सावलिया सेठ का भंडार से निकले रिकॉर्ड 35 करोड़ रुपए,6 चरणों में दान की गिनती हुई पूरी : इस बार 2 माह बाद हुई गिनती; 2 किलो से ज्यादा सोना और 188 किलो चांदी मिली

चित्तौड़गढ़,डीपी न्यूज नेटवर्क । सांवलिया सेठ मंदिर में इस बार दान का रिकॉर्ड बना है। दो महीने में सांवरा सेठ मंदिर में करीब 35 करोड़ रुपए का दान मिला है। इस बार रिकॉर्ड तोड़ रुपयों के साथ-साथ 2 किलो सोना, करीब 188 किलो चांदी और कई देशों की करेंसी भी मिली है। पिछले साल इसी समय दो महीने के भंडार से करीब 17 करोड़ रुपए मिले थे। सांवलिया सेठ मंदिर में हर महीने चतुर्दशी तिथि पर दानपात्र खुलते हैं। इस बार दीपावली पर दानपात्र नहीं खुला था। ऐसे में 2 महीने बाद दानपात्र खुले हैं। 30 नवंबर को खुले दान पात्रों से निकले दान की गिनती शुक्रवार शाम को खत्म हो गई।

मंदिर में दान की गिनती 6 राउंड (दिन) में पूरी हुई है। पहले ही दिन 11 करोड़ 34 लाख 75 हजार रुपयों की गिनती हो गई थी। जबकि दूसरे दिन (1 दिसंबर को) अमावस्या होने के कारण काउंटिंग नहीं हुई। 2 दिसंबर को 3 करोड़ 60 लाख रुपयों की काउंटिंग हुई। 3 दिसंबर को 4 करोड़ 27 लाख 80 हजार रुपए, 4 दिसंबर को 2 करोड़ 73 लाख 90 हजार रुपए, 5 दिसंबर को 3 करोड़ 51 लाख 29 हजार 500 रुपयों की गिनती हुई। आज (6 दिसंबर) को आखिरी दिन सिक्कों की गिनती हुई है। सांवरा सेठ के दरबार में भक्तों ने 13 लाख 93 हजार 81 हजार रुपए के सिक्के दान दिए।

भक्तों ने ऑनलाइन और मनी ऑर्डर से ऑफिस में 9 करोड़ 30 लाख 27 हजार 427 रुपए जमा कराए हैं। इसके बाद कुल दान राशि 34 करोड़ 91 लाख 95 हजार 68 रुपए मिले हैं।

सांवरा सेठ के दरबार में सोना-चांदी का भी जमकर दान मिला है। भंडार से 2 किलो 290 ग्राम सोना और 58 किलो 900 ग्राम चांदी मिली है, जबकि भेंट कक्ष में 504 ग्राम 560 मिलीग्राम सोना और 128 किलो 930 ग्राम चांदी मिली है। यानी कुल दो महीनों में 2 किलो 794 ग्राम 560 मिलीग्राम सोना और 187 किलो 9 ग्राम चांदी मिली है।जानकारी के अनुसार चांदी की सामग्री का कुल वजन 583 किलो 153 ग्राम था, जिसमें करीब 454 किलो लकड़ी लगी हुई थी। इस बार 1 किलो का एक सोने का बिस्किट और 100-100 ग्राम के 6 सोने के बिस्किट भी दान में मिले हैं।

इसके अलावा भंडार से करीब 20 लाख रुपए मूल्य के अमेरिकी डॉलर के साथ ही बड़ी संख्या में यूएई, नेपाल, कुवैत, फ्रांस आदि देशों की विदेशी करेंसी भी मिली है। इसके साथ ही काफी संख्या में चेक भी मिले। यह रुपए भंडार और भेंट कक्ष में मिले रुपयों में शामिल नहीं है।

परंपरा के चलते 2 महीने का भंडार हो जाने से भगवान के सामने लगे दोनों मुख्य भंडार दान राशि से फुल भर गए। इसके कारण दोनों भंडारों पर लकड़ी के चार अस्थाई भंडार बनाकर लगाने पड़े। पहली बार ही चार भंडार लगे। अब भंडार से करोड़ों रुपए निकाल रहे हैं, जबकि एक समय ऐसा था जब 100 रुपए के कुछ नोट भंडार से निकलते तो बड़ी बात मानी जाती थी। कस्बे के मनोहर लाल जैन बताते हैं कि वर्ष 1970-75 के लगभग जब भगवान का भंडार खुलता था, तब 100 रुपए का नोट निकलने पर भी भगवान के जयकारे लगते थे।

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