मेनार में अब नहीं बजेगा डीजे साउंड, सर्वसम्मति से ग्रामीणों ने लिया निर्णय

धार्मिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक कार्यक्रमों में डीजे बजाने पर रहेगा पूर्ण रूप से प्रतिबंध, बैंड की रहेगी छूट

बाँसड़ा,कन्हैयालाल मेनारिया । महगांई के इस दौर में समाज में व्याप्त कुरीतियों को एवं लोगो पर रस्मों को लेकर अतिरिक्त भार बढ़ने पर समय-समय पर समाजजनों द्वारा उन प्रतिबंध लगाया जाता रहा है। इसी को लेकर उपखंड क्षेत्र वल्लभनगर के मेहतागढ़ मेनार में ग्रामीणों ने अब डीजे बजने पर रोक लगा दी है। बुधवार को चारभुजानाथ जी मंदिर प्रांगण, ओंकारेश्वर चौक में गांव के ग्रामीण एकत्र होकर बैठक का आयोजन हुआ। जहाँ ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से गांव के हित में कई प्रकार के निर्णय लिए गए। जिसमें मुख्य रूप से धार्मिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक कार्यक्रमों में डीजे बजाने पर प्रतिबंध लगा दिया है, केवल बैंड बजा सकेंगे। साथ ही गांव में या गांव से बाहर किसी भी सामाजिक आयोजन में मेनार ग्रामवासी के जाने पर सामने वाले द्वारा परिवारजन एवं निकटतम रिश्तेदारों को ही आयोजन कर्ता द्वारा पाग दी जावेगी। दूसरे अतिथियों को पाग नहीं दी जाएगी। वरिष्ठ अधिवक्ता हुक्मीचंद सांगावत, पूर्व सरपंच औंकारलाल भलावत, विजयलाल एकलिंगदासोत ने बताया कि गांव में भी डीजे के कारण कुछ ग्रामीणों की मौते भी हो चुकी है तथा कुछ ग्रामीणों पर इसका बुरा असर पड़ा है, साथ ही डीजे की तेज आवाज बच्चों को बहरा, गूंगा बनाने के साथ ही मस्तिष्क पर भी इसका खतरनाक असर पड़ता है, गर्भ में पल रहे बच्चों में यह विभिन्न विकृति का कारण बन जाता है। शारीरिक व मानसिक विकास पर इसका गंभीर असर होता है। डीजे की तेज आवाज हृदय की समस्या के इजाफा का मुख्य कारण माना जाता रहा है। जिससे समस्त ग्रामवासियों की सर्वसम्मति से गांव में धार्मिक आयोजन, नवरात्रि, मुंडन संस्कार, शादी, विवाह से लेकर जन्मदिन एवं सामाजिक कार्यों सहित सारे मांगलिक कार्यों में डीजे साउंड पूर्ण रूप से प्रतिबंधित कर दिया गया है, तथा गांव के अलावा अन्य गांव से भी कोई भी व्यक्ति बारात लाने के दौरान, या अन्य धार्मिक आयोजन को लेकर मेनार में डीजे साउंड नहीं बजा सकेंगे। डीजे पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध रहेगा। ग्रामीणों का मानना है कि डीजे साउंड के कारण व्यक्तियो में गंभीर बीमारियों के साथ कई बार लोगो की मृत्यु हो जाती है, तथा इन सभी का आने वाली पीढ़ियों पर बुरा असर पड़ेगा। बता दें कि पूर्व में भी ग्रामवासियों ने सर्वसम्मति से गांव में मृत्युभोज करने पर प्रतिबंध लगा रखा है, केवल परिवार जन एवं निकटतम रिश्तेदार द्वारा धूप लगाने के लिए मृत्युभोज किया जा रहा है। बैठक में कई ग्रामीण मौजूद रहे।

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