पोल खुलने के डर से बेकसूर को पीटा,महिला से कहा – मुंह उठाकर एसपी-आईजी के पास खड़ी हो जाती हो, सीआई निलंबित
कंधे पर तीन स्टार लगाकर खुद को अकड़ कर मैं यहां का थानेदार बताकर एसपी से लेकर आईजी तक के आदेशों को न मानने वाले महिला थानाधिकारी रामरूप मीणा को आईजी एस परिमला ने निलंबित कर दिया है। उन पर कई गंभीर आरोप लगे हैं, इसके अलावा आईजी के आदेशों की अवहेलना भी की है। दरअसल महिला थाने में एक महिला ने अपने पति के खिलाफ प्रताड़ना का मामला दर्ज कराया था। उस प्रकरण में एसएचओ ने समय से कोर्ट में चालान पेश नहीं किया। इस मामले की शिकायत पीड़ित महिला ने आईजी एस परिमला से कर परिवाद दिया था।
इसके बाद आईजी ने चालान पेश करने के निर्देश दिए तो भी थानाधिकारी व अनुसंधान अधिकारी ने चालान पेश नहीं किया। इसके बाद पीड़िता को प्रकरण की प्रगति की गलत सूचना भी दी और थाने के बेवजह कई चक्कर लगवाए। इसको आईजी ने गंभीरता से लेते हुए रामरूप मीणा को निलंबित कर दिया। आईजी रेंज की ओर से जारी हुए प्रेस नोट में यह भी बताया गया है कि पूर्व में भी लापरवाही बरतने, संवेदनशीलता से त्वरित कार्य नहीं करने और महिलाओं से सम्मानपूर्वक व्यवहार ना करने की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। रामरूप मीणा का मुख्यालय डूंगरपुर रखा गया है।
राजतालाब में चलवाते थे जुए के अड्डे : महिला थाने से पहले रामरूप मीणा राजतालाब थानाधिकारी थे। इस दौरान थाना क्षेत्र के कई इलाकों में किराने की दुकान की तरह सरकारी सड़क पर कब्जे कर खुलेआम सट्टे की गुमटियां तक लगी रहती थी।
राजतालाब थानाधिकारी के तौर पर कार्रवाई के दौरान जुआ खेल रहे कई लोगों को पकड़ा था। इस दौरान ऑफिस कार्यालय में बैठकर बातचीत की जा रही थी। इसी दौरान एक व्यक्ति अपने निजी काम से थाने पहुंचा तो वीडियो बनाने के शक में ही उसे पीटना शुरू कर दिया। कपड़े फाड़े और फिर शांतिभंग में चालान के लिए आदेश दे दिए। मामला एसपी अभिजीत सिंह के पास पहुंचा तो उन्होंने पीड़ित को छुड़वाया और रामरूप को कड़ी चेतावनी दी थी। इन हरकतों के कारण ही सबसे महत्वपूर्ण थाने राजतालाब से उन्हें हटाया गया था।
