हजारों वर्षो की तपस्या भी कथा सत्संग से छोटी होती है रामचरितमानस : साध्वी सरस्वती

भींडर । भारतीय नववर्ष स्वागत समिति के तत्वाधान में शुक्रवार से रेलवे स्टेशन स्थित कृषि उपज मंडी में शुरू हुई राष्ट्रोत्थान श्री राम कथा के दूसरे दिन साध्वी सरस्वती दीदी ने कहा की हमारे जीवन में असली आनंद की अनुभूति तब होती है जब सही मार्गदर्शन में भगवान की कथा सरोवर में गोता लगा रहे होते हैं कथा एक ऐसी चीज है जिसे बड़ा से बड़ा पाप भी धूल जब तक सत्संग की गंगा में गोता नहीं लगाओगे जीवन कितनी भी बड़ी से बडी भक्ति व तपस्या कर लो कथा ऐसा माध्यम है जिससे व्यक्ति के प्रज्ञा के चक्षु खुल जाते है ।

रामकथा मर्यादा सिखाती है। राम नाम की महिमा का वर्णन स्वयं राम भी नहीं कर सकते है रामजी जिसे छोड़ दे उसका डूबना निश्चित है भगवान ने जो दिया है उसका धन्यवाद करो हर समय रोना मत रोवो रामनाम से बड़ा कोई धन नहीं होता आत्मा की पुष्टि राम नाम से ही होती है संत अपने लिए नहीं अपनों के लिए जीता है। विश्वामित्र व वशिष्ट जी की तुलना करते हुए हजारों वर्षों की तपस्या को भी कथा से छोटा बताया है स्त्री घर की मर्यादा है तो पुरुष उसकी नींव है गुरु की महिमा का वर्णन करते हुए कहा की गुरु का काम भगवान बनना नहीं भगवान तक ले जाना होता है गुरुदेव के चरणों की वंदना का महत्व बताया। रामायण में सात कांड है सप्ताहिक सात दिन 7 राशियां है और सात संगीत के सुर होते है ।

स्वांत सुखाय हेतु राम कथा लिखी गई। कथा के दौरान शिव पार्वती के विवाह के पर भी वर्णन किया और झांकिया सजाई गई। इस मौके पर कथा को श्रवण करने के लिए आसपास के गांवों से लोग बसों के माध्यम से कथा श्रवण करने के लिए आ रहे हैं।

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