मेवाड़ में शांतिभंग करने की थी कोशिश,जातिवाद का जहर घोलने का था प्रयास : शिक्षक हत्याकांड पर बोले उदयपुर सांसद रावत

सलूंबर जिले के अदवास गांव में स्थित मेघवाल बस्ती में टीचर की तलवार से हत्या करने के मामले को लेकर उदयपुर सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने कहा कि इसको लेकर यहां जातिवाद का जहर घोलने का प्रयास हुआ था। उन्होंने कहा कि बाहरी तत्व मेवाड़ में शांति भंग करने के प्रयास में लगे है ऐसे में आमजन सावधान रहे।

सांसद रावत ने सोमवार को जारी किए बयान में कहा- कुछ बाहरी तत्व यहां की सामाजिक समरसता को समाप्त करने व शांति व्यवस्था को भंग करने के उद्देश्य से जातिवाद का जहर घोलने के प्रयासों में जुटे हैं। आमजन को इनसे सावधान रहने की आवश्यकता है। सलूंबर जिले के अदवास गांव में शिक्षक शंकर लाल की उसी के दोस्त फतहसिंह ने तलवार से वार कर हत्या कर दी थी। वारदात के बाद जंगल में छिपे आरोपी फतह सिंह की पुलिस ने घेराबंदी की तो पकड़े जाने के भय से अपने पास मौजूद तलवार खुद को मार दी जिससे उसकी मौत हो गई।

सांसद ने कहा कि जब मृत टीचर शंकरलाल के शव को पोस्टमार्टम की कार्रवाई के लिए उदयपुर के राजकीय महाराणा भूपाल चिकित्सालय लाया गया। इस बीच कुछ बाहरी तत्व माहौल खराब करने की नीयत से यहां पहुंच गए। सांसद ने बताया कि टीचर के परिवार के लोग शांति चाहते थे लेकिन ये बाहरी तत्व पोस्टमार्टम के लिए परिजनों की सहमति बनने में हस्तक्षेप करते रहे। मृतक के परिवार को मुआवजे सहित अन्य मांगों को लेकर तीन दिन तक शव का पोस्टमार्टम तक नहीं होने दिया।

मॉच्यूरी के बाहर मेवाड़ की सामाजिक समरसता को समाप्त करने व विद्वेष पैदा करने के लिए अपने भाषणों में जातिवाद का जहर घोलते रहे। हत्या के आरोपी व मृत शिक्षक वारदात से पूर्व तक अच्छे मित्र थे। उनके बीच कभी जातिगत ऊंच-नीच या भेदभाव वाली बात कभी नहीं रही।

रावत ने कहा कि मॉच्यूरी के बाहर प्रदर्शन के दौरान इन बाहरी तत्वों ने एससी, एसटी, ओबीसी, माइनॉरिटी, हिंदू समाज बीच विभाजन पैदा करने वाली भाषा का उपयोग करना शुरू किया तो उन्हें सख्ती के साथ समझा दिया गया। सरकार की ओर से मृत शिक्षक के आश्रितों को उचित आर्थिक सहायता, अनुकम्पा पर सरकारी नौकरी सहित अन्य राहत व सहायता प्रदान की गई।

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