परिचित को रुपए उधार दिए, फिर चेक बाउंस के फर्जी दस्तावेज से हर्जाना मांगा, परिवाद खारिज ; कोर्ट ने परिवादी के खिलाफ केस चलाने के दिए आदेश
उदयपुर,डीपी न्यूज नेटवर्क । पैसे उधार देने के बाद परिचित के खिलाफ कोर्ट में कूटरचित दस्तावेज पेश कर केस कराने का मामला सामने आया है। परिचित को 75 हजार रुपए उधार देने के बाद परिवादी ने चेक बाउंस करवा दिए। फिर बैंक के फर्जी रिटर्न मेमो और बैंक जमा पर्ची कोर्ट में पेश कर दोगुनी राशि वसूलना और सजा दिलवाना चाहा। कोर्ट ने जांच के बाद दस्तावेजों को फर्जी माना। आरोपी को दोषमुक्त करने के साथ ही परिवादी के खिलाफ फर्जीवाड़े की कार्रवाई के लिए एडीजे-2 में परिवाद पेश करने के आदेश दिए हैं। प्रकरण के अनुसार न्यू शक्ति नगर निवासी घनश्याम खतूरिया ने 11 मार्च, 2015 को कोर्ट में परिवाद पेश किया। इसमें बताया कि न्यू फतहपुरा निवासी परिचित दिलीप सिंह ने उनसे 3 सितंबर, 2014 को 75 हजार रुपए उधार लिए। भुगतान के लिए एक चेक दिया। उन्होंने जनवरी 2015 में चेक बैंक में जमा कराया, जो बाउंस हो गया। उन्होंने आरोपी को नोटिस भेजा, जो उसने नहीं लिया। उन्होंने कोर्ट से दोगुनी राशि दिलाने का अनुतोष चाहा। परिवादी की ओर से कोर्ट में विवादित चेक, रिटर्न मेमो, बैंक जमापर्ची, सूचना पत्र और डाक रसीद साक्ष्य व दस्तावेज के रूप में पेश किए।
दिलीप सिंह की ओर से अधिवक्ता दिलीप पालीवाल, देवेंद्र सिंह झाला और संचित सुहालका ने तर्क दिया कि परिवादी ने गलत सबूत पेश किए हैं। सुनवाई के दौरान एनआई एक्ट-4 कोर्ट के जज दीपेंद्र सिंह शेखावत ने माना किया परिवादी ने कोर्ट में दस्तावेजों में कूटरचना कर मिथ्या साक्ष्य पेश किए। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद कोर्ट ने दिलीप सिंह को चेक बाउंस के मामले में दोष मुक्त कर दिया। घनश्याम खतूरिया के परिवाद को खारिज कर दिया। कोर्ट में फर्जी रिटर्न मेमो और बैंक जमा पर्ची पेश करने के मामले में घनश्याम के खिलाफ एडीजे-2 कोर्ट में भादसं की विभिन्न धाराओं में परिवाद पेश करने के आदेश दिए।
