ऋषभदेव : जैन समाज का दो दिवसीय रथोत्सव कल से आकर्षक लाइटों से सजा नगर,प्रतीकात्मक बारात के रूप में काष्ठ कला से निर्मित लकड़ी के रथों में जिनेन्द्र भगवान निकलेंगे नगर परिक्रमा पर
ऋषभदेव,शुभम जैन । मेवाड-वागड़ के प्रसिद्ध तीर्थ स्थान केसारियाजी में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी दिगम्बर जैन तीर्थ रक्षा कमेटी एवं दिगम्बर जैन समाज द्वारा पर्युषण पर्वं की समाप्ति एवं भगवान नैमिनाथ की प्रतीकात्मक बारात के रूप में काष्ठ कला से निर्मित लकड़ी के रथों में जिनेन्द्र भगवान को विराजमान कर नगर परिक्रमा के लिए निकलेंगे । दो दिवसीय रथोत्सव का आयोजन 30 सितंबर और 1 अक्टूबर को होगा । प्रथम दिन मंदिर प्रांगण से कस्बे के मुख्य मार्ग पर होते हुए आकेस्ट्रा की मधुर धून पर युवक-युवतीयों द्वारा डांडिया रास खेलते हुए, सदर बाजार, नेहरू बाजार, पाटना चौक होते हुए रात्री 8 बजे कृष्ण घाट कुंवारी का नदी के तट पर पहुंचेंगे । जहां भगवान की वरमाला एवं पूज्ञा-अर्चना कर पुनः तीनों रथ भजनों की मधुर ताल के साथ पाटुना चौक पहुचेंगे । जहां प्रथम दिन का विराम सलामी के साथ होंगा। रथोत्सव के पहले दिन महिलाएं पिले वस्त्रों में डांडिया खेलती नजर आयेंगी । रथोत्सव के दुसरे दिन रात्रि 8.30 बजे पाटूना चौक से भण्डार धूलेव के जवानों की सलामी के साथ जिनेन्द्र देव की आरती की जाएगी। इसके पश्चात दूसरे दिन की रथ यात्रा की शुरूआत होगी। पाटूना चौक में विशेष गैर आयोजित की जाएगी, जिसमें पगडी धारी पुरूष एवं चुंदड़ साड़ी पहनी महिलाएं ही गरबा करेंगी तथा देर रात्री 1.45 बजे ऋषभदेव मन्दिर पहुंच कर रथयात्रा संपन्न होगी । रथोत्सव की शोभायात्रा को लेकर पुरे कस्बे में छोटी-छोटी लाइटों एवं फरीयों से साज सज्ञा की गई। मंदिर प्रांगण से निकलने वाले तीनों काष्ठ कला से निर्मित रथ सोने-चांदी के छत्तरों से आच्छादित होकर रथ स्वर्ग से आये भगवान के रजत एवं स्वर्ण रथ की तरह नजर आएंगे । इन रथों में भगवान की प्रतिमा को विराजित कर रोशनी से सजाया जायेगा । रथोत्सव की सुरक्षा को लेकर पुलिस थाना ऋषभदेव मय जाब्ता तैनात रहेगा। जैन समाज द्वारा रथोत्सव के आयोजन को सुचारू रूप देने के लिए 15 कमेटियों का गठन किया गया ।
