रुण्डेड़ा में नानी बाई रो मायरो में भजनों पर खूब थिरके भक्तगण, कथा सुनने सैकड़ो श्रद्धालु पहुँचे

सब लोग छुप कर भक्ति करते हैं और मैं खुले आम भक्ति करता हूं : प. माणक चंद

बाँसड़ा,कन्हैयालाल मेनारिया । कंचन सेवा संस्थान, श्री बजरंगबली सेवा समिति द्वारा मेनार नेशनल हाईवे 48 पर हनुमत धाम में हनुमान जी की 84 फिट ऊंची व 11 मुखी मूर्ति के निर्माण किया जा रहा है, जिसके लिए भूमि एवं सूक्ष्म हनुमानजी की स्थापना हो चुकी है। अब इस धाम के निर्माण के लिए सहयोग हेतु डॉक्टर कानन वाला, छैल बिहारी शर्मा एवं रुण्डेड़ा गोपीलाल मेनारिया, वनपाल द्वारा महादेव मंदिर प्रांगण रुण्डेड़ा में तीन दिवसीय नानी बाई रो मायरो का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें कथा का वाचन माणक चंद मेनारिया द्वारा किया जा रहा है। दूसरे दिन कथावाचक प. माणक चंद मेनारिया ने श्रीकृष्ण के जन्म के साथ उनकी बाल लीलाओं का वर्णन किया। कथावाचक मेनारिया ने श्रीकृष्ण जन्म की लीला का मनोहारी वर्णन किया और कहा कि नानी बाई को नरसी मेहता नारायण श्रीहरि पर भरोसा करने के लिए कहते हैं, फिर भी नानी बाई अनेक उलाहने देती हैं, नरसी कहते हैं कि सब लोग छुप कर भक्ति करते हैं और मैं खुले आम भक्ति करता हूं। इधर बेटी के जाने पर अपने इस अपमान से नरसी जी व्यथित हो गये और रोते हुए श्री कृष्ण को याद करने लगे, नानी बाई भी अपने पिता के इस अपमान को बर्दाश्त नहीं कर पाई और आत्महत्या करने हेतु दौड़ पड़ी, परन्तु श्री कृष्ण ने नानी बाई को रोक दिया और उसे यह कहा कि कल वह स्वयं नरसी के साथ मायरा भरने के लिये आयेंगे।
वही कथा के दौरान पंडित माणक चंद मेनारिया द्वारा बीच-बीच में देखो जी सासू म्हारा पीहर का परिवार..बाई री सासम ननद लडे छे, मत नीचे आन पड़े छे..ऊभो अर्ज करे हैं, साँवरियो हैं सेठ,’मुरली प्रेम की बजाई रे नंद लाल.., कृपा न होती जो तुम्हारी..,एक बार आओ जी कानूड़ा मारे पामना.., लागे ओ मने वृंदावन मिठू..,छोटी छोटी गईया छोटो सो मेरे मदन गोपाल…भजनों से पुरे माहौल को भक्तिमय कर दिया, श्रद्धालुओं ने श्रीकृष्ण के जयकारों से पांडाल को गुंजायमान कर दिया। वही श्रीहरि के धार्मिक मधुर बजते भजनों पर पर श्रद्धालु खूब थिरके। इस दौरान सैकड़ो श्रद्धालु मौजूद रहे।

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