गौ माता ही आपको वेतरनी का माध्यम बनती है : कृष्ण किंकर

डीपी न्यूज़ नेटवर्क,बांसड़ा,कन्हैयालाल मेनारिया । भींडर उपखंड अंतर्गत श्री नागेश्वर पार्श्वनाथ गौशाला बांसड़ा में द्वितीय दिवस की राम कथा के अवसर पर महादेव पार्वती को राम कथा का रसपान कर रहे थे तब उन्हें चरित्र और मर्यादा का वृतांत सुनाते समय उच्च आदर्श को प्रस्तुत किया कि राम जैसा आदर्श इस सृष्टि पर ना हुआ है ना होगा तब मां पार्वती ने सीता का रूप बनाकर प्रभु श्री राम के समक्ष उपस्थित हुई तो उन्होंने कहा मां । कथा अपरोक्ता कृष्ण किंकर महाराज ने बताया कि श्री राम ने पहचान लिया उस दिन से भोलेनाथ ने पार्वती का त्याग किया। लेकिन मां पार्वती का संकल्प था कि मैं जन्म जन्मांतर जन्म लेने पर भी मैं अगर किसी की अर्धांगिनी बनोगी तो वह प्रभु भोलेनाथ की ही बनूगी। सत्संग ही व्यक्ति का कल्याण कर सकता है ।कृष्ण किंकर महाराज ने विस्तार से वर्णन किया कि व्यक्ति को कभी सत्संग नहीं छोड़ना चाहिए। कथा में शिव पार्वती का विवाह विस्तार पूर्वक श्रवण करवाया। मनुष्य का जन्म सृष्टि होता है तो उसका कल्याण के लिए एकमात्र परमात्मा ने एक ही साधन है गौ माता के सेवा से पार करने का जो माध्यम बनाया ।गौ माता की पूछ के माध्यम से ही व्यक्ति अपनी वैतरणी पार कर सकता है इसलिए जीवन में गाय की सेवा को प्रथम प्राथमिकता दें बाकी सारे के सारे कार्य दूसरे नंबर पर आते हैं। मनुष्य जन्म को सत्संग प्रभु का गुणगान से सार्थक करें प्रभु का नाम कभी न भूले ।प्रभु को हर पल मन में समाहित रखें ताकि जीवन का कल्याण हो सके इसलिए सत्संग के माध्यम से व्यक्ति को एहिक और पारलौकिक विधान बताया है ताकि जगत का सबका कल्याण हो सके। कथा में बुधवार संत नारायण गिरि महाराज सारंग पुरा ने सेवा कार्यों से प्रभावित होकर 21000 की सहायता गौ सेवार्थ प्रदान की इस अवसर पर। वल्लभनगर, मेनार , हमेंरपुर , भींडर ,कानोड, बांसड़ा, केदारिया आदि सैकड़ो लोगों ने कथा श्रवण का लाभ प्राप्त किया।

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