उदयपुर में स्कूली छात्र पर चाकूबाजी मामला : छात्र कोमा में , डायलसिस जरूरी लेकिन बीपी लेवल कम, बिपी लेवल बढ़ाने बढ़ाई दवाई की डोज,वेंटीलेटर सपोर्ट पर 58 घण्टे से धड़क रहा दिल

उदयपुर शहर के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय भटि्टयानी चौहट्टा में चाकूबाजी में घायल छात्र वेंटिलेटर पर है। वह एमबी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती है। मेडिकल बोर्ड के डॉक्टरों ने बताया कि वेंटिलेटर सपोर्ट से छात्र का दिल 58 घंटे से धड़क रहा है। ब्लड में ऑक्सीजन लेवल भी सामान्य है। बीपी का अधिकतम स्तर 80 और न्यूनतम 45 (80/45) चल रहा है। यह सामान्य स्तर 120/80 से कम है। ऐसे में जरूरत के बावजूद डायलिसिस नहीं किया जा सकता है। क्योंकि इसके लिए बीपी का अधिकतम स्तर 100-100 व न्यूनतम 60-65 होना चाहिए। बीपी बढ़ाने के लिए दवा की डोज बढ़ा दिया है।

एमबी अधीक्षक डॉ. आरएल सुमन का कहना है कि अत्यधिक रक्तस्राव के कारण ब्रेन, किडनी, लंग्स जैसे अंगों में रक्त संचार कम हो गया है। जिससे छात्र कोमा में चला गया। किडनी को सक्रिय करने के लिए डायलिसिस की जरूरत है। किडनी के सक्रिय होते ही शरीर के अंदर तरल पदार्थों का सभी अंगों में संतुलित संचरण शुरू हो जाएगा, जो उसे कोमा की स्थिति से बाहर निकाल सकता है। बता दें, छात्र को गत 16 अगस्त को सुबह 11 बजे आईसीयू में भर्ती कराया गया था। इसके बाद उसका चाकू से कटी जांघ की बड़ी धमनी का ऑपरेशन किया जा चुका है। अब तक उसे 15 यूनिट ब्लड चढ़ाया जा चुका है।

जयपुर की टीम लौटी, अब कोटा से नेफ्रोलॉजिस्ट को बुलाया गया

छात्र के उपचार व मॉनिटरिंग करने वाले दल में आरएनटी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल व गैस्ट्रोइंट्रोलॉजिस्ट डॉ. विपिन माथुर, एमबी के अधीक्षक डॉ. आरएल सुमन, कार्डियक थोरेसिक सर्जन डॉ. विनय नथानी, एनेस्थेटिस्ट डॉ. विक्रम वेदी, मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. हेमंत माहुर, न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. तरुण रलोत, कोटा के नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. विकास शामिल हैं। एसएमएस जयपुर से आए तीन विशेषज्ञ चिकित्सकों का दल रविवार को इलाज कर लौट गया है।

कलेक्टर का कहना है कि जरूरत पड़ी तो जयपुर के विशेषज्ञों के दल को दो घंटे में कभी-भी बुला सकते हैं। छात्र को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के लिए कोटा से नेफ्रोलॉजिस्ट के आने के बाद अब आरएनटी के विशेषज्ञ चिकित्सकों का मेडिकल बोर्ड पूरा हो चुका है। क्योंकि डॉ. मुकेश बड़जात्या के सेवानिवृत्त होने के बाद से आरएनटी में नेफ्रोलॉजिस्ट का पद खाली है।

मुखर्जी चौक में उग्र हुए युवा, पुलिस ने टकराव को टाला

घायल छात्र के निधन की अफवाह से रविवार को दो बार माहौल गरमा गया। घायल की मां व समाजजन सुबह 10 बजे मुखर्जी चौक में धरने पर बैठ गए। गुस्साए लोगों ने कुछ सब्जी विक्रेताओं के सामान भी बिखेर दिए। इस पर दूसरे समुदाय के लोग भी जुट गए। इनके आमने-सामने होने की सूचना मिलते ही पुलिस के आला अधिकारी पहुंच गए। मां ने कहा कि शनिवार रात 12 बजे बेटे से मिलने के लिए पति अस्पताल गए, नर्स ने नहीं मिलने दिया। उन्हें भी काफी मिन्नतों पर अंदर जाने दिया। बच्चे का शरीर फूल गया था। फिर उन्हें बाहर कर दिया गया। तब से दो पुलिसकर्मी उनके साथ लगे रहे और हर बात उनके अफसरों तक पहुंचाते रहे। मां के मुताबिक डॉक्टर ने उन्हें दो दिन त्योहार मनाने के बाद बच्चे को ले जाने की बात भी कही। इस पर एसपी योगेश गोयल ने कहा कि जिसने अस्पताल में परिजनों को बच्चे से मिलने से इनकार किया, वह नामजद नहीं है। परिजन कभी भी बच्चे से मिल और डॉक्टर से स्थिति जान सकते हैं। यह सुनने के बाद मामला ठंडा पड़ा।

अस्पताल में हंगामा, वार्ड में जाने की जिद पर अड़ीं महिलाएं

करीब 11 बजे इमरजेंसी के बाहर भीड़ जुटी। ये लोग बच्चे से मिलने की मांग करने लगे। घायल छात्र की मां के साथ पहुंची महिलाओं ने घुसने की कोशिश की। रोकने पर नारेबाजी की। पुलिस ने हल्का बल प्रयोग किया तो लोग उलझ गए। कुछ पुलिसकर्मियों ने हाथापाई भी की। मामला शांत होने के बाद भी लोग जमे रहे। इन्हें हाथीपोल थानाधिकारी आदर्श कुमार और जाब्ते ने हटाया। अभद्र भाषा के प्रयोग पर लोगों ने पुलिस को घेर लिया। एएसपी उमेश ओझा, मंजीत सिंह, डीएसपी छगन पुरोहित, नेत्रपाल सिंह आदि ने शांति की अपील की। फिर कलेक्टर अरविंद पोसवाल और एसपी योगेश गोयल ने कहा कि सभी लोग खड़े रह सकते हैं, व्यवस्था नहीं बिगड़ने देंगे। इंटरनेट बहाली के सवाल पर कलेक्टर ने कहा कि हालात सामान्य होने पर ही निर्णय लेंगे। एसपी ने दोहराया कि बच्चे को लेकर आशंका हो तो पुलिस-प्रशासन और हॉस्पिटल में से संपर्क कर सकते हैं। अफवाहों पर ध्यान नहीं दें। हॉस्पिटल प्रशासन से लगातार अपडेट कर रहा है।

 

SOURCE : DB 

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