स्कूली शिक्षा पाठ्यक्रम में बदलाव की तैयारी,समीक्षा कमेटी का गठन;एक माह में रिपोर्ट सौंपेगी

उदयपुर,डीपी न्यूज नेटवर्क । प्रदेश में स्कूली शिक्षा के पाठ्यक्रम को बदलने की कवायद है। सरकार समीक्षा करवाएगी। इसके लिए कमेटी बनी है, जिसमें कोटा खुला विश्वविद्यालय केे कुलपति प्रो. कैलाश सोडाणी को अध्यक्ष बनाया है। कमेटी एक माह में सरकार को रिपोर्ट देगी।

इसके आधार पर आगामी सत्र के लिए कक्षा एक से 12वीं तक के पाठ्यक्रम में बदलाव की रूपरेखा तय होगी। इसमें उदयपुर स्थित राजस्थान शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (आरएससीईआरटी) का भी अहम रोल होगा।

कमेटी आरबीएसई और स्कूली शिक्षा के पाठ्यक्रम का अध्ययन कर रूपरेखा तैयार करेगी। इसमें तय किया जाएगा कि किस चैप्टर को हटाना है और किसे रहने देना है। दूसरे चरण में नई शिक्षा नीति 2020 के प्रावधान, पाठ्यक्रम, राष्ट्रीय पाठ्यक्रम, रूपरेखा, विषयवस्तु, छायाचित्र, सामग्री संकलन आदि की समीक्षा कर सुझाव देगी । आरएससीईआरटी एक बार फिर से प्रस्तावित पाठ्यक्रम का विशेषज्ञों से अवलोकन कराएगी, जिसके बाद इसे लागू करने की अनुशंसा करेगी।

बता दें, गत 14 नवंबर को शिक्षामंत्री के विशेषाधिकारी सतीश कुमार गुप्ता के नेतृत्व टीम ने राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद, दिल्ली का दौरा कर पाठ्यक्रम समीक्षा के नियम और कानूनी प्रावधानों पर चर्चा की थी। इधर, शिक्षामंत्री मदन दिलावर का कहना है कि अभी पाठ्यक्रम में देश, संस्कृति, वीरता आदि से जुड़े कई तथ्य गलत हैं। इन्हें हटाएंगे। नया पाठ्यक्रम अगले सत्र में लागू करने का प्रयास होगा।

कमेटी में ये मेंबर…शिक्षाविद् हनुमानसिंह राठौड़ उपाध्यक्ष व एनसीईआरटी, दिल्ली के सलाहकार डी. रामाकृष्ण राव सदस्य बनाए गए हैं। सदस्य सचिव के रूप में शिक्षामंत्री मदन दिलावर के विशेषाधिकारी सतीश कुमार गुप्ता कार्य देखेंगे। आरबीएसई के पूर्व अध्यक्ष प्रमेंद्र कुमार दशोरा, शिक्षाविद् भारत राम कुमार, श्याम सुंदर बिस्सा, जयंतीलाल खंडेलवाल, रिटायर आईपीएस कन्हैयालाल बेरीवाल को सदस्य बनाया है।

राजस्थान का ट्रेंड : सरकार के बाद पाठ्यक्रम भी बदलता है

  • प्रदेश में ट्रेंड है कि जब-जब सरकार बदलती है, पाठ्यक्रम में भी बदलाव आता है।
  • भाजपा सरकार आने पर संस्कृति और राष्ट्र समर्थित अध्याय जोड़े जाते हैं।
  • कांग्रेस सरकार आने पर धर्म निरपेक्षता आधारित चीजें आती हैं। यह सिलसिला साल 2008 से है।
  • एक बार फिर से प्रदेश में भाजपा सरकार सत्ता में है तो पाठ्यक्रम बदलना तय था, लिहाजा इसकी शुरूआत इस कमेटी के गठन के साथ ही हो चुकी हैं।
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