रुण्डेड़ा में प्राचीन मुख्य शक्तिपीठ मां चामुंडा माताजी मंदिर में माताजी के दोनों तरफ शुभ मुहूर्त में स्थापना की दो शेर की
आयोजन को लेकर रथ में माता व शेर को विराजित कर गांव में मुख्य मार्गो से निकाली शोभायात्रा, उमड़े भक्तगण
माता के स्वागत में भक्तों ने बिछाए पलक पांवड़े, पुष्प वर्षा कर किया सत्कार
बांसडा,कन्हैयालाल मेनारिया । उपखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत रुण्डेड़ा में प्राचीन मुख्य शक्तिपीठ मां चामुंडा माताजी मंदिर में गुरुवार को विधिविधान से शुभ मुहूर्त में पंडित कैलाश चंद्र चौबीसा के सानिध्य में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान के साथ मंदिर में माताजी के दोनों तरफ दो शेर की स्थापना की गई। कार्यक्रम में सर्वप्रथम सुबह 9 बजे माताजी मंदिर प्रांगण में पंडित के सानिध्य में हवन शुरू हुआ, जो दोपहर 12.15 बजे पूर्णाहुति के साथ समाप्त हुआ, जिसमें यजमानों ने हवन में आहुतियां दी। हवन की पूर्णाहुति पश्चात शुभ मुहूर्त में माताजी के जयकारों के बीच दोनो शेर की स्थापना की गई, जिसमें सैकड़ो भक्त शामिल हुए। राधाकिशन उस्ताद ने बताया कि दोनो शेर लगाने का 21 हज़ार रुपये का सहयोग प्रकाशचंद्र पुत्र रंगलाल सुथार द्वारा किया गया।
इधर, सुबह शेर की स्थापना से पूर्व गांव के विभिन्न मार्गों से माताजी, शेर की शोभायात्रा निकाली गई। मन्दिर में लाल चुनर ओढे चामुंडा माता का अनोखा स्वरूप, सोने के छतर से सुशोभित माता का दरबार, जिसे फूलों, रोशनियों से सजाया हुआ तथा माताजी का अलग-अलग फूलों का स्वर्ण, रजत आभूषणों से विशेष श्रृंगार किया गया, तो इन्त्र और फूलों की खुशबू से पूरा मंदिर प्रांगण महक रहा था। वही पूरे गांव में भगवा ध्वज व रोशनियों से सजाया गया।
भक्तगणो ने माता व दोनो शेर को गाजे बाजे और जयकारों के साथ माताजी की प्रतिमा को रथयात्रा में विराजित किया गया, उसके बाद शुरू हुई माता की भव्य शोभायात्रा। राजसी ठाट बाट शाही लवाजमे के साथ रजत पालकी में इत्र की महक और गुलाब के फुलों से सुसज्जित रथ रवाना हुआ तो शोभायात्रा में जनसैलाब उमड़ा। शोभायात्रा में समस्त ग्रामवासियों द्वारा डीजे, बैंड बाजा व ढोल, थाली मादल के साथ विशाल शोभायात्रा मुख्य मार्ग चामुंडा माता मंदिर, तलहटी चौक, सुथारो की बावड़ी, गणपति मंदिर, लक्ष्मीनारायण मंदिर, शिव मंदिर, हनुमान मंदिर, जणवा मंदिर, जाटों की बावड़ी होते हुए पुनः मां चामुंडा के दरबार में पहुंची। जहा मां चामुंडा की महाआरती की गई।
शोभायात्रा का मुख्य रास्तों में भक्तगणों ने ड्रोन से पुष्प वर्षा कर स्वागत किया एवं माता को श्रीफल भेंट किए। वही श्रद्धालुओं ने माता जी के स्वागत के लिए पलक पावंडे बिछा दिए। विशाल शोभायात्रा में बैंड बाजा, डीजे, ढोल नगाड़ों पर भक्तगण नाचते गाते झूमते हुए माता के जयकारे लगाते हुए रथ यात्रा निकाली गई जिसके हजारों की तादाद में श्रद्धालु साक्षी बने।
रास्ते में माता के दर्शन करने वालों की भारी भीड रही, श्रद्धा का ज्वार उमड़ पड़ा। वही रथयात्रा में माता के जयकारों एवं डीजे साउंड पर मधुर बजते भक्तिगीतों से पूरा मार्ग भक्तिमय हो गया। हर एक व्यक्ति माता के रंग में रंग गया। पुरूष मेवाड़ की पारंपरिक वेशभूषा धोती, कुर्ता तो महिलाएं लाल चुनर ओढ़े हुए डिजे साउन्ड पर जमकर थिरके। ढोल, थाली मादल की झनकार पर गैर नृत्य हुआ तो हजारों लोगों ने इस यादगार पल को अपने मोबाईल एवं केमरे में केद किया। हर एक व्यक्ति, महिला शक्तिरूपा के रंग में तल्लीन हो गया। अंत में महाप्रसादी का भक्तो ने लाभ लिया।
