क्षेत्र में हाड़ कंपा देने वाली ठंड से ग्रामीणों में छूती धूजणी, जनजीवन हुआ अस्त व्यस्त,ग्रामीणों को रबी को फसलों पर पाला पड़ने का मंडरा रहा है खतरा, ग्रामीण परेशान

डीपी न्यूज नेटवर्क,वल्लभनगर,कन्हैयालाल मेनारिया । क्षेत्र में मौसम के बदलते मिजाज के चलते कड़ाके की ठंड पड़ रही हैं और साथ में कोहरा भी किसानों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ रही सही कसर पाला पडऩे से रबी की फसल में नुकसान होने की आशंका बढ़ गई है। सोमवार को ठंड से ग्रामीणों का जनजीवन अस्त व्यस्त रहा, लोग सुबह 11 बजे तक घरों में दुबके रहे। सुबह 10 बजे बाद धूप जरूर खिली, लेकिन धूप से ग्रामीणों को राहत नहीं मिली और हाड़ कंपा देनी वाली ठंड से ग्रामीणों में धूजणी छुंट गयी। ग्रामीण सुबह-शाम अलाव लगाकर सर्दी से बचाव कर रहे है। वही खेतो में जो कार्य कर रहे हैं, उनकी हालत खराब है। बंशी, लक्ष्मी लाल, जसवंत, ललित, छगनलाल, गोपाल, नर्बदाशंकर दियावत ने बताया कि रविवार, सोमवार को ठंड, कोहरे और पाले के असर से फसलों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। इन दिनों गेहूं के अलावा सरसों की फसल भी खेतों में खड़ी है। यह फसलें पाले से प्रभावित होती हैं। गेहूं की फसल और सब्ज़ियों में अधिक नुकसान होने की संभावना है। मुलायम पत्ती वाली फसलों के लिए पाला खतरनाक होता है। क्षेत्र के मेनार, रुन्डेडा, नवानिया, धमानिया, ढावा, खरसान, विजयपुरा, तारावट, मोरझाई, किकावास किसानों का मानना है कि कुछ दिनों से पड़े पाले से 10 से 15 प्रतिशत गेहूँ की जिन फसलों की बालिया अवस्था पूर्ण हो चुकी है उस गेहूँ की फसल में नुकसान होगा। वहीं कृषि विभाग के मुताबिक जिन क्षेत्र में किसानों ने सिंचाई कर रखी है उन क्षेत्र में पाले से कोई नुकसान नही हो रहा है लेकिन जिन क्षेत्रों में सिचाई नही हुई है उस क्षेत्र में पाले से नुकसान हो सकता है । किसानों को पाला से बचाव के उपाय भी बताए गए है। कृषि विभाग के ब्लॉक कृषि अधिकारी वल्लभनगर उदयराम मेघवाल के मुताबिक जब पाला पड़ता है तब फसल पूरी तरह खराब हो जाती है। पौधों की कोशिकाओं में तरल द्रव होता है, जो पाला पडऩे से बर्फ में बदल जाता है और उसके बाद वह तरल अवस्था में आता है जिससे कोशिकाओं का आयतन बढ़ जाता है और कोशिकाएं फट जाती है। जिससे पौधा नष्ट हो जाता है। ऐसे में फसल नष्ट हो जाती है।

पाले से बचाव के करे यह उपाय

– फसल में हल्का पानी दें, खेत में नमी बनाएं रखें।

– ज्यादा पानी न दें नहीं तो नुकसान होगा।

– फसल में कोई बीमारी आ रही है तो विशेषज्ञ से सलाह लें।

– किसान सुबह के समय पूरे खेत पर घूमकर फसल का जायजा जरूर लें।

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