उदयपुर में मेडिकल लाइसेंस पर सख्ती , 2 माह में 200 आवेदन आए 90 को नही दी एनडीपीएस दवा बेचने की अनुमति

दर्द निवारक, खांसी की रोकथाम और नींद जैसी बीमारियों को लेकर बाजार में उपलब्ध एनडीपीएस (मादक) श्रेणी वाली दवाइयों के दुरुपयोग के बढ़ते मामलों के बीच औषधि नियंत्रण विभाग ने मेडिकल लाइसेंस पर सख्ती शुरू कर दी है। दर्द निवारक ट्रामाडोल टेबलेट-इंजेक्शन, खांसी में उपयोगी कोडीन युक्त सीरप, नींद में उपयोगी क्लोनाजेपाम टेबलेट, अल्प्राजोलाम के लाइसेंसों के लिए विभाग ने नए नियम बना दिए हैं। बीते 7 माह में विभाग को लाइसेंस के 200 आवेदन मिले। इनमें महज 110 मेडिकलों को ही एनडीपीएस श्रेणी वाली बदवाएं बेचने की अनुमति दी गई। यही नहीं बीते महीनों में विभाग ने अनियमित बिक्री के मामले में करीब 15 लाइसेंस स्थायी तौर पर निरस्त कर दिए हैं। बता दें कि भास्कर ने एनडीपीएस श्रेणी की दवाइयां की अवैध बिक्री को लेकर 9 अप्रैल को समाचार प्रकाशित कर खामियां उजागर की थी। इस मामले में विभाग ने तत्परता दिखाते हुए एक ही दिन में उदयपुर व राजसमंद के 20 मेडिकल स्टोरों के लाइसेंस निरस्त कर दिए थे। इनमें भी तीन लाइसेंस स्थायी तौर पर निरस्त किए गए थे।

विभाग की चेतावनी…लापरवाही करने वालों पर होगी कार्रवाई 

सहायक औषधि नियंत्रक एवं औषधि अनुज्ञापन की ओर से 9 अप्रैल को ही अधीनस्थ औषधि नियंत्रक अधिकारियों (निरीक्षक) को जांच के दौरान विभागीय गाइड लाइन की अनदेखी करने का नोटिस थमाया था। अल्टीमेटम देते हुए कुछ मामलों की जांच को फिर से करने की नसीहत दी गई। लापरवाही पर कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी। सहायक औषधि नियंत्रक ललित अजारिया का कहना है गाइड लाइन के हिसाब से ऐसे होलसेल मेडिकलों की जांच की जानी चाहिए, जहां पर एनडीपीएस दवाइयों की उपलब्धता अधिक हो। इसके बाद ये देखना चाहिए कि कौन से रिटेल मेडिकल पर होलसेल से दवाइयां ज्यादा जा रही हैं।

औषधि नियंत्रक खुद की मर्जी से नहीं कर सकते मेडिकल स्टोरों की जांच

औषधि नियंत्रक अधिकारी को हर माह 20 मेडिकल स्टोरों की जांच करने का नियम है। अधिकारी खुद की मर्जी से निरीक्षण नहीं कर सकता है। मुख्यालय से हर सप्ताह 5 मेडिकल स्टोर के निरीक्षण के लिए नाम भेजे जाते हैं। ये नाम सिस्टम से खुद-ब-खुद जनरेट होते हैं। लेकिन, आशंका और शिकायतों वाले मामले में अधिकारी उनके उच्च अधिकारी के माध्यम से आयुक्त को चिट्‌ठी लिखते हैं। इसके बाद विवादित मेडिकल स्टोर की जांच करते हैं। जांच के दौरान सभी तय मानकों को परखा जाता है।

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