बांसवाड़ा : विस चुनाव से पहले नियमों के खिलाफ खोले 51 मां बाड़ी केंद्र, अपनों को लगाने के लिए पूर्व मंत्री ने ही दी डिजायर
विधानसभा चुनावसे ठीक पहले जिले में बिना नियम कायदों के स्कूल के नजदीक ही मां बाड़ी केंद्र खोल दिए गए। अक्टूबर-2023 में विधानसभा चुनाव के लिए आचार संहिता लगी, लेकिन सिंतबर तक भी मां-बाड़ी केंद्र खोलने का दौर चला। हालात यह रहे कि जुलाई, अगस्त और सितंबर में ही 51 मां बाड़ी केंद्र केवल बांसवाड़ा विधानसभा क्षेत्र में ही खोल दिए गए।
राज्य सरकार के बदलते ही इसकी जांच टीएडी मंत्री बाबूलाल खराड़ी ने करवाई, जिसमें इसकी पुष्टि हुई है। अब सभी केंद्रों को बंद किया जाएगा। विभाग ने इसे बंद करने का प्रस्ताव भी भेज दिया है। नियमों के मुताबिक मां बाड़ी केंद्र स्कूल के करीब 1.5 किमी दूरी होना चाहिए, जबकि विभाग ने केवल 500 मीटर पर ही खोल दी।
इसके अलावा मां बाड़ी केंद्र में कम से कम 30 बच्चे होने चाहिए, जबकि इन मां बाड़ी केंद्र में बच्चों की संख्या भी केवल 9 से 12 तक ही मिली। यही नहीं, एक ही वार्ड में दो-दो मां बाड़ी खोल दी गई। विभागीय जांच में सामने आए नियम विरूद्ध खुले केंद्र।
नए मां-बाड़ी केंद्र खोलने के लिए प्रस्ताव ग्राम पंचायत की ओर से लिए जाते हैं, जिसमें प्राथमिक स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र से दूरी करीब 1.5 किमी होनी चाहिए। मां-बाड़ी केंद्र खोलने का उद्देश्य है कि बिखरी हुई बस्ती होती है, जहां एसटी के आसानी से पढ़ने जा सके।
हर केंद्र पर कम से कम 30 बच्चे होने चाहिए। केंद्र पर एक शिक्षक और दो खाना बनाने वाले होते हैं। छोटे बच्चों को केंद्र पर खाने की भी व्यवस्था रहती है। शिक्षक के चयन के लिए भी समिति होती है, जिसमें स्वच्छ परियोजना, टीएडी विभाग और शिक्षा विभाग के सदस्य समिति में शामिल रहते हैं, जिसके द्वारा उस इलाके में सबसे ज्यादा पढ़ा लिखे होने वाले को ही इसमें नियुक्ति की प्राथमिकता मिलती है। इसके अलावा मां बाड़ी केंद्र के लिए प्रचार-प्रसार भी करना होता है।
केस 1: पंचायत समिति बांसवाड़ा के गांव जांबुडोर के छापरापाड़ा वार्ड-6 में मां बाड़ी केंद्र खोला, जिसमें केंद्र पर स्टाफ ने बच्चों की संख्या 30 बताई। जब जांच की गई तो पता चला कि केंद्र पर केवल 14 बच्चे ही हैं। इसके अलावा सरकारी स्कूल भी केवल 500 मीटर की दूरी पर है, फिर भी केंद्र खोल दिया।
केस 2: पंचायत समिति बांसवाड़ा के गांव लालाआडा में नवीन मां बाड़ी केंद्र खोला गया, जिसमें स्टाफ ने 29 बच्चे होना बताया। लेकिन विभाग की टीम की जांच में सामने आया कि केंद्र पर केवल 11 बच्चे ही हैं। सरकारी स्कूल से भी करीब 1 किमी हैं। खास बात यह है कि चुनाव के एक दो महीने पहले ही 75 से ज्यादा मां बाड़ी खोली गई। इन केंद्रों में लगाने वाले स्टाफ के लिए भी तत्कालीन टीएडी मंत्री अर्जुनसिंह बामनिया ने सिफारिश की थी। अपनी डिजायर पर केंद्र खोलने और किनको इसमें लगाना है यह भी लिखा।
वर्तमान टीएडी मंत्री खराड़ी जब इसकी जांच करा रहे थे तो पूरे जिले में केवल बांसवाड़ा विधानसभा क्षेत्र में ही गड़बड़ी सामने आई। अब पुराने केंद्र बंद कर जरूरत होगी, वहां नए केंद्र खोले जाएंगे। केस 3 : पंचायत समिति बांसवाड़ा के गांव कडेलिया के डूंगरीपाड़ा सामाघाटा वार्ड-8 में मां बाड़ी केंद्र खोला, जिसमें बच्चों की संख्या स्टाफ ने 26 बताई, जबकि जांच में वहां केवल 9 बच्चे ही मिले। खास बात यह है कि इन मां बाड़ी केंद्रों पर जहां 9 से 20 बच्चे ही जांच टीम को मिले हैं, जबकि स्टाफ ने 30 बच्चे बताए।
बच्चे तो कम ही थे, साथ ही इन मां बाड़ी केंद्रों पर बच्चों को मिलने वाली सामग्री भी पूरी उठाई जा रही थी। जबकि इन केंद्रों में इस बात का खुलासा हुआ कि केंद्र पर बच्चे पूरे नहीं हैं। ऐसे में टीएडी विभाग के राजस्व को ही नुकसान पहुंचाया गया।
हर महीने केंद्र के 30 बच्चों के हिसाब से आटा, चावल, पोहा, दालें, तेल, मिर्ची पाउडर, धनिया पाउडर, हल्दी, जीरा, नमक, साबुन, टूथपेस्ट, टूथ ब्रश, हेयर अॉयल, बिस्किट समेत 20 से ज्यादा सामग्री मिलती है।
^हमारे पास केंद्रों को बंद करने के लिए प्रस्ताव आए हैं। अभी इसी काम में लगे हैं। ये प्रस्ताव निदेशक को भिजवाए जा रहे हैं। उसके बाद अब आगे की कार्रवाई की जाएगी। – अरुण जोशी, प्रबंधक, स्वच्छ परियोजना (अतिरिक्त चार्ज)
