छात्रों को शिक्षा के साथ-साथ संस्कार भी दे : पूर्व विधायक अहारी

ऋषभदेव,डीपी न्यूज नेटवर्क । प्राचार्य-प्रधानाध्यापक सत्रारम्भ वाकपीठ के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि पूर्व विधायक नानालाल अहारी ने कहा कि शिक्षक का सम्मान भगवान से भी बढकर है। छात्रों को शिक्षा के साथ-साथ संस्कार भी देने की आवश्यकता है ताकि बालक अनुचित दिशा में नही बढे। जो छात्रहित के लिये बेहतर है, वही कार्य करे। वाकपीठ के उद्घाटन कार्यक्रम में अध्यक्षता सतीशचन्द्र जैन शिक्षा उपनिदेशक, विशिष्ट अतिथि पूर्व उपजिला प्रमुख सुन्दरलाल भाणावत, विशिष्ट अतिथि महिपाल सिंह राठौड एवं प्रकाशचन्द्र जैन पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी ने की। इस अवसर पर राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय के पुष्पेन्द्र सिंह झाला भी उपस्थित रहे। शिक्षा उपनिदेशक सतीशचन्द्र जैन ने बताया कि संस्थाप्रधान प्रयास करे तो अपने विद्यालय की कायाकल्प कर सकता है। बच्चो के बौद्धिक, मानसिक एवं शारीरिक विकास के साथ-साथ शैक्षिक उन्नयन कर चहुंमुखी विकास कर सकता है।

साथ ही सतीशचंद्र जैन का मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी से शिक्षा उपनिदेशक पद पर पदोन्नति होने पर सभी मंचासीन अतिथियों एवं वाकपीठ पदाधिकारियों द्वारा विशेष स्वागत किया गया। विशिष्ट अतिथि सुन्दरलाल भाणावत ने बताया कि शिक्षक-अभिभावक-बालक ये तीनों यदि आपस में समन्वय रखे तो ही बच्चे का सर्वांगिण विकास हो सकता है। वर्तमान में पडौसी देशो का उदाहरण देते हुये बताया कि बच्चो को संस्कारवान होना आवश्यक है, जिसकी शुरूआत विद्यालय से ही की जा सकती है। विशिष्ट अतिथि प्रकाशचन्द्र जैन ने बताया कि शिक्षा की धुरी संस्थाप्रधान है। वह भावी नागरिकों में बीजारोपण का कार्य करता है। विशिष्ट अतिथि महिपाल सिंह राठौड प्रांत संयोजक धर्म रक्षा समिति ने कहा कि शिक्षकों की जिम्मेदारी है कि वह समाज में ऊंच-नीच के भेदभाव को समाप्त करे। प्राचार्य आनन्द मेहता ने बताया कि नो बैग डे की थीम सबसे पहले ऋषभदेव वाकपीठ में ही लागु करने का प्रस्ताव रखा गया था इसके बाद इसे संगठन के माध्यम से राज्यस्तरीय लागु किया गया।

प्रत्येक शनिवार को बच्चो में संस्कार विकसित करने के लिये एक पुस्तक बनाई जाये जिसमें नैतिक शिक्षा, स्वास्थ्य एवं शारीरिक शिक्षा, कम्प्यूटर, संस्कार इत्यादि विषयों को जोडा जाये। वाक्पीठ अध्यक्ष (माध्यमिक) मोहनलाल मीणा ने बताया कि उच्च माध्यमिक विद्यालयों में लेवल प्रथम व द्वितीय के पद सृजित किये जाये ताकि विद्यालय स्तर पर आने वाली समस्याएं समाप्त हो सके। संभागियों की ओर से मांग की गई है कि विभिन्न प्रकार की ग्रांट जो पंचायत स्तर पर पीईईओ के खाते में आ रही है, वह प्राथमिक विद्यालय व उच्च प्राथमिक विद्यालय में आनी चाहिये। उद्घाटन समारोह के पश्चात् विभिन्न प्रकार की वार्ताएं की गई जिसमें लक्ष्मण अहारी प्राचार्य राउमावि ढेलाणा ने शाला संबलन कैसे करे, इस विषय पर वार्ता प्रस्तुत की। दूसरी वार्ता गोपाल लाल शर्मा व्याख्याता राउमावि भूधर ने निपुण भारत की गतिविधियां विषय पर वार्ता दी। इसके पश्चात् विनोद कुमार द्विज सेवानिवृत लेखाधिकारी ने एमएसीपी एवं एसीपी प्रकरण को ऑनलाईन कैसे करे, इसके बारे में जानकारी दी। अन्त में खुला मंच कार्यक्रम हुआ जिसमें शिक्षकों ने अपनी-अपनी समस्याएं रखी। उसका समाधान संयोजककर्ता आनन्द कुमार मेहता ने उनका समाधान किया। वाक्पीठ सचिव प्रकाशचन्द्र भाणावत ने सभी अतिथियों का धन्यवाद दिया। कार्यक्रम संचालन शिवनारायण त्रिवेदी एवं श्वेता जैन ने किया।

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