वन विभाग ने किया आगाह – वन्यजीवो को घर में नहीं रखें,अपने घरो में किसी भी शेड्यूल वन्यजीव यथा बन्दर, कछुआ, विभिन्न प्रकार के तोते आदि पाल या कर रखा है कैद,7 दिवस की अवधि में सज्जनगढ़ बायोलोजिकल पार्क में आवश्यक रूप से होगा सौपना

सलुम्बर जिला ब्यूरो चीफ,नितेश पटेल । पूरे देश में अक्टूबर माह का प्रथम सप्ताह ’’वन्यजीव सप्ताह’’ के तौर पर मनाया जायेगा। पूरे सप्ताह भर प्रकृति प्रेमियो एवं स्कूल-कोलेज के विद्यार्थियो हेतु कई तरह के आयोजन व प्रतियोगिताएं संपादित करवाई जाएगी। वन्यजीव सप्ताह के आयोजन का प्रमुख उद्देश्य निरीह वन्यजीवो के प्रति सहानुभूति के साथ वन्यजीवो के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु चेतना उत्पन्न करना है। इसके तहत वन पिभाग की ओर से आमजन को आगाह किया गया है कि वन्यजीवों को घर में नहीं रखे।

मुख्य वन संरक्षक आर.के.जैन ने बताया कि उदयपुर शहर एवं ग्रामीण क्षेत्र में कई लोग अज्ञानतावश शेड्यूल वन्यजीव कछुआ (स्टार टोरटोइज) एवं तोते (पेरट्स) आदि अपने घरो में पाल रहे है जिससे ये महत्वपूर्ण वन्यजीव कैद का जीवन जी ही रहे है। ऐसे लोगों द्वारा वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 के प्रावधानो का स्पष्ट तौर पर उल्लंघन किया जा रहा है जिसमें 3 वर्ष से 7 वर्ष तक की कैद का प्रावधान निहित है।

इस संबंध में वन विभाग ने वन्यजीव प्रेमियों से आह्वान किया है कि जिस किसी ने भी अपने घरो में किसी भी शेड्यूल वन्यजीव यथा बन्दर, कछुआ, विभिन्न प्रकार के तोते आदि पाल या कैद कर रखा है, वे इन्हे 7 दिवस की अवधि में सज्जनगढ़ बायोलोजिकल पार्क में आवश्यक रूप से सौपना सुनिश्चित करें अन्यथा अवधि बीत जाने पर सर्वे करवाया जाएगा और तब यदि किसी भी घर में कोई वन्यजीव पाला हुआ प्राप्त होता है तो उस व्यक्ति के विरूद्व वन अपराध दर्ज किया जाकर उसके विरूद्व नियमानुसार कानूनी कार्यवाही की जावेगी।

उप वन संरक्षक अरूण कुमार डी ने बताया कि वन्यजीव, जिस इको सिस्टम में हम रहते है उसका एक अनिवार्य घटक है। वन्यजीवों के अस्तित्व को सीधा संबंध मानव के अस्तित्व से जुड़ा हुआ है। यदि हमारे इको सिस्टम से एक भी वन्यजीव, चाहे छोटी सी मधुमख्खी-तितली ही क्यों न हो गायब हो जाए, उसका प्रतिकूल प्रभाव मानव जाति पर भी निश्चित तौर पर पड़ता है।

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