अतीत किसी का सुखद नहीं,अतीत को ध्यान रखे तो अंजन चोर भी निरंजन हो जाते है  : आचार्य पुलक सागर 

ऋषभदेव,डीपी न्यूज नेटवर्क ।

  • भगवान के जन्म कल्याण महोत्सव में धनपति कुबेर ने की रत्नों की वर्षा
  • तीर्थंकर बालक का सुमेरु पर्वत पर 1008 कलशो से जन्माभिषेक हुआ

नगर में आचार्य पुलक सागर के सानिध्य में गुरुकूल परिसर में आयोजित 10 दिवसीय ऋषभ कथा एवं महाअर्चना विधान के तीसरे दिन भगवान ऋषभदेव का जन्म कल्याणक महोत्सव मनाया । ।

समाज के महामंत्री प्रदीप गनोडिया ने बताया की कथा के दौरान दिगम्बर जैन समाज द्वारा आचार्य श्री को ऋषभ कथा ग्रंथ को भेट किया गया । इससे पूर्व पुलक मंच के सदस्यों द्वारा माता पद्मावती को वस्त्र अर्पण किए गए एवम प्रसाद वितरित किया गया ।

विधानाचार्य पंडित सुधीर मार्तंड के निर्देशन में चल रहे विधान के तहत भगवान का जन्म कल्याण महोत्सव मनाया गया । जन्म के वक्त धनपति कुबेर द्वारा रत्नों की वर्षा की गई। भगवान के माता पिता के परिवार द्वारा महा प्रसाद के रूप में लड्डू वितरित किए गए। सोधर्म इंद्र तीर्थंकर बालक को सुमेरू पर्वत पर गाजे बाजे के साथ ले गए जहां पर 1008 कलशो से जन्माभिषेक किया गया ।

सांयकाल में आचार्य श्री द्वारा कथा वाचन किया गया । आचार्य श्री ने कहा कि अतीत किसी का ज्यादा सुखद नही हे अतीत को ध्यान में रखे तो अंजन चोर भी निरंजन हो जाते हे भगवान ने कहा जन्म लिया न जाने कितनी योनियों में भटके । यात्रा सिर्फ एक दिन की नही होती जमीन से चांद देखना आसान हे लेकिन चांद तक पहुंचाना बहुत मुस्किल हे।  संत सिंहासन से महान नही बनते महान आदमी जहा बैठ जाए वो जगह ही महान हो जाया करती हे। तत् पश्चात आरती और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुआ जिसमे भगवान के माता पिता को भगवान सोपना ,सोधर्म इंद्र द्वारा आनद नृत्य,पालना एवम बाल क्रीड़ा का आयोजन किया गया ।

बालक तीर्थंकर ऋषभदेव का जन्म हुआ और सौधर्म इंद्र एवम शचि इंद्राणी प्रथम बार तीर्थंकर बालक के दर्शन कर पूरे संसार को जगत पूज्य के दर्शन कराने का सुंदर प्रस्तुति सुंदर लाल लीला देवी ने दी। सौधर्म इंद्र भगवान बालक ऋषभदेव को बग्गी में बैठकर गाजे बाजे के साथ पूरे नगर का भ्रमण कर सुमेरु पर्वत के पांडूक शीला पर ले गए जहां पर जन्मभिषेक किया गया । इस मौके पर भगवान के जन्मोत्सव पर माता पिता लीला देवी रमेश चंद्र कोठारी ने प्रजा जन में मिठाईयां वितरित की ।

इस अवसर पर भारत गौरव आचार्य पुलक सागर जी के आर्शीवाद से नरेन्द्र किकावत के दस उपवास के उपलक्ष् में गुरुकुल जिनालय में चांदी का कलश भेट किया।

0
0

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed

error: Content is protected !!