मेवाड़ में मानसून की बेरुखी ने किसानों को चिंता के घेरे में डाला,फसली बारिश के अभाव में ग्रोथ रुकी
- मेनार ब्रह्म सागर, ढंड तालाब, वल्लभनगर सरजना, बडगांव बांध खाली पड़े हुए है
- उपखंड क्षेत्र के सबसे बड़ा सरजना बांध को भरने के लिए 890 एमसीएफटी की ओर आवश्यकता

मेवाड़ सहित उपखंड क्षेत्र में मानसून की बेरुखी किसानों को चिंता के घेरे में डाल रही है। मेवाड़ को छोड़कर पूरे प्रदेश में मानसून मेहरबान है और बाढ़े तक आ रही है, लेकिन जिलेभर सहित उपखंड क्षेत्र सूखा पड़ा हुआ है। वल्लभनगर सरजना बांध, बडगांव बांध, मेनार ब्रह्म सागर, ढंड तालाब, रुंडेड़ा तालाब सहित छोटे मोटे नाले, एनीकट सभी खाली पड़े हुए है, जबकि 14 अगस्त तक तो कई तालाब छलक जाते है। मेनार के भेरूलाल दियावत, मांगीलाल लुणावत, कन्हैयालाल दियावत ने बताया कि मेनार के ब्रह्म सागर एवं ढंड तालाब में सर्दी की शुरुआत के साथ ही विदेशी मेहमान परिंदे आते है, जो अप्रैल-मई तक इन जलाशयों की रौनक बढ़ाते हैं और इन्हें देखने के लिए देश, प्रदेश सहित विदेशों से पर्यटक आते है, लेकिन इस बार इतनी अच्छी बारिश नही होने से दोनो जलाशय सूखे पड़े हुए है। प्रेमशंकर रामावत ने बताया कि अभी तालाब वीरान पड़ा हुआ है, जबकि विदेशी परिंदे यहाँ की आबोहवा में घुलने के बाद प्रजनन तक यहाँ कर रहे है, जिससे तालाब में पानी ना आना पक्षियों के लिए भी खतरा बना हुआ है।

इधर, पिछले साल मानसून आने के दो सप्ताह बाद ही सरजना बांध छलक गया था, लेकिन इस बार मानसून की बेरुखी से सरजना एवं बडगांव बांध खाली पड़े हुए है। सरजना बांध क्षमता 19.5 फिट है, और अभी पानी का लेवल केवल 5.2 फिट ही है, यानी 1070 एमसीएफटी बांध भरने के लिए चाहिए और अभी 180 एमसीएफटी है और भरने के लिए 890 एमसीएफटी ओर चाहिए। वही बडगांव बांध की क्षमता 25 फिट है, और अभी पानी का लेवल केवल 6 फिट ही है, जबकि सावन के महीने के 24 दिन बीतने के बाद भी छुटपुट बारिश के अलावा क्षेत्र में अच्छी बारिश नहीं हुई है, हालांकि हल्की फुल्की बारिश से फसलों को जीवनदान जरूर मिल रहा है, लेकिन 2 सप्ताह से बादल छाए रहते है, लेकिन बारिश बिल्कुल नहीं आ रही है, और बादलों के बीच छिपा सूरज जरूर प्रकट हो रहा है, जिससे उमस भी बढ़ रही है, तापमान में भी बढ़ोतरी ही हो रही है, लेकिन बारिश का नामोनिशान तक नहीं है।

यही रहा तो फसलों की पैदावार को होगा नुकसान
रुंडेड़ा के मांगीलाल, भेरूलाल जणवा, कालूलाल अकावत ने बताया कि सोयाबीन, मक्का की फसलें बारिश के अभाव में पीली पड़ रही है, अभी एक अच्छी बारिश की आवश्यकता है, लेकिन इंद्र देव की मेवाड़ पर बेरुखी किसानों को चिंता में डाले हुए हैं, सोयाबीन, मक्का, ज्वार की फसलों की बारिश के अभाव में ग्रोथ नहीं हो पा रही है, फसलों में इल्ली पड़ रही है। ऐसी स्थिति को देखते हुए अबकी बार पैदावार भी अच्छी नहीं होने की संभावना है।
फतहसागर, पिछोला खाली पड़ी
शहर में बारिश नहीं होने के बावजूद करीब एक सप्ताह से सुबह से लेकर शाम तक बादल छा रहे थे, इसलिए कई दिन से सूरज के दर्शन नहीं हो पा रहे थे। उदयपुर में अब तक सिर्फ 338.38 एमएम बारिश ही हुई है, जबकि 13 अगस्त तक औसतन 408.17 एमएम बारिश हो जानी चाहिए थी। पूरे मानसून सीजन की बात करें तो यहां 640 मिमी बारिश होती है। बारिश नहीं होने से जलाशयों में आवक न के बराबर हुई है। शहर की पिछोला और फतहसागर झील के स्तर में पिछले 24 घंटे में कोई बदलाव नहीं आया है। फतहसागर में 13 फीट के मुकाबले 5.10 और पिछोला में 11 फीट के मुकाबले 5.4 फीट पानी है।
इनका कहना है कि
“बारिश की कमी के कारण सरजना बांध 890 एमसीएफटी खाली है, और अभी 180 एमसीएफटी ही भरा हुआ है, जबकि इस बांध की क्षमता 19.5 फिट है। 19.5 फिट होने पर यह बांध छलकता है।”
– जगदीश डांगी, कनिष्क अभियंता, सिंचाई विभाग, वल्लभनगर


