न्यायालय के निर्णय के अनुरूप समान प्रकृति के प्रकरणों में सभी शिक्षकों के लिए एक समान आदेश जारी करावें : प्रांतीय महामंत्री लखारा

शिक्षक संघ राष्ट्रीय ने शिक्षा मंत्री को लिखा पत्र 

प्रथम नियुक्ति दिनांक से समस्त परिलाभ व वरिष्ठता गणना की मांग 

शिक्षा विभाग द्वारा ‘नो अपील’ का निर्णय किया जा चुका 

बांसडा,कन्हैयालाल मेनारिया । राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय के प्रांतीय महामंत्री महेंद्र कुमार लखारा ने माननीय शिक्षा मंत्री मदन दिलावर राजस्थान सरकार जयपुर को पत्र लिखकर सभी प्रकार के शिक्षकों को प्रथम नियुक्ति दिनांक से समस्त परिलाभ व वरिष्ठता गणना के न्यायालय आदेशों की पालना में समान आदेश जारी कराने का आग्रह किया। जिला अध्यक्ष पुष्पेंद्र सिंह झाला ने बताया कि माननीय उच्च न्यायालय जोधपुर एवं जयपुर द्वारा विभिन्न शिक्षकों की याचिकाओं पर निर्णय करते हुए 1 जनवरी से या उसके बाद नियुक्त शिक्षकों को भी ग्रीष्मावकाश का वेतन देने व प्रथम नियुक्ति दिनांक से ही समस्त वित्तीय लाभ देने व वरिष्ठता निर्धारण भी प्रथम नियुक्ति दिनांक से ही किए जाने हेतु आदेश पारित किए गए हैं।

इसी प्रकार के समान प्रकरण में उदयपुर जिले के शिक्षकों को भी राहत देने के आदेश देने के लिए हाल ही में जिला मंत्री वगत लाल शर्मा ,जिला कोषाध्यक्ष मंगल कुमार जैन, शिक्षा समिति सदस्य राजेंद्र सिंह सारंगदेवोत व जिला मीडिया प्रभारी गोपाल मेहता मेनारिया आदि के प्रतिनिधि मंडल ने जिला शिक्षा अधिकारी वीरेंद्र सिंह यादव प्रा.शि. उदयपुर से भेंट की थी। संगठन ने पूर्व में भी न्यायालय द्वारा इस प्रकार के आदेश पारित होने के बाद समान आदेश विभाग द्वारा जारी करने हेतु उच्च अधिकारियों से मांग की थी। विगत बुधवार को जिला शिक्षा अधिकारी वीरेंद्र सिंह यादव द्वारा नियमों का हवाला देते हुए ऐसे आदेश जारी करने में असमर्थता व्यक्त की। जिला मीडिया प्रभारी गोपाल मेहता मेनारिया ने बताया कि जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक शिक्षा उदयपुर द्वारा समान प्रकृति के प्रकरण होने से न्यायालय में जाए बिना ही शेष रहे शिक्षकों के लिए भी 1 जनवरी के बाद की प्रथम नियुक्ति तिथि से ही सारे परिलाम देने के आदेश नहीं मिलने पर जिला अध्यक्ष पुष्पेंद्र सिंह झाला ने प्रांतीय अध्यक्ष रमेश चंद्र पुष्करणा को इस समस्या का समाधान कराने का आग्रह किया। अतः इस सम्बन्ध में प्रांतीय महामंत्री महेंद्र कुमार लखारा ने शिक्षा मंत्री को लिखें अपने पत्र में निवेदन किया कि माननीय उच्च न्यायालय के इन आदेशों की पालना में शिक्षा विभाग द्वारा भी आदेश जारी करते हुए इस निर्णय के विरुद्ध ‘नो अपील’ का निर्णय किया जा चुका है। जब विभाग द्वारा ‘नो अपील’ का निर्णय किया जा चुका है तो इस प्रकार के अन्य जिलों के भी समस्त प्रकरणों का निर्धारण भी विभाग के लेखा अधिकारी द्वारा कराते हुए इन्हें निर्धारित करने के समान आदेश जारी करा कर ऐसे वित्तीय हानि से प्रभावित सभी शिक्षकों को राहत दी जा सकती है । उन्होंने लिखा कि इस प्रकार के समान आदेश जारी नही होने के कारण परिलाभ से वंचित शिक्षकों को समान प्रकृति के प्रकरण माननीय न्यायालय में दायर करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है,जिससे अनावश्यक रूप से शिक्षकों को आर्थिक हानि हो रही है तथा विभाग व प्रशासन का भी अर्थ व समय भी खराब हो रहा है। इस हेतु एक सामान्य आदेश इस प्रकार के प्रकरणों के लिए लेखा अधिकारी के माध्यम से निर्धारित करने हेतु जारी किया जाए, इससे शिक्षकों व विभाग दोनों को समय व अर्थ की बचत होने के साथ समान प्रकृति के प्रकरणों में एकरूपता स्थापित होने से सभी के साथ न्याय भी हो पायेगा।

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