रुण्डेड़ा में करीब 45 लाख रुपए की लागत से मार्बल में गायरिया बावजी का बन रहा है भव्य मंदिर, 28 लाख का कार्य हुआ पूर्ण
यह मंदिर दर्जन भर से ज्यादा गांवो के श्रद्धालुओं का है आस्था का केंद्र, मंदिर अब लेने लगा है आकार
बांसडा,कन्हैयालाल मेनारिया । ग्राम पंचायत रुण्डेड़ा में स्थित गायरिया बावजी मंदिर करीब दर्जन भर से ज्यादा गांवो के श्रद्धालुओं का आस्था का मुख्य केंद्र है। इस प्राचीन मंदिर की गांव के साथ ही स्थापना हुई थी। यह अतिप्राचीन गायरिया बावजी मंदिर वर्षों से प्रखंड वासियों के लिए आस्था और विश्वास का केन्द्र बना हुआ है। इस मंदिर से मेनार, बरोडिया, शोपुरा, गारियो की भागल, नाहरपुरा, झालो की भागल, भीलों की कुड़िया, ढूंढिया, तीतरड़ा (मंगलवाड़), धोलादांता, सारंगपुरा, बंसतपुरा (मावली), खेरोदा, उदयपुर, फतहनगर सहित कई गांवो के श्रद्धालु मंदिर में माथा टेकने पहुँचते है और जो भी श्रद्धालु यहाँ मन्नत मांगता है, उनकी मुराद पूरी होती है। ग्रामीणों के अनुसार इस मंदिर में विराजित गायरिया बावजी जहर सूखने वाले देवता है। जिनकी ख्याति दूर दूर तक है। शारदीय नवरात्रि पर्व को लेकर मंदिर में विभिन्न प्रकार के धार्मिक अनुष्ठान, हवन निष्पादित हो रहे है।
यह अतिप्राचीन होने से मंदिर जीर्ण शीर्ण हो गया था, जिस पर समस्त ग्रामवासियों ने बैठक कर मंदिर का जीर्णोद्धार करवाने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया। ततपश्चात वल्लभनगर विधायक उदयलाल डांगी द्वारा गुरु पुष्प नक्षत्र में 25 जनवरी 2024 को मंदिर निर्माण हेतु शिलान्यास किया गया। ग्रामीणों ने बताया कि भूमि पूजन होने के पश्चात निर्माण के लिए ठेकेदार नारायणदास मनोहरपुरा द्वारा मंदिर निर्माण कार्य शुरू किया। जिसमे पिण्डवाड़ा, सिरोही, भीनमाल, जालौर के मूर्तिकार पूरा मंदिर मार्बल में निर्मित कर रहे है और अभी मंदिर के पिलरो पर नक्काशी का कार्य किया जा रहा है। इस मंदिर की अनुमानित लागत 45 लाख के करीब है, और पूरा मंदिर मार्बल में निर्मित किया जा रहा है। जिसके लिए मार्बल राजसमंद जिले से आ रहा है।
अब तक करीब 28 लाख रुपये का निर्माण कार्य हुआ
ग्रामीणों ने बताया कि इस मंदिर निर्माण के लिए गांव सहित कई अन्य गांवो व विधायक वल्लभनगर से सहयोग राशि प्राप्त हो रही है तथा सभी भामाशाहों के प्रयासों से अब तक करीब 28 लाख रुपये का निर्माण कार्य हो चुका है और अब भव्य मंदिर आकार लेने लगा है। पहले चरण का कार्य लगभग पूरा होने की तैयारी में है।
साल में एक बार मवेशियों की होती है परिक्रमा
ग्रामीणों ने बताया कि इस मंदिर से ग्रामीणों सहित मवेशियों की भी आस्था जुड़ी हुई है। इस मंदिर के ग्रामीण साल में एक बार गांव के पशुओं को परिक्रमा करवाते है जो फूली के तीसरे दिन छोटी राखी पर होता है। लोगो की मान्यता है कि इस मंदिर के पशुओं की परिक्रमा करवाने से पशु साल भर सुख, शांति, सृमद्धि औऱ खुशहाल रहते है, उन्हें कोई रोग नहीं लगता है। साथ ही बावजी का नवण भी छिड़काव करते है।
