महात्मा गांधी अंग्रेजी विद्यालयों को लेकर विभाग में असमंजस बरकरार : परीक्षाएं सिर पर, शिक्षकों के 17500 पद खाली, थर्ड ग्रेड शिक्षकों के भरोसे चल रहे स्कूल ; उदयपुर में 165 शिक्षकों के पद है रिक्त
उदयपुर,डीपी न्यूज नेटवर्क । प्रदेश में महात्मा गांधी अंग्रेजी विद्यालयों को लेकर विभाग में असमंजस बरकरार है। इन विद्यालयों में करीब 17500 शिक्षकों के पद खाली हैं, फिर भी भरे नहीं जा रहे हैं, जबकि खाली पदों को भरने के लिए पिछले साल 25 अगस्त को माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से परीक्षा ली गई थी। इसमें विभाग में ही कार्यरत शिक्षक शामिल हुए थे। सफल शिक्षकों को महात्मा गांधी विद्यालयों में नियुक्ति दी जानी थी, लेकिन विभाग परीक्षा लेकर भूल गया। चूंकि दो माह बाद परीक्षा है तो ऐसे में शिक्षकों के खाली पद बच्चों की परीक्षा तैयारी को प्रभावित कर रहे हैं। स्कूलों में स्थिति यह है कि योग्य अध्यापकों की जगह पर कहीं तृतीय श्रेणी शिक्षक पढ़ा रहे हैं तो कहीं संस्थाप्रधान जुगाड़ कर कक्षाएं संचालित करवा रहे हैं।
एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि खाली पद नहीं भरने की मुख्य वजह महात्मा गांधी अंग्रेजी विद्यालयों को लेकर विभाग में असमंजस का होना है। शिक्षामंत्री की ओर से बार-बार इन विद्यालयों को बंद करने का बयान देना है। इसलिए असमंजस की स्थिति है कि ये विद्यालय भविष्य में चलेंगे या बंद होंगे।
उदयपुर में 134 स्कूल, 165 शिक्षकों के पद हैं रिक्त
प्रदेश में अभी 3700 महात्मा गांधी विद्यालय संचालित हैं। उदयपुर में इनकी संख्या 134 है। इनमें करीब 165 शिक्षकों के पद खाली हैं। गौर करने वाली बात यह है कि इन विद्यालयों में शिक्षकों के पद सामान्य सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों से ही भरे जाने थे।
दूसरी ओर, परीक्षा में शामिल 68 शिक्षकों ने इस नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर हाइकोर्ट में याचिका डाल रखी है। इनका आरोप है कि जिले के ही विद्यालयों के लिए अप्लाई करने वाले शिक्षकों को बोनस अंक देना गलत है। इस मामले में निदेशालय की ओर से कोर्ट को बताया गया है कि शिक्षकों से ऑफलाइन आवेदन मांगे हैं। कोर्ट में याचिका लगाने वाले 68 शिक्षक परीक्षा पास कर चुके हैं। इस कारण उनसे दुबारा विकल्प पत्र मांगे जा रहे हैं। बाकी शेष शर्तें परीक्षा के दौरान की ही रहेंगी। बता दें कि उस समय प्राचार्य, प्राध्यापक, वरिष्ठ अध्यापक, शारीरिक शिक्षक, पुस्तकालय, प्रयोगशाला सहायक, अध्यापक लेवल एक और दो, कम्प्यूटर शिक्षक आदि पदों को भरने के लिए परीक्षा आयोजित करवाई गई थी। लेकिन यह पूरी प्रक्रिया अभी तक चयन परीक्षा से आगे नहीं बढ़ पाई।
अड़चन…परीक्षा से पहले 51 जिले थे, अब 41, फिर से होगी पदों की गिनती
जिस समय परीक्षा आयोजित की गई थी, उस समय प्रदेश में 51 जिले थे। इन्हीं के आधार पर परीक्षा का आयोजन और आवेदन भरवाए गए थे, लेकिन वर्तमान में सरकार की ओर से कुछ जिले घटा दिए गए हैं। अब 41 जिले ही रह गए हैं। इस कारण दुबारा 41 जिलों को लेकर ही गिनती की जाएगी। महात्मा गांधी विद्यालयों की व्यवस्था देखने वाले एक अधिकारी ने बताया कि नियुक्ति प्रक्रिया भूले नहीं हैं। हमने एक सॉफ्टवेयर एनआईसी में डवलप किया है। उसी के अनुसार जिलेवार रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया होगी। बता दें कि परीक्षा में विभाग ने 17500 शिक्षकों को ही पास किया है। जबकि 50 हजार से अधिक शिक्षकों ने परीक्षा दी थी ।
सरकार के स्तर पर इन विद्यालयों को बंद करने के लिए मंत्री मंडलीय समिति का गठन किया हुआ है। इसके अध्यक्ष उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा हैं। इससे पहले शिक्षामंत्री मदन दिलावर कई बार बयान दे चुके हैं कि इन विद्यालयों को बंद किया जाए। एक बार विकल्प पत्र भी मांगे गए, लेकिन एक भी स्कूल बंद नहीं किया गया।
पंचायतीराज और माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेशाध्यक्ष शेरसिंह चौहान ने बताया कि सरकार और निदेशालय बच्चों के हित में पद भरने की कार्रवाई करे। ताकि दो माह के बाद होने वाली परीक्षा में बच्चों का नुकसान न हो। शिक्षकों का चयन भी उनकी ओर से दिए गए विकल्प से ही किया जाए।
Source : DB
