रक्षाबंधन : दोपहर 1.32 बजे तक भद्रा, उसके बाद रात 8.32 बजे तक बांध सकेंगे राखी
भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन सोमवार को बुधादित्य सहित 5 शुभ योगों में मनाया जाएगा। सुबह 5:53 से लेकर दोपहर 1:32 बजे तक भद्रा का साया रहेगा। इसके बाद 2:07 से लेकर रात 8:32 बजे भाई की कलाई पर राखी बांधने का शुभ मुहूर्त रहेगा।
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि इस बार रक्षाबंधन पर सर्वार्थ सिद्धि, शोभन, रवि, सौभाग्य और बुधादित्य योग बने हैं। श्रावण के पांचवें और अंतिम सोमवार का संयोग भी है, जो 90 साल बाद बना है। श्रवण नक्षत्र का भी अद्भुत संयोग बन रहा है। पूर्णिमा तिथि तड़के 3:04 शुरू हो जाएगी, जो इसी रात 11:55 बजे समाप्त होगी। सुबह भद्रा काल के कारण रक्षाबंधन का समय 1:32 के बाद रहेगा। भद्रा काल के कारण रक्षाबंधन का समय 1.32 के बाद रहेगा। दोपहर में 2:15 से 4:57 तक वृश्चिक लग्न रहेगा। लाभ अमृत का चौघड़िया अपराह्न 3:51 से शाम 7:03 बजे तक रहेगा। ये रक्षा सूत्र बंधन के लिए श्रेष्ठ मुहूर्त रहेंगे। बता दें कि धार्मिक ग्रंथों के अनुसार रक्षाबंधन भद्रा काल में मनाने की मनाही है। पौराणिक कथा है कि रावण को उसकी बहन शूर्पणखा ने भद्रा काल में राखी बांधी थी। उसी साल प्रभु राम के हाथों रावण का वध हुआ था।
नवग्रह लाते हैं खुशहाली, पूजा की थाली में हर सामग्री ग्रहों की प्रतिनिधि
रक्षा सूत्र बांधने से पहले बहनें थाली सजाती हैं। इसी से भाई की आरती की जाती है। इस थाली में बहनें नव ग्रह से उसके भाई को अन्न-धन के साथ दीर्घायु और शुभ फल देने प्रार्थना करती हैं। सामग्री में कुमकुम, अक्षत, पुष्प, मिठाई, श्रीफल, रक्षासूत्र, दीपक, जल कलश, उपहार आदि को शामिल किया जाता है। कुमकुम सूर्य के, अक्षत चंद्र और शुक्र, रक्षासूत्र मंगल, जल कलश बुध, पुष्प राहु, मिठाई बृहस्पति, दीपक शनि और केतु के प्रतिनिधि के रूप में थाली में रहते हैं। बुध ग्रह परिवार में बहन का भी प्रतिनिधित्व करता है।
सबसे पहले देवताओं को बांधें राखी : रक्षाबंधन पर पहली राखी देवताओं को बांधनी चाहिए। ईश्वर हर संकट से रक्षा करते हैं। ठाकुरजी को रक्षा सूत्र पुरुष और महिला दोनों बांध सकते हैं। कई परिवारों में श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डूगोपाल को राखी बांधने की भी परंपरा है। माना जाता है कि जिन बहनों के भाई नहीं होते, वे भी देवों को भाई मानकर राखी बांध सकती हैं। अंचल में भगवान गणेश, हनुमान जी, महादेव, श्रीकृष्ण, गुरु, पेड़-पौधों के अलावा वाहन, औजार-उपकरणों पर भी रक्षासूत्र बांधने की परंपरा रही है।
