उदयपुर-सलूंबर जिले में पांच साल में नियुक्त 1800 शिक्षको की जांच,79 के दस्तावेज फर्जी होने की आशंका
उदयपुर,डीपी न्यूज नेटवर्क । उदयपुर-सलूंबर जिले के शिक्षा विभाग में करीब 79 शिक्षक-कर्मचारियों के फर्जी तरीके से नौकरी किए जाने की जानकारी सामने आ रही है। इन शिक्षकों को 15 दिसंबर 2019 से लेकर 15 दिसंबर 2023 तक के पांच साल में नियुक्ति हुई है। उदयपुर व सलूंबर में करीब 1800 शिक्षक-कर्मचारियों के दस्तावेजों की जांच के बाद 79 शिक्षक-कर्मचारी संदिग्ध नजर आ रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या में शिक्षक ही माने गए हैं, जबकि कर्मचारी नाम मात्र के हैं। इनके भर्ती के समय और नियुक्ति के समय के साइन, फोटो में अंतर है। इसके अलावा कुछ के दस्तावेज फर्जी होना सामने आया है। अब निदेशालय और एसओजी इस मामले में जांच कर आगे की कार्रवाई का निर्धारण करेंगे। संभावना जताई जा रही है कि जिन्होंने फर्जी तरीके से नियुक्ति पाई है, उन्हें बर्खास्त किया जाएगा। हालांकि, इन सभी का स्थायीकरण अभी रोक दिया गया है। सरकार नियुक्ति के दो साल तक कर्मचारी-शिक्षक को प्रोबेशन पीरियड पर रखती है। इसके बाद उन्हें स्थायी किया जाता है, लेकिन यह प्रोसेस पिछले चार साल से नहीं हुआ है। ऐसे में लगभग सभी 79 शिक्षक इसके दायरे में आ गए।
शिक्षा निदेशालय को 14-15 जुलाई को एसओजी से इनपुट मिला था कि प्रदेश के स्कूलों में पिछले 5 साल में कई फर्जी शिक्षक भर्ती हुए हैं। इस पर निदेशालय ने प्रदेश के सभी डीईओ को आदेश जारी कर 15 दिसंबर 2019 से लेकर 15 दिसंबर 2023 तक नियुक्ति पाने वाले शिक्षक-कर्मचारियों के दस्तावेजों की जांच के लिए कमेटियां गठित करने को कहा। इसके बाद 16 जुलाई को तत्कालीन डीईओ चंद्रशेखर ने 20 प्रिंसिपलों के नेतृत्व में कमेटियां गठित की और उदयपुर-सलूंबर के करीब 1800 शिक्षक-कर्मचारियों के दस्तावेजों की जांच कराई। रिपोर्ट डीईओ को सौंप दी गई। रिपोर्ट निदेशालय भेजी जा चुकी है।
जांच में सामने आया कि आवेदन में लगाए गए फोटो और बाद में विभागीय प्रक्रिया में सामने आए फोटो में दिख रहे चेहरे में भिन्नता है। ऐसे करीब 8 से 10 केस हैं। यह भी माना गया है कि पासपोर्ट साइज फोटो और वर्तमान फोटो में भिन्नता के कई कारण हो सकते हैं। उस समय चेहरा अलग हो सकता है और 2024 में अलग हो सकता है, लेकिन निदेशालय या एसओजी स्तर पर ही इसकी जांच के बाद मामला क्लियर होगा।
जांच में 12 से 15 शिक्षक-कर्मचारियों के दस्तावेजों में भी गड़बड़ी की बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि इनमें से कुछ की डिग्री बाहरी है। बाहरी डिग्री होने और उसके फर्जी होने की आशंका जताते हुए निदेशालय को रिपोर्ट दी गई है। दरअसल, यह जांच का विषय है कि नियुक्ति के समय बाहरी डिग्री की मान्यता थी भी या नहीं? निदेशालय की ओर से पड़ताल के बाद ही इस संबंध में निर्धारण हो पाएगा।
जिन शिक्षक-कर्मचारियों के दस्तावेज संदिग्ध माने गए, उनके हस्ताक्षरों में अंतर था। कई शिक्षक ऐसे हैं, जिनके भर्ती के समय के हस्ताक्षर अलग हैं, जबकि दस्तावेजों में अलग। विभाग ने दोनों तरह के हस्ताक्षर देखे। इस पर जांच कमेटियों ने माना कि किसी भी अधिकारी-कर्मचारी के हस्ताक्षर अमूमन एक जैसे ही होते हैं। ऐसे करीब 12 शिक्षक-कर्मचारी माने जा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि निदेशालय की ओर से एसओजी को इनपुट भेजा जाएगा। इससे पहले निदेशालय पूरे तथ्यों की जांच करेगा। डीईआे प्रांरभिंक ननिहाल सिंह का कहना है कि रिपोर्ट निदेशालय को भेज दी है। यहां से 79 शिक्षकों की रिपोर्ट भेजी गई है। निदेशालय में हर जिले से रिपोर्ट पहुंचने के बाद सभी को एक साथ मिलाकर जांच की जाएगी। बता दें कि इससे पहले भी जिले में दो शिक्षकों की डिग्रियां फर्जी होने की शिकायत हो चुकी है। विभाग ने इस मामले में जांच भी करवाई, लेकिन इसकी रिपोर्ट को संयुक्त निदेशालय कार्यालय के बाबू दबाकर बैठे हैं। ढाई साल बाद भी न रिपोर्ट सामने आई, न आरोपी शिक्षकों पर कोई कार्रवाई हुई।
source : DB
