बालाजी गौधाम, इंटाली में श्रीमद् भागवत महापुराण की पूजन व शोभायात्रा के साथ कथा का हुआ शुभारंभ
गौमाताओ का मूत्र, गोबर व मनुष्य द्वारा कोई भी शुभ कार्य करता है उसमें काम आता है :- अनुजदास महाराज
बांसडा,कन्हैयालाल मेनारिया । गौशाला निमित्त संगीत मय सात दिवसीय श्रीमद् भागवत महापुराण कथा इंटाली व चायला खेड़ा के समस्त ग्रामवासियों के तत्वावधान में रेठेड़ रोड़, बालाजी गौधाम, इंटाली में श्रीमद् भागवत महापुराण की पूजन कर शोभायात्रा निकाल कथा का आरंभ हुई। श्रीमद् भागवत महापुराण कथा के सात दिवसीय आयोजन हेतु गुरुवार को भगवान श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर में भागवत महापुराण का विधि-विधान से मंत्र उच्चारण के साथ पूजन कर भागवत महापुराण की शोभायात्रा निकाली गयी, जो शोभायात्रा भगवान लक्ष्मीनारायण मंदिर से प्रारंभ होकर पिपलेश्वर महादेव मंदिर चौक, मेनारिया ब्राह्मण मोहल्ला, शिवघाटी, चारभुजा मंदिर, पानी की कुई, सदर बाजार, कुमारिया श्याम बावजी, बस स्टैंड, सीनियर स्कूल, पुरानी पानी की टंकी, चौक सहकारी समिति, भीलबस्ती होते हुए शोभायात्रा श्री बालाजी गोधाम गौशाला पहुंची। शोभायात्रा में कथावाचक अनुजदास महाराज, जगदीश प्रसाद शाहिद भी शामिल हुए। भगवान लक्ष्मी नारायण मंदिर से शोभायात्रा में ग्रामीण एवं महिलाएं, युवा डीजे पर बजते मधुर गीत पर नाचते गाते हुए शोभायात्रा के साथ कथास्थल पहुँचे।
कथास्थल पर पहुंचकर गणपति स्थापना की पूजन अर्चन करने पश्चात भागवत महापुराण की विधिवत पंडितों द्वारा मंत्रो उच्चारण के साथ ग्राम वासियों द्वारा पूजन अर्चना कर भागवत महापुराण की प्रथम दिवसीय कथा प्रारंभ की गई।
कथा वाचक अनुजदास महाराज ने बताया कि मनुष्यों ने गौ माता को आज दर-दर की ठोकरे खाने को मजबूर कर दिया है। लोभ लालच के वशीभूत होकर मानव ने ज्यादा दूध के चक्कर में भैंसों को ज्यादा महत्व देना शुरू कर दिया है जबकि गौ माता का दूध काफी गुणकारी होता है और काफी काम आता है। गौ माता का मूत्र, गोबर भी काम आता है। मनुष्य द्वारा कोई भी शुभ कार्य करता है तो अपने आंगन, व्यवसाय परिसर सहित अन्य जगह गौमाता का गोबर लिपने के बाद ही शुभ कार्य किया जाता है। गौ हत्या का कसाई को पाप नहीं लगता है जबकि असली पाप का हकदार तो गौमाता को कसाई को बेचने वाला है। अनुजदास महाराज ने बताया कि जब इस देश में कोरोना महामारी आई तो गौमाता से रहा नहीं गया और गौमाताओ ने इस महामारी को अपने ऊपर लिया जिसका नाम था लंपी रोग। हिंदू अलग-अलग जातियों में बटा हुआ है और जब तक जातियों में बटा रहेगा तब तक सनातन कभी मजबूत नहीं हो सकता। अंत में सभी को प्रसाद वितरण किया गया। कथा प्रतिदिन सुबह 8 बजे से दोपहर 12 बजे तक आयोजित हो रही है। कार्यक्रम की व्यवस्थाओं के लिए दोनो ही गांवो के युवाओं द्वारा पानी, बिजली सहित भीषण गर्मी से सारे बचाव के कार्य बखूबी किए जा रहे हैं।
