भाजपा विधायक अमृतलाल मीणा का स्कूल से लेकर राजनीतिक सफ़र : राजघराने में गाय भेंसो का संभाला,अजमेर में नौकरी की ; ससुराल वालों को कांग्रेस से भाजपा में ले,पत्नी के कारण जेल गए

सलूंबर विधानसभा से लगातार तीन बार के भाजपा विधायक अमृतलाल मीणा (65) का बुधवार देर रात उदयपुर में हार्ट अटैक से निधन हो गया। अमृतलाल को तबीयत बिगड़ने पर रात करीब 1:15 बजे एमबी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। रात 2 बजे डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। गुरुवार शाम करीब 5 बजे सलूंबर में उनके पैतृक गांव लालपुरिया में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। पुलिस के जवानों ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया।

इससे पहले मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने लालपुरिया स्थित अमृतलाल मीणा के घर पहुंचकर उन्हें अंतिम विदाई। पीएम से लेकर सीएम तक ने संवेदना व्यक्त कर अपूर्णीय क्षति बताई

मीणा का राजनीतिक का सफर 

अमृतलाल मीणा का राजनीति में आने और इससे पहले का सफर काफी रोचक रहा। वे सलूंबर विधानसभा से लगातार 3 बार विधायक बने ।

मीणा ने राजनीति में आने से पहले अजमेर की हिंदुस्तान मशीन टूल्स में नौकरी की। पांच साल पहले एक इंटरव्यू में मीणा ने अपने संघर्ष के दिनों का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि मैं उदयपुर के पूर्व राजपरिवार के यहां गाय-भैंस और कुत्तों को नहलाने का काम भी कर चुका हूं।

स्कूली शिक्षा से पोस्ट ग्रेजुएशन का सफर 

15 सितंबर 1959 को सलूंबर के लालपुरिया में जन्मे अमृतलाल मीणा के पिता गोमाराम मीणा आर्मी में नायक थे। साल 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध में वे घायल हो गए थे। इसके बाद वे घर आ गए। पिता के निधन के बाद उनकी माता जीवली बाई ने तीन बेटे और तीन बेटियों को संभाला।

अमृतलाल ने बताया था – जब वे छोटे थे तो घर से गाय, भैंस, बकरियां लेकर जंगल में चले जाते थे। एक बार वे बकरियों को जंगल में चराने जा रहे थे तो बोरी पालवा स्कूल दिखा। वे बकरियों को लेकर जंगल में तो चले गए, लेकिन स्कूल का ख्याल आने पर बकरियों को जंगल में ही छोड़कर स्कूल चले गए। इसके बाद उन्होंने बकरियां चराना छोड़कर स्कूल जाना शुरू कर दिया। छठी क्लास में उन्होंने सेमारी के स्कूल में एडमिशन लिया और वहीं के हॉस्टल में रहने लगे।

मीणा ने बताया था की जब वे 11वीं क्लास में आए, तब आसपास बहुत कम ही हायर सेकेंडरी स्कूल थे। उन्होंने ऋषभदेव उच्च माध्यमिक विद्यालय में दाखिला लिया। स्कूली शिक्षा के बाद उन्होंने महर्षि दयानंद सरस्वती यूनिवर्सिटी, अजमेर से 1992 में समाजशास्त्र और 2000 में राजनीति शास्त्र में एमए की।

पुर्व राजपरिवार के पैलेस में गाय-भैंसों को संभाला’

अमृतलाल ने बताया था कि अजमेर जाने से पहले वे उदयपुर आ गए थे। परिवार की आर्थिक स्थिति सही नहीं थी। ऐसे में उन्होंने उदयपुर पैलेस में पूर्व राजपरिवार के यहां नौकरी की।

पैलेस में वे गाय-भैंसों को संभालते थे और उन्हें नहलाते थे। दोपहर बाद पैलेस में दूध देने जाते थे। इस बीच शाम को जब समय मिलता तो पैलेस के कुत्तों को पिछोला झील में ले जाकर नहलाते थे।

यहां से जब अजमेर जाना हुआ तो वहां हिंदुस्तान मशीन टूल्स में डिप्लोमा कोर्स किया। साल 1978 में वहीं पर उनकी नौकरी लग गई। इस नौकरी से उनके परिवार को काफी आर्थिक मजबूती मिली।

20 साल राजनीति में सक्रिय रहे

सलंबूर जिले के लालपुरिया गांव में साल 1959 में जन्मे अमृतलाल मीणा करीब 20 साल राजनीति में सक्रिय रहे। अमृतलाल ने साल 2004 में पंचायत समिति सराड़ा के सदस्य के तौर पर राजनीति की शुरुआत की थी। उसके बाद साल 2007-10 तक जिला परिषद उदयपुर के सदस्य और 2010 में पंचायत समिति सराड़ा में प्रतिपक्ष नेता बने।

वे पहली बार साल 2013 में विधायक चुने गए। उन्होंने कांग्रेस की बसंती देवी मीणा को हराया था। उसके बाद 2018 और 2023 में कांग्रेस दिग्गज नेता रघुवीर सिंह मीणा को हराकर विधानसभा पहुंचे। अमृतलाल राजस्थान विधानसभा में प्राक्कलन समिति, प्रश्न एवं संदर्भ समिति, विशेषाधिकार समिति और अनुसूचित जनजाति कल्याण समिति के सदस्य रहे।

कांग्रेस का गढ़ था सराड़ा, ससुराल वाले भी कांग्रेसी थे

अमृतलाल मीणा जब राजनीति में आए थे, तब सराड़ा विधानसभा क्षेत्र कांग्रेस का गढ़ था। उनका ससुराल सरसिया गांव में है। ससुराल वाले भी कांग्रेस से जुड़े थे, लेकिन अमृतलाल ने उनको समझाया और उन्हें भाजपा से जोड़ा था।

अमृतलाल की पत्नी शांता देवी ने साल 2000 में पहली बार सेमारी से सरपंच का चुनाव लड़ा था। वे करीब 2700 वोट से जीती थीं। तब यह सीट एसटी महिला के लिए आरक्षित थी।

अंतिम दर्शन के उमड़ा जनसैलाब

पत्नी के कारण जाना पड़ा था जेल

साल 2021 में अमृतलाल मीणा को 10 दिन से ज्यादा समय जेल में रहना पड़ा था। दरअसल, 2015 में अमृतलाल की पत्नी शांता देवी सेमारी से सरपंच का चुनाव जीती थीं। शांता देवी की प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार सुगना देवी ने उनके खिलाफ फर्जी मार्कशीट को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी।

सीबी-सीआईडी की जांच में मार्कशीट फर्जी पाई गई। अमृतलाल ने बतौर अभिभावक पत्नी की पांचवीं की मार्कशीट पर साइन किए थे। इसलिए उन्हें आरोपी बनाया गया था। सुगना देवी की शिकायत के बाद मामला स्थानीय कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने विधायक अमृतलाल को मामले में 3 सप्ताह में स्थानीय कोर्ट में सरेंडर करने के आदेश दिए। न्यायालय ने अमृतलाल की जमानत याचिका खारिज करते हुए उन्हें जेल भेज दिया था।

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