मेनार में नवरात्रि दुर्गा अष्ठमी पर राजसी ठाट बाट शाही लवाजमे के साथ रजत पालकी में मां अम्बें और कालिका माता भक्तो को दर्शन देने निकली नगर भ्रमण, उमड़ा श्रद्धा का जनसैलाब

रिपोर्ट : कन्हैयालाल मेनारिया 

उदयपुर । शारदीय नवरात्रि पर्व पर मेहतागढ़ मेनार में माँ अम्बेमाता जी, कालिका माताजी सहित देवालयों में कई धार्मिक अनुष्ठान हो रहे है। वही मेनार माँ अम्बेमाता जी ऐतिहासिक मंदिर अटूट अनगिनत इतिहास समेटे है। जहाँ एक ओर ब्रह्म सागर की पाल पर विराजमान माँ अम्बे का दरबार, तो दूसरी तरफ पाल पर ही 52 फिट शिव प्रतिमा अद्भूत स्वरूप में विराजित है। मेनार में अम्बेमाता जी की सेंकडो वर्ष पूर्व गुजरात राज्य के पाटण से ज्योत लाकर मंदिर की माता की स्थापना कर प्रतिंमा स्थापित की गई थी। उस समय लाई गई ज्योत आज तक मंदिर गृभ गृह मे ज्योत अखण्ड प्रज्ज्वलित है। जो 600 वर्ष पूर्व गांव की स्थापना के साथ ही लाई गई थी। वही मेवाड़ में आस्था का मुख्य केंद्र मेनार अम्बाताजी शक्तिपीठ है। नवरात्रि पर्व पर यहाँ गवारड़ी, ईंटाली, चोरवडी, निलोद, रोहिड़ा, चौकड़ी, खरसान, बाठरड़ा खुर्द से कई श्रद्धालु पैदल आ रहे है और माता का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे है। कहते है यहाँ जो मन्नत मांगता है उसकी मन्नत पूरी होती है। अष्टमी पर मेवाड़ में मेनार ही एक ऐसा गांव है जहाँ माताजी की विशाल शोभायात्रा गांव भ्रमण पर निकलती है, जिसमें आसपास सहित गांव के हजारों श्रद्धालु शामिल होते है। इस मंदिर की मूर्ति का विशेष चमत्कार फूल मांगने की परम्परा से है। दर्शनार्थी यहां पर किसी मन्नत को लेकर हां या ना में जवाब मांगते हैं, जिसमें मूर्ति पर श्रृंगारित किए गए फूल प्रतिमा के दायीं और बायीं तरफ गिरकर इसका जवाब देते हैं। इस मंदिर का अंतिम बार जिर्णोध्वार 2015 मे पूर्ण हुआ है, इस शिखर मंदिर को ग्रामीणों द्वारा 50 लाख रुपये खर्च कर निर्माण करवाया गया था। वही मंदिर परिसर में आने वाले भक्तों को ब्रह्म सागर के पानी की कल कल और परिंदों की चह चहाहट प्रकृति के मनोरम दृश्य का आभास कराती है।

मेनार में पक्षी प्रेमी एव ग्रामीण करते हैं पक्षियों की सुरक्षा

मेनार में ग्रामीण एवं पक्षी मित्रों द्वारा पक्षियों के लिए तालाब संरक्षित कर रखा है। ग्रामीणों के द्वारा संरक्षण किए जाने के कारण यह क्षेत्र जैव विविधता से भरपूर दिखाई देता है। देश-प्रदेश का यह अनूठा उदाहरण होगा कि पक्षियों की संख्या को देखकर उनके उपयोग के लिए ही यहां इन दोनों तालाबों से ग्रामीण काश्तकार सिंचाई के लिए न तो पानी लेते हैं और न ही किसी को लेने देते हैं। इसके साथ ही ग्रामीणों द्वारा मछलियों से लबालब इस तालाब में किसी भी प्रकार से न तो ग्रामीण मत्याखेट करते हैं और न ही इसका ठेका दिया जाता है। इतना ही नहीं गर्मियों में इस तालाब का पानी जब सूखने लगता है तो मछलियों और पक्षियों को बचाने के लिए ग्रामीण टेंकरों के माध्यम से तालाब को जल से भरते हैं।

मेनार में अभी पैरेग्रिन फाल्कन, इसेबलीन व्हीटर, डेजर्ट व्हीटर, ब्लैक हेडेड बंटिंग, रेड हेडेड बंटिंग, ग्रेटर फ्लेमिंगो, कॉमन क्रेन, व्हाइट येलो एवं ग्रे वेग्टेल्स, कॉमन पोचार्ड, यूरेशियन विजन, टफ्टेड डक, नॉर्दन शोवलर, ग्रीन विंग्ड टील, रडी शेल्डक, ग्रेलैग गीज, बार हेडेड गीज, मार्श हेरियर, स्टेप्पी ईगल, शॉर्ट टोड स्नेक ईगल, ग्रेट कॉर्पोरेंट, साइबेरियन स्टोनचेट, पाइड बुश चैट जैसे प्रवासी परिंदे देखे जा रहे हैं। इसके साथ ही स्थानीय पक्षियों में सफेद टिकड़ी, छोटी डुबडूबी, ग्रेट क्रेस्टेड ग्रीब, कॉटन पिग्मी गूज, कॉम डक, स्पॉट बिल्ड डक, ओरिएंटल डार्टर, इंडियन कॉर्पोरेंट, स्केली ब्रेस्टेड मुनिया, पाइड किंगफिशर, पेंटेड स्टोर्क, ग्रे एंड पर्पल हेरोन, पेंटेड स्टार्क, ब्लैक नेक्ड स्टॉर्क आदि प्रजाति के पक्षी आते है

  • भक्तो ने रथयात्रा का जगह-जगह पुष्प एवं अबीर गुलाल की वर्षा कर किया स्वागत, स्वागत में श्रद्धालुओं ने बिछाए पलक पांवड़े
  • माँ अम्बे, कालिका माता के जयकारों से गुंजा मेहतागढ़ मेनार, बंदूकों की सलामी के साथ रवाना हुई रथयात्रा

शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व पर मेवाड़ के मेहतागढ़ मेनार में दुर्गाष्ठमी पर्व पर राजसी ठाट बाट शाही लवाजमे के साथ रजत पालकी में इत्र की महक और गुलाब के फुलों से सुसज्जित रथ में मां अम्बें माता एवं कालिका माताजी को जयकारों के बीच विराजित कर 46वी शोभायात्रा निकाली गई, रथयात्रा शाही लवाजमे के साथ सुबह 10 बजे ब्रह्म सागर की पाल पर स्थित मंदिर प्रांगण से बंदूकों की सलामी के साथ रवाना हुई, तो श्रद्धालुओं ने माँ अम्बे, कालिका माता के जयकारों से गलिहारो को गुंजायमान कर दिया। शोभायात्रा की शोभा बढ़ाने हेतु शोभायात्रा में घोडो ने अपने करतब दिखाए।

अवसर था नवरात्रि अष्टमी का। मेनार में शुक्रवार को मां अम्बे एवं कालिका माता की बेण्ड बाजों, दो ढोल, थाली, मादल के साथ भक्ति गीतों ओर जयकारों के साथ रजत पालकी में मंदिर गर्भगृह से माता की प्रतिमा को फूलों से सुसज्जित रथ में बिराजित कर राजसी ठाट बाट शाही लवाजमे के साथ माता की भव्य शोभायात्रा रवाना होने लगी तो मेनार के युवाओं ने बन्दुकों से सलामी दी। शोभायात्रा में पुरूष मेवाड़ की पारंपरिक वेशभूषा धोती, कुर्ता तो महिलाएं लाल चुनर ओढ़े हुए शामिल हुई। रथयात्रा में भक्तगण माता के चवर ढोल रहे थे, तो कोई अबीर गुलाल की वर्षा कर रहा था। सुबह 10 बजे रथयात्रा मुख्य रास्तों नीम का चोक, जवाहरनगर, आमलिया बावजी, थंब चोक, स्कूल मार्ग, गणेश घाटी, निचली पोल, हैरी, विका मेहता चोक से होते हूए 5 घंटे नगर भ्रमण कर शोभायात्रा पुनः माता मन्दिर पर शाम 3.15 बजे पहूंची। माता के स्वागत में जगह जगह भक्तों ने पलक पावड़े बिछा दिए और मुख्य रास्तों में भक्तगणों ने जगह-जगह फलाहार, प्रसाद, अबीर गुलाल सहित पुष्प वर्षा कर स्वागत, सत्कार किया एवं माता को श्रीफल भेंट किए। रथ यात्रा ज्यो-ज्यो आगे बढ़ी, त्यों-त्यों भक्तो का जनसैलाब बढ़ता रहा।

रथयात्रा में माता के जयकारों एवं बैंड बाजे पर मधुर बजते भक्तिगीतों से पूरा मार्ग भक्तिमय हो गया। श्रद्धालु बैंड बाजो, ढोल, थाली मादल की झनकार पर गैर नृत्य हुआ तो हजारों लोगों ने इस यादगार पल को अपने मोबाईल एवं केमरे में केद किया। हर एक व्यक्ति, महिला शक्तिरूपा के रंग में तल्लीन हो गया। माता के जयकारों से पूरा मेनार गूंज उठा। अंत में भक्तों में प्रसाद वितरण किया गया।

रथयात्रा में बैठने के लिए लगी बोलियां

रथयात्रा में बैठने के लिए शुक्रवार सुबह 7 बजे ग्रामीण मंदिर प्रांगण में एकत्र हुए और रथ में बैठने के लिए बोलियां लगी, जिसमें रथ में शेर स्थापना, चवर, गोटा, भेंट पात्र, गर्भ गृह से रथयात्रा में माता स्थापना, अबीर की वर्षा की बोलियां लगाई गई, तत्पश्चात माता जी को रथयात्रा में विराजमान किया गया। जिसमें जिन भक्तो ने बोलिया लगाई वह भक्त रथ में माता की सेवा हेतु बैठे।

अष्ठमी पर साढ़े तीन घंटे का हुआ माता के दरबार में हुआ हवन 

मंदिर प्रांगण में रथयात्रा के पहुँचने के बाद पंडित मांगीलाल आमेटा, जमनाशंकर चौबीसा के सानिध्य में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धालुओं की उपस्थिति में यजमानो द्वारा यज्ञशाला में हवन किया गया और 2 बजे बाद हवन की पूर्णाहुति हुई। जिसमें विभिन्न आहुतियां दी गई। यह हवन करीब साढ़े तीन घंटे तक चला। शाम को ग्रामीणों ने चटक चूरमा का माता को भोग लगाया।

नवरात्रि में मेवाड़ के एक मात्र गांव मेनार जहाँ यह निकलती है शोभायात्रा 

मेवाड़ मे मेनार गाँव ही एक ऐसा गाँव है जहाँ नवरात्रि की दुर्गा अष्ठमी पर भव्य रथयात्रा ब्रह्म सागर की पाल पर विराजित गोखड़नुमा शिखर मंदिर से माँ अम्बे और काली के दरबार में जगमग ज्योत के साथ माँ के दरबार से निकलती है। यह विशाल रथयात्रा पिछले 46 वर्षों से भी ज्यादा समय से निकाली जा रही है जिसे देखने के लिए मेनार गांव के विदेशों में कार्यरत युवा एवं गांव की सभी बहिन बेटीयां सहित आसपास के गांव रुण्डेड़ा, खरसाण, वाना, बाठरडा खुर्द, बांसडा, गवारडी, चोकडी, ईंटाली, रोहिड़ा, विजयपुरा, खेरोदा, भटेवर, चोरवडी सहित अन्य गावों से हजारों की संख्या में लोग इस शोभायात्रा में शामिल हुए।

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