोड़ों की समस्याओं के लिए विशेष सेवाएँ प्रदान करती है। आधुनिक उपकरणों और अनुभवी विशेषज्ञों की देखरेख में यहाँ विभिन्न रोगों का उपचार किया जाता है। फिजियोथैरेपी के माध्यम से रोगियों को न केवल दर्द में राहत मिलती है, बल्कि उनका जीवन भी सुधारता है।

इसके साथ ही पंचकर्म यूनिट में विशेष गुणवत्ता युक्त आयुर्वेदिक तेलों और औषधियों का उपयोग कर शारीरिक और मानसिक संतुलन को सुधारने में मदद की जाती है। पंचकर्म को आयुर्वेद में प्रमुख चिकित्सा विधियों में से एक माना जाता है, जो शरीर को शुद्ध करके रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है। पंचकर्म की प्रक्रिया से रोगियों को मानसिक और शारीरिक तनाव से मुक्ति मिलती है और वे नए सिरे से जीवन जीने के लिए प्रेरित होते हैं।

योग यूनिट में नियमित रूप से योगासन, प्राणायाम और ध्यान सत्रों का आयोजन होता है। यह यूनिट रोगियों के मानसिक स्वास्थ्य को सुधारने और शारीरिक सहनशक्ति को बढ़ाने में सहायक सिद्ध हुई है। योग के माध्यम से रोगी अपने जीवन को तनाव मुक्त और संतुलित बनाए रखने में सक्षम होते हैं। यहाँ प्रशिक्षित योग विशेषज्ञों द्वारा रोगियों की व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुसार विभिन्न योगासन और प्राणायाम सिखाए जाते हैं, जिससे उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में अद्भुत सुधार देखने को मिलता है।

समाज में आयुर्वेद के प्रति जागरूकता बढ़ाने के प्रयास”

वैद्य औदीच्य का उद्देश्य न केवल चिकित्सा सेवा प्रदान करना है, बल्कि समाज में आयुर्वेद के प्रति जागरूकता भी बढ़ाना है। उन्होंने विभिन्न संगोष्ठियों, कार्यशालाओं और स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन कर समाज में आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के महत्त्व को पहुँचाने का प्रयास किया है। वे मानते हैं कि आयुर्वेद में हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त उपचार और स्वास्थ्य का समाधान छिपा हुआ है, जिसे जागरूकता के माध्यम से जनसाधारण तक पहुँचाया जा सकता है।

 

“राज्य स्तर पर आयुर्वेद चिकित्सा के क्षेत्र में नई उम्मीदें”

राजस्थान सरकार के आयुर्वेद विभाग द्वारा मान्यता प्राप्त यह सम्मान न केवल वैद्य औदीच्य के लिए, बल्कि राजस्थान के आयुर्वेद चिकित्सा क्षेत्र में एक नई उम्मीद का संचार है। इस उपलब्धि ने राज्य के अन्य चिकित्सा अधिकारियों को भी प्रेरित किया है कि वे आयुर्वेद के परंपरागत और वैज्ञानिक सिद्धांतों को अपनाते हुए राज्य के लोगों के स्वास्थ्य में सुधार लाने के लिए अधिक प्रयास करें। राज्य सरकार द्वारा आयुर्वेद के प्रति जागरूकता और समर्पण को प्रोत्साहित करना, भविष्य में आयुर्वेद के विकास में मील का पत्थर साबित होगा।

भविष्य की योजनाएँ और लक्ष्‍य वैद्य औदीच्य ने इस सम्मान को अपने कार्यों का प्रतिफल मानते हुए कहा, “यह पुरस्कार हमारे प्रयासों और समाज की सहायता का फल है। हमारा लक्ष्य आयुर्वेद की प्राचीन परंपराओं को आधुनिक सुविधाओं के साथ जोड़कर अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाना और उन्हें बेहतर स्वास्थ्य प्रदान करना है।” उन्होंने बताया कि औषधालय का विस्तार कर इसे राज्य के सबसे बड़े आयुर्वेदिक चिकित्सा केंद्रों में शामिल करने की योजना है, ताकि अधिक से अधिक लोग आयुर्वेदिक चिकित्सा का लाभ ले सकें। उनका मानना है कि समाज की सेवा करने का यह अवसर उनकी सबसे बड़ी पूँजी है और वे इसे पूरी निष्ठा से निभाते रहेंगे।

समर्पण और सहयोग की कहानी वैद्य औदीच्य का यह सफर आसान नहीं था। उन्होंने समाज के विभिन्न वर्गों के सहयोग से इस औषधालय को उन्नत किया और आयुर्वेद चिकित्सा की विभिन्न शाखाओं में आवश्यक अनुसंधान और विस्तार करने के लिए हर संभव प्रयास किया। उनके समर्पण और सेवा भाव के चलते ही उन्हें राज्य स्तरीय धनवंतरी पुरस्कार जैसे सम्मान से नवाजा गया है, जो न केवल उनकी, बल्कि उनके समस्त सहयोगियों और रोगियों की मेहनत का परिणाम है।

वैद्य औदीच्य का यह दृष्टिकोण कि आयुर्वेदिक चिकित्सा को जन-जन तक पहुँचाना चाहिए, समाज के प्रति उनकी गहरी समझ और समर्पण को दर्शाता है। आयुर्वेद चिकित्सा के क्षेत्र में इस नए आयाम ने उन्हें राजस्थान के अग्रणी आयुर्वेद चिकित्सक के रूप में स्थापित किया है। उनके इस कार्य ने न केवल राजस्थान, बल्कि पूरे भारत में आयुर्वेद चिकित्सा के प्रति लोगों का विश्वास और जुड़ाव बढ़ाने में योगदान दिया है।

इस प्रकार, वैद्य (डॉ.) शोभालाल औदीच्य का यह सफर, उनकी 30 वर्षों की सेवा, समर्पण, त्याग तथा उनके द्वारा स्थापित आयुर्वेदिक चिकित्सा के उत्कृष्ट मानकों का एक प्रतीक है। राज्य स्तरीय धनवंतरी पुरस्कार ने उनकी मेहनत को मान्यता दी है और उनके कार्यों को समाज में नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया है। आयुर्वेद चिकित्सा के क्षेत्र में उनके योगदान को राजस्थान के लोग लंबे समय तक याद रखेंगे। उनके प्रयासों ने राज्य में आयुर्वेद के प्रति विश्वास और आदर को बढ़ाया है, और इस सम्मान ने उनके और उनके सहयोगियों के समर्पण को एक नई पहचान दी है।

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