पारसोला में आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी ने 3 दीक्षाएं दी

डीपी न्यूज नेटवर्क,शुभम जैन । पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी ने ब्रह्मचारी प्रदीप जी बने 108 मुनि श्री प्रणित सागर जी , ब्रह्मचारिणी शकुंतला किकावत 105 आर्यिका श्री प्रेक्षा मति , दिलीप जी अलासे क्षुल्लक श्री प्राप्त सागर जी बने। दिगंबर जैन दशा हूमड़ समाज एवं वर्षायोग समिति के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित दीक्षा समारोह श्यामा वाटिका कार्यक्रम सभागार में भगवान और पूर्वाचार्यों का चित्र अनावरण दीप प्रज्वलन दीक्षार्थी परिवार द्वारा किया गया। जयंतीलाल कोठारी अध्यक्ष एवं ऋषभ पचोरी अध्यक्ष चातुर्मास समिति ने बताया कि प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवती आचार्य श्री शांति सागर जी एवम पूर्वाचार्यो को अर्ध्य समर्पित विभिन्न नगरों से पधारी समाज द्वारा किया गया।सौभाग्यशाली परिवार की 5 महिलाओं द्वारा चोक पूरण की क्रिया की गई। दीक्षार्थीयो ने आचार्य श्री ने दीक्षा की याचना की तथा आचार्य श्री एवम समस्त साधुओ दीदी भैया श्रावक श्राविकाओं तथा समाज से क्षमा याचना की।वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी के पंचामृत से चरण प्रक्षालन का सौभाग्य तीनों दीक्षार्थी परिवार को मिला। इस बेला में आचार्य श्री के द्वारा दीक्षार्थी के पंच मुष्ठी केशलोच किये गए तथा दीक्षा संस्कार मस्तक तथा हाथों पर किये गए। इसके बाद आचार्य श्री ने नामकरण किया।7 प्रतिमा घारी 71 वर्षीय ब्रह्मचारी प्रदीप भैया दाहोद का दीक्षा उपरांत नूतन नाम 108 मुनि श्री प्रणित सागर किया गया। सात प्रतिमा धारी 69 वर्षीय शकुंतला देवी का नाम दीक्षा के बाद आर्यिका 105 श्री प्रेक्षा मति किया गया। 68 वर्षीय दिलीप अलासे का नूतन नाम क्षुल्लक श्री प्राप्त सागर जीकिया गया। पुण्यार्जक परिवार द्वारा पिच्छी कमंडल शास्त्र एवम कपड़े भेंट किये गए।कार्यक्रम का सुंदर एवम प्रभावशाली संचालन श्री पंडित कीर्ति पारसोला ने किया। आचार्य श्री, मुनि श्री हितेंद्र सागर जी एवम् अन्य साधुओं ने दीक्षार्थी के केशलोचन किये।परिजनों एवम अन्य भक्त जिन्हें केशलोच झेलने का अवसर मिला। प्रातःकाल दीक्षाथियोने श्री जी के दर्शन कर पंचामृत अभिषेक पूजन किया, इसके पश्चात आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के दर्शन कर उनके चरणों का प्रक्षालन किया तत्पचात शकुंतला देवी और श्री दिलीप जी दोनों के केशलोचन साधुओं ने किये इसके पश्चात दीक्षार्थियों ने हल्दी लगाकर मंगल स्नान किया। आचार्य संघ सानिध्य में तीनों दीक्षार्थियों ने श्री जी का पंचामृत अभिषेक किया।आचार्य वर्धमान सागर जी एवं साधुओं को आहार दिया साधुओं के आहार के बाद सन्मति भवन से आचार्य वर्धमान सागर जी के संघ सानिध्य में तीनों दीक्षार्थियों की शोभा यात्रा हजारों धर्मावलंबियों की उपस्थिति में नगर के प्रमुख मार्गो से होती हुई श्याम वाटिका में पहुंची।

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