जीवन में तीन चीज नसीब से मिलती है अच्छी पत्नी ,अच्छी संतान, अच्छे दोस्त : आचार्य पुलक सागर 

ऋषभदेव,डीपी न्यूज नेटवर्क । ऋषभदेव में चातुर्मास हेतु विराजमान भारत रत्न राष्ट्र संत आचार्य श्री पुलक सागर जी महाराज ने ज्ञान गंगा महोत्सव के अमृत प्रवचन में कहा दुनिया का सबसे सबसे बड़ा रिश्ता दोस्ती है , जब हम रिश्तो के बाजार में पहुंचे तो हमारे कदम भटक गए वहा खुलेआम बाजार में रिश्ते बिक रहे थे हमने कपाते हुए होठों से पूछा रिश्ता क्या भाव चल रहा है रिश्तो का दुकानदार ने पूछा आपको कौन सा रिश्ता चाहिए यहां हर रिश्ता बिकता है, बाप बेटे का रिश्ता ,भाई बहन का रिश्ता, मां बेटी का रिश्ता ,सास बहू का रिश्ता, भाभी देवर का रिश्ता, इंसानियत और मानवता का रिश्ता, हमने कहा की दोस्ती के रिश्ते का क्या भाव है तो उन्होंने कहा दोस्ती का रिश्ता यहां कभी नहीं बिकता है और जिस दिन रिश्ता भी बिकेगा भारत भारत नहीं रहेगा, समाज समाज नहीं रहेगी, दोस्ती का रिश्ता कभी बिकता नहीं है ,यह रिश्ते की बच्चे, जवान ,बुढो सभी को उसकी आवश्यकता होती है, मैं अपने भक्तों शिष्यों में चेलों का गुरु नहीं मानता, मैं हमेशा उनको अपना दोस्त मानता हूं, दोस्ती में जो आनंद है उतना जीवन में किसी भी रिश्ते में नहीं है। दोस्ती जीवन की जागीर है । वह सभी रिश्तों से ऊपर उठकर है। दोस्ती से बढ़कर कोई रिश्ता नहीं है, जिस दिन दोस्ती बिक जाएगी उसी दिन इंसानियत खत्म हो जाएगी। आचार्य पुलक सागर ने कहा कि जीवन में तीन चीज नसीब से मिलती है अच्छी पत्नी ,अच्छी संतान, अच्छे दोस्त । दोस्त का चयन स्वयं को करना पड़ता है ,संतान का चयन प्रकृति करती है और पत्नी का चयन माता-पिता और रिश्तेदार करते हैं । दोस्त हमारा विचार है, दो विचारों का मिलन ही दोस्ती है। दो विचार टकराने पर दोस्ती दुश्मन में बदल जाती है, जहां हमारे विचार मिलते हैं वही हम जाकर बैठते हैं। जीवन में अच्छी पत्नी 60% दुखों को कम करती है एवं दोस्त जीवन में 80% दुखों को कम करता है। उन्होंने बताया कि दोस्ती का रिश्ता भी अजीब है और यह दुनिया की सबसे बड़ी दौलत है ,सबसे बड़ा धन है , भाग्यशाली व्यक्ति को ही अच्छे दोस्त मिलते हैं। दोस्ती का नाम जिंदगी है, जिंदगी का नाम दोस्ती है । दुनिया में दौलत की कमाई नहीं रहती है, शोहरत की कमाई भी नहीं रहती है, दुनिया में दोस्ती की कमाई हमेशा रहती है। दुनिया में दोस्त नहीं है तो जीवन में कुछ भी नहीं है, इसलिए उन्होंने कहा आप अच्छे दोस्त बने, लेकिन वर्तमान समय में सबसे बड़ी समस्या है कि अच्छे दोस्त नहीं मिलते हैं । उन्होंने कहा स्वयं अच्छे बन जाओ तो दोस्त अपने आप अच्छे मिल जाएंगे , स्वयं अगर अच्छे दोस्त नहीं है तो अच्छे दोस्त जीवन के अंदर कभी नहीं मिलेंगे । जीवन में आनंद चाहिए, खुशियां चाहिए ,मस्ती चाहिए, दोस्ती बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा सभी रिश्तों में दोस्ती हो सास बहू की दोस्ती हो ,बाप बेटे की दोस्ती हो, भाई भाई की दोस्ती हो, भाई बहन की दोस्ती हो तो जितनी भी समस्या है वह समाप्त हो जाती है, आपस पड़ोसियों में भी दोस्ती होनी चाहिए। आज भारत के चारों पड़ोसियों की दोस्ती नहीं है इसलिए भारत चारों संकट से गिरा हुआ है, इसलिए दोस्ती के रिश्ते से विश्व की समस्याएं समाप्त हो जाएगी। क्रायकर्म की शुरुआत पूर्व विधायक धर्म नारायण जोशी एवं आरएसएमडब्ल्यू के मुख्य अधिशासी अधिकारी खटोड़ एवं के एस मणि ,अनिल दलावत ने दीप प्रज्वलित कर की कलश स्थापना की , पाद प्रक्षालन ,शास्त्र भेट रमण लाल भाणावत परिवार ने किया।

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