राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े चावंड का दौरा : महाराणा प्रताप की 428वीं पुण्यतिथि पर समाधि स्मारक पर की श्रद्धांजलि अर्पित; सगतड़ा पहुंच 40 साल पुराने मित्रो से मुलाकात कर पुरानी यादें की ताज़ा

उदयपुर,डीपी न्यूज नेटवर्क । राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने अपने महाराष्ट्र के 40 साल पुराने दोस्तों से उदयपुर में मुलाकात की। राज्यपाल ने अपने दोस्त से डायबिटीज के बारे में जानकारी ली और मराठी भाषा में बात भी की। वहीं उनके दोस्तों ने बताया कि हरिभाऊ राजनीति में आने से पहले किसान थे, वे बैलगाड़ी पर अपनी खेत का माल लेकर बेचने आते थे। इस दौरान वे एक होटल पर रुकते और चाय की चुस्कियां लेते हुए घंटों बातें करते। यहां हरिभाऊ लखनऊ से आने वाला पांचजन्य पढ़ने आते थे। राज्यपाल बागड़े शनिवार को सलूंबर स्थित चावंड में महाराणा प्रताप की 428वीं पुण्यतिथि पर उनकी समाधि स्थल पर पहुंचे थे। इसके बाद चावंड के पास स्थित सगतड़ा गांव पहुंचे थे।

राज्यपाल के मित्र नरेंद्र जोशी ने बताया कि यह बात महाराष्ट्र की है। वहां संभाजी नगर में हम सभी व्यापारी मित्र होटल का बिजनेस करते थे। वे (राज्यपाल) लखनऊ से आने वाले पांचजन्य अखबार को पढ़ने आते थे। इसी दौरान राज्यपाल से हमारी दोस्ती हुई थी। नरेंद्र जोशी ने बताया कि यह बात 1960 की होगी ,तब हमारा पूरा परिवार महाराष्ट्र में था। वहां हम होटल का व्यवसाय करते थे। राज्यपाल हमारे यहां अपने खेतों से जुड़े उत्पाद लेकर आते थे। उन्होंने इसके बाद जनसंघ जॉइन किया और विधायक बने। हमें गर्व है कि हमारे मित्र राजस्थान के राज्यपाल बने हैं। आज भी उन्होंने उसी अंदाज में हमसे बात की, परिवार से मिले। उन्होंने मेरी डायबिटीज के बारे में भी पूछा।

गांव में पहुंचे राज्यपाल का उनके दोस्त हेमराज जोशी के घर पर मेवाड़ी परंपरा में स्वागत किया गया। उन्होंने अपने पुराने मित्र स्व. भगवान जोशी के पुत्र मोहन जोशी और हरिराम जोशी से मिलकर उनसे चर्चा की। करीब 12 मिनट तक रुके और अपने परिचितों के साथ चाय के साथ मराठी भाषा में चर्चा की। बता दें कि सगतड़ा गांव के आधा दर्जन मित्र राज्यपाल के साथ थे। इन सबका होटल लाइन का बिजनेस था महाराष्ट्र में तब वहां मिलते थे।

इससे पहले महाराणा प्रताप स्मारक समिति की ओर से महाराणा प्रताप की 428वीं पुण्यतिथि पर आयोजित समारोह में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि मेरे कार्यालय में भी मैंने महाराणा प्रताप और छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा स्थापित करवाई है। इससे हमें अनवरत प्रेरणा मिलती रहेगी। मेवाड़ के महाराणा प्रताप और महाराष्ट्र के शिवाजी महाराज ने अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्र की आराधना में समर्पित किया है, ऐसे महानायकों को मैं कोटि-कोटि प्रणाम करता हूं।

उन्होंने कहा कि स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की तर्ज पर यहां भी स्टैच्यू ऑफ इंडिपेंडेंस स्थापित किया जा सकता है। इससे इस स्थान पर पर्यटक भी आकर्षित होंगे तथा महाराणा के जीवन से प्रेरणा ले पाएंगे। राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्ध होकर संघर्ष करने वाले, अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले महाराणा प्रताप के जीवन से प्रेरित करने वाला यह स्थान पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है।

राज्यपाल ने कहा कि मुहम्मद गौरी और पृथ्वीराज चौहान के बीच हुए घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि राजस्थान शूरवीरों की धरती है। यहां कई पराक्रमी योद्धाओं ने जन्म लिया है। आज महाराणा की इस पुण्य धरा पर आने से मैं धन्य हुआ हूं। उन्होंने भारतीय संस्कृति का बखान करते हुए कहा कि ऐतिहासिक कालखंड में संस्कृति को डूबाने के कई प्रयास हुए फिर भी यह अटूट रही इसका कारण महाराणा प्रताप जैसे वीर योद्धा ही है।

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