रोत आदिवासियों को एकजुट कर रहे, मालवीया की नजर जनरल ओबीसी वोटों पर भी , डामोर कांग्रेस के बिखरे वोटो को जुटाने पर लगे
बांसवाड़ा माही बांध में लहरों के लिए अभी बारिश का इंतजार करना होगा लेकिन यहां की राजनीति में आई लहरों से वागड़ की राजनीति नई करवट ले रही है। प्रदेश की सबसे हॉट सीट बांसवाड़ा में इस बार कांग्रेस अपने ही गढ़ में डिस्टर्ब है। पुराना कोर वोट बैंक, 8 में से 5 विधानसभा सीटें कांग्रेस के पास होने के बावजूद इस बार प्रदेश से लेकर स्थानीय नेताओं की कमजोर रणनीति के कारण कांग्रेस 72 साल के सबसे मुश्किल दौर में है। पहला ऐसा मौका है जब कांग्रेस का प्रत्याशी पार्टी के सिंबल पर चुनाव लड़ रहा है लेकिन भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) से गठबंधन के कारण कांग्रेस अपनी ही पार्टी के प्रत्याशी अरविंद डामोर के खिलाफ प्रचार कर रही है।
दूसरी ओर, बीएपी अपने रास्ते पर है। उसे शुरू से पता था कि कांग्रेस के साथ पटरी बैठने में बहुत डिस्टरबेंस होगा। अब कांग्रेस गठबंधन में है लेकिन उसका प्रत्याशी चुनावी मैदान में होने के कारण अब फायदे-नुकसान का गणित लगाना मुश्किल है। इसलिए बीएपी अपने रास्ते पर अपने ही कोर वोट को गांव-गांव जाकर मजबूत करने में लगी है। पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ रही बीएपी खुद को साबित करना चाहती है और उसके पास यह सबसे अच्छा मौका है जिसे वह अच्छे से भुना भी रही है।
अब बात भाजपा की। भाजपा यही चाहती थी कि किसी तरह कांग्रेस और बीएपी का गठबंधन नहीं हो क्योंकि गठबंधन से उसके लिए मुश्किलें बढ़ जाएगी। गठबंधन हुआ भी लेकिन कांग्रेस प्रत्याशी मैदान में होने से भाजपा को कुछ राहत मिली। कांग्रेस से भाजपा में आए महेंद्रजीत सिंह मालवीया से भाजपा के कुछ पुराने नेता अंदरुनी तौर पर नाराज बताए जाते हैं लेकिन मालवीया एक-एक करके सभी को मना रहे हैं। इसलिए भाजपा, कांग्रेस और बीएपी में त्रिकोणीय मुकाबला हो गया है। यहां रेल, पलायन और आरक्षण ही बड़े मुद्दे हैं। राजकुमार अरविंद 2200607 मतदान हुआ 1089548 4. बीएपी जीती तो पहले ही चुनाव में अपना सांसद बना लेगी। 7 माह पहले पार्टी बनी। 3. मालवीया जीते तो पहले नेता होंगे जो भाजपा- कांग्रेस दोनों से सांसद होंगे। 2. कांग्रेस जीती तो अरविंद पहले नेता होंगे जो पहले ही चुनाव बिना पार्टी के सहयोग के सांसद बनेंगे। कांग्रेस को लोकसभा चुनाव में 40 से लेकर 68 फीसदी और चार महीने पहले हुए विधानसभा चुनाव में सबसे ज्यादा 33.50 फीसदी वोट मिले हैं। जबकि भाजपा को लोकसभा चुनाव में अधिकतम 50 फीसदी और चार महीने पहले हुए विधानसभा चुनाव में 29.93 फीसदी वोट मिले हैं।
कांग्रेस के परंपरागत वोट कांग्रेस प्रत्याशी को मिलते हैं तो उनकी स्थिति मजबूत होगी लेकिन कांग्रेस में दो खेमे होने से वोट बंटेंगे। कांग्रेस के वोट गठबंधन के कारण बीएपी की तरफ डायवर्ट होने पर बीएपी को फायदा होगा लेकिन कांग्रेस के वोटों में ज्यादा बिखराव हुआ और तीन ग्रुप में बंटे तो भाजपा की तरफ भी जाएंगे। इसकी संभावनाएं भी है क्योंकि मालवीय खुद पुराने कांग्रेसी लीडर हैं।
वे कांग्रेस के वोट भी अपनी तरफ खींचने में लगे हुए हैं। 1111037 1975368 कुल मतदाता {जीत का अंतर: 305718 1. भाजपा की जीत पर पहली हेट्रिक। दो बार से चुनाव जीत रही। 1440109 कुल वोट पड़े महेंद्रजीत लोकसभा में मतदाता पार्टी वोट प्रतिशत कांग्रेस 5,97,056 33.50 % बीएपी 4,81,591 27.66% भाजपा 5,30,123 29.93% पार्टी वोट प्रतिशत भाजपा 7,12,334 49.52% कांग्रेस 4,06616 28.27% बीटीपी 2,51,558 17.49%
