मेनार श्री चारभुजा मन्दिर स्वर्ण कलश, ध्वजादंड स्थापना कार्यक्रम की शुरुआत क्षेत्र की मुख्य शक्तिपीठ अम्बेमाताजी के नवचंडी हवन के साथ हुई

हवन की पूर्णाहुति पर यज्ञशाला में गणपति जी, प्रधान कलश एवं रुद्र कलश की हुई स्थापना

बाँसड़ा । मेनार में ओंकारेश्वर चौक स्थित प्राचीन श्री चारभुजा मन्दिर के जिर्णोद्वार पर मन्दिर पर स्वर्ण कलश, ध्वजादंड स्थापना एवं श्रीमद् भागवत् कथा को लेकर नो दिवसीय विभिन्न मांगलिक कार्य एवं भव्य आयोजन शनिवार से शुरू हो गए है। वही यज्ञशाला में भी कलश की स्थापना की गई। इस कार्यक्रम की शुरुआत क्षेत्र की मुख्य शक्तिपीठ माँ जगदंबा माताजी के दरबार में माता का नवचंडी हवन के साथ हुई।
शनिवार को अलसुबह 5.30 बजे केदारेश्वर महादेव, केदारिया से हवन में अग्नि प्रवेश हेतु प्रेमशंकर रामावत, किशन रणछोड़ द्वारा पंडित के सानिध्य में विधिवत अग्नि का पूजन कर वहाँ से अग्नि लेकर मेनार अम्बामाताजी मंदिर पहुँचे, जहाँ पंडित अम्बालाल शर्मा द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ अग्नि का पूजन कर माँ जगदंबा का नवचंडी हेतु हवन में अग्नि प्रवेश करवायी गई। तत्पश्चात हवन मुख्य पंडित अम्बालाल शर्मा, उपाचार्य पंडित शंकरलाल चौबीसा, यज्ञ के ब्रह्मा पंडित विकास जोशी सहित 15 पंडितों के सानिध्य में नवचंडी यज्ञ सुबह 7.30 बजे से शुरू हुआ, जिसकी पूर्णाहुति दोपहर 12.15 बजे हुई। पंडित शर्मा ने बताया कि इस नवचंडी यज्ञ हेतु अग्नि प्रवेश के लिए विभिन्न प्राचीन धूणीयो से अग्नि मंगवा कर हवन में अग्नि प्रवेश करवाया गई। हवन की पूर्णाहुति पश्चात आरती हुई एवं प्रसाद भक्तो में वितरित किया गया।

नवचंडी हवन की यह थी बोलिया

माताजी के नवचंडी हवन के लिए भी बोलिया लगाई गई, जिसमें घी दयाशंकर रामावत 21 हजार साकिल्य-1 विजयलाल दावोत 6100, साकिल्य-2 मोहनलाल मेरावत 6100, साकिल्य-3 देवकिशन ठाकरोत 6100 साकिल्य-4 अम्बालाल कानावत 6100 रुपये बोलियां लगी। बोलियां के छूटने के बाद वही भक्त हवन में बैठे।

विभिन्न औषधियो से हुआ नवचंडी यज्ञ

पंडित अम्बालाल शर्मा ने बताया कि ठाकुरजी के इस भव्य से पहले कुलदेवी माँ जगदम्बा के दरबार में नवचंडी यज्ञ किया गया, जिसमें पांच किलो सूखा मेवा, 11 किलो खीर, 15 किलो घी, 501 पुष्प, दिव्य औषधिया तथा विभिन्न औषधियो से इन हवन को किया गया। हवन से पूर्व 15 पंडितों ने दुर्गा पाठ, वेद पाठ कर हवन की शुरुआत की।

ढोल, गाजे बाजे के साथ माताजी मंदिर से अखंड ज्योत लेकर ग्रामीण पहुँचे ठाकुरजी मंदिर

एक फरवरी से नो कुंडीय की शुरुआत होगी, उससे पहले शनिवार को नवचंडी हवन पश्चात ग्रामीण ढोल, गाजे बाजे के साथ माताजी मंदिर से अखंड ज्योत लेकर ठाकुरजी मंदिर पहुँचे, जहाँ यज्ञशाला में गणपति जी, प्रधान कलश एवं रुद्र कलश की स्थापना हुई एवं सभी ग्रामीणों द्वारा पंडितो के मंत्रोच्चारण के साथ ज्वारा रोपण गंगाजल मिलाते हुए किया। अब 5 फरवरी तक यज्ञशाला में निरंतर तेल, घी की अखंड ज्योत जलेगी। वही ठाकुरजी के शनिवार का वागा मोतीलाल एकलिंगदासोत एवं रविवार को कालूलाल दावोत, मांगीलाल दावोत की ओर से धराया जाएगा।

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