पर्युषण पर्व के 7वे दिन उत्तम तप धर्म मनाया : केवल शरीर को तपाना तप नहीं अपितु इच्छा का शमन करना तप है – आचार्य पुलक सागर
डीपी न्यूज नेटवर्क,ऋषभदेव,शुभम जैन । पर्यूषण पर्व के उपलक्ष पर गुरुकुल सभागार चल रहे शिवीर में 7 वे दिन भारत गौरव राष्ट्र संत आचार्य पुलक सागर जी के सानिध्य में उत्तम तप धर्म मनाया गया। स्थानीय श्री दिगम्बर जैन समाज के अध्यक्ष भूपेंद्र कुमार वालावत ने बताया कि गुरुकुल प्रांगण में चल रहे दस दिवसीय पाप नाशनम शिविर में शिविरार्थियों ने श्रद्धा पूर्वक भक्तिमय माहौल में पूजा, अर्चना , महा शांतिधारा एवम परिवार के सुख की कामना की । इस दौरान गुरुदेव ने अपने मंगल प्रवचन में कहा तप एक प्रयोगशाला है जो जीवन को कुंदन बनाता है, आत्मां परमात्मा तपने के बाद ही बनती हे, हमेशा तपस्या आत्मा ही करती है। गुरुदेव ने कहा की प्रेम नही तो श्रद्धा नही,जो लोग कहते हे की तपस्या कठिन होती है ,मुनि बनना, केशलोच करना, पिच्ची धारण करना कठिन है लेकिन जिसे परमात्मा से प्रेम होता है उसके लिए सरल हे । केवल शरीर को तपाना तप नहीं अपितु इच्छा का शमन करना तप है। जिस प्रकार से राग-द्वेष-मोह रूप मैल भिन्न हो जाए तथा शुद्ध ज्ञान-दर्शनमय आत्मा भिन्न हो जाए, वह तप है। कर्मों का संवर तथा निर्जरा करने का प्रधान कारण तप है । तप ही आत्मा को कर्म मल रहित करता है।
