सोमवती अमावस्या पर रेवती नक्षत्र, एन्द्र योग में मेनार में ठाकुरजी को धराया 56 भोग, ठाकुरजी का किया आकर्षक श्रृंगार, गुलाल, फूल से भक्तो ने ठाकुरजी के संघ खेला फागोत्सव, उड़ी अबीर गुलाल

ठाकुरजी कुण तो सजाया, थाने सोवणा, सोवणा, मोती चमके चमके, पचरंगी या पाग, श्याम थे आछ्या बिराज्या, मेनार मायने…….भजनो पर श्रद्धालु खूब झूमे 

बांसडा,कन्हैयालाल मेनारिया ।  चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की पूजा के लिए खास मानी जाने वाली सोमवती अमावस्या तिथि पर सोमवार को रेवती नक्षत्र, एन्द्र योग में मेनार प्राचीन मंदिर में विराजित श्री चारभुजानाथजी को विभिन्न छप्पन प्रकार के व्यजनों से 56 भोग धराया गया। इस दौरान ठाकुरजी को 11 तोले का स्वर्ण मुकुट धारण करवाया गया एवं अनेक रंगों से एवं मोगरा, कश्मीरी गुलाब, देशी गुलाब फूलों से खाटूश्यामजी की तर्ज़ पर आकर्षक श्रृंगार किया गया। वही पुजारी जगदीश वैष्णव द्वारा स्वर्ण आभूषणों से सुशोभित ठाकुर जी को पिछवई, विशेष पोशाक मंडफिया से एवं सांवलियाजी से गुल दाउदी, गुलाब फूल ठाकुरजी को धराये। श्रद्धालुओं ने श्री ठाकुर जी की अनुपम छवि के दर्शन किए। 56 भोग का लाभ विजयलाल पुत्र भज्जा एकलिंगदासोत एवं परिवार द्वारा लिया गया और वर्ष 2025 में भी होली के बाद आने वाली पहली अमावस्या पर विजयलाल एकलिंगदासोत की तरफ से ही ठाकुरजी को छप्पन भोग धराने की घोषणा की गई।

सोमवार सुबह भगवान ठाकुरजी की प्रतिमा को विशेष श्रृंगार धराया गया तथा ठाकुरजी को पंचामृत स्नान कराया गया। वही छप्पन भोग मनोरथ महोत्सव के दौरान दिन भर श्रद्धालुओं का मंदिर में तांता लगा रहा तथा ग्रामीणों द्वारा पूरे मंदिर को फूलों एवं दुधिया रोशनियों से सजाया गया। शाम 5 बजे ठाकुरजी को सूप, चटनी, सिखरन, शरबत, बालका, इक्षु, बटक, मठरी, फेनी, पूडी, खजला, घेवर, मालपुआ, चोला, जलेबी, मेसू, रसगुल्ला, पगी हुई, महारायता, परिखा, सौंफ युक्त बिलसारू, लड्डू, साग, अधौना अचार, मोठ, खीर, दही सहित 56 तरह के व्यजनों से छप्पन भोग धराया गया। ठाकुरजी को छप्पन भोग धराने पर महाआरती हुई, तत्पश्चात छप्पन भोग के श्रद्धालुओं ने दर्शन किये। मंदिर परिसर में गुलाल, फूल से ठाकुरजी संग भक्तगणों ने फाग खेला गया, इस दौरान श्रद्धालु खूब झूमे और महिलाओं ने नृत्य किया।

छप्पन भोग से पूर्व हुआ भजन कीर्तन

सोमवार को छप्पन भोग से पूर्व श्रद्धालुओं ने मंदिर प्रांगण में भजन कीर्तन किये। जिसमें ठाकुरजी कुण तो सजाया, थाने सोवणा, सोवणा, मोती चमके चमके, पचरंगी या पाग, श्याम थे आछ्या बिराज्या, मेनार मायने, झुलनी पे सेठ सांवरो झुलवा ने जावे सा, मीठे रस से भरीयो री, राधा रानी लागे, महारानी लागे, मने कारो कारो, जमुना जी रो पानी लागे सहित भजनों पर श्रद्धालु खूब थिरके, महिलाओं भी खूब थिरकी। महाआरती उपरांत भक्तों ने भोग के दर्शन किये। इस दौरान मेनार सहित आसपास गाँवो से बड़ी संख्या में ग्रामीण महिला पुरुष मौजूद रहे। वही आरती के बाद प्रसाद श्रद्धालुओं में वितरण किया गया।

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