“योग मे हम रहे मगन”

मन के द्वंदो का
करें शमन
योग में हम रहे मगन
आत्मा में अन्तरलक्षित
हो एक का जोड़
तो योग का हो अवतरण ।
मन की डोर योग में भ्रमित तनिक ना हो हो समभाव करण ।
ध्यान योग ज्ञान योग कर्म योग
मोम समान गुलित मन हो अपरिमित प्रकाशमान ।
भस्त्रिका भ्रामरी मूर्छा प्ल।वनी
नस नाडी को कर उज्जवल
करें नूतन ।
सूर्यभेदीउज्जाईशीतलीशीतकारी अबाधित श्वसन तंत्र का
करें सृजन ।
सूर्य नमस्कार से
तिमरित मन हो
प्रणव गुंजित प्रकाशित चितवन।
प्रकृति की गोद में
देखें स्वपन सुंदर नवनिर्मित संस्कृति बचावण हिरण्यगर्भ प्रदत योग सुगंध
योग दिवस के रूप में
फैले हर जन जन।
मीना जैन
योगा ट्रैनर & रिसर्च स्कॉलर
Mlsu,udaipur

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