तारावट में हनुमानजी की प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव : शुभ मुहूर्त सुबह 8.15 बजे में हनुमानजी की हुई प्राण-प्रतिष्ठा, बालाजी के जयकारों से गुंजा तारावट

सम्मान समारोह में सभी भामाशाहों, बोली लगाने वालों सहित अन्य का किया स्वागत

वल्लभनगर,कन्हैयालाल मेनारिया । वल्लभनगर उपखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत तारावट में स्थित प्राचीन हनुमान जी मंदिर में समस्त ग्रामवासियों के तत्वावधान में चल रहे कार्यक्रम में बुधवार को आचार्य पुष्करलाल आमेटा के सानिध्य में पंडितों ने वैदिक मंत्रोच्चार व धार्मिक अनुष्ठानों के बीच हनुमान मंदिर में हनुमानजी की शुभ मुहूर्त सुबह 8.15 बजे प्राण-प्रतिष्ठा, स्वर्ण कलश, ध्वजादंड स्थापना एवं ध्वजा परिवर्तन की गई। इस प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में ग्रामीण एवं श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। अधिवक्ता शंकरलाल डांगी ने बताया कि तीन दिवसीय प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव का हनुमानजी की प्राण प्रतिष्ठा, मंदिर पर स्वर्ण कलश एवं ध्वजादंड की स्थापना एवं मंदिर पर ध्वजा परिवर्तन के साथ समापन हुआ। इस प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव में हनुमानजी मंदिर पर लोगर पुत्र डूंगा, सका पुत्र ओंकारलाल डांगी द्वारा 8 लाख 2 हजार 101 रुपए की सर्वाधिक बोली लगाकर स्वर्ण कलश चढ़ाया गया, 2 लाख 5 हज़ार रुपये की बोली लगाकर शोभालाल जाट ध्वजादंड की स्थापना की। पुर्व सरपंच भेरुलाल जाट, रोशन लाल जैन, नन्द लाल आसरमा, सम्पत जाट, मोहन जाट, परथा डांगी, नारू डांगी, दीपा ने बताया कि हवन अनुष्ठान में 1 लाख 51 हज़ार की बोली लगाकर कालूलाल पुत्र कैलाश डोकलिया ने प्रधान यजमान कुंड की बोली लगाकर हवन अनुष्ठान संपन्न करवाएं गए। मंदिर में 55 हज़ार रुपये की बोली लगाकर डोर मदनलाल सुथार ने फेरा, 61 हज़ार रुपये की बोली लगाकर हनुमानजी की प्रथम मार्ल्यापण का लाभ मोहनलाल पुत्र जेता डांगी ने लिया, 86 हज़ार रुपये की बोली लगाकर हनुमानजी को प्रथम भोग सन्तोषदास पुत्र किशोरदास ने लगाया। कार्यक्रम में नवानिया के बाबा रामदेवजी के सेवक भेरुलाल गाडरी भी शामिल हुए, जिनका ग्रामवासियों ने पुष्प वर्षा, तिलक व उपरणा से स्वागत किया। मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के अंतिम दिन पंडितों के वैदिक मंत्रोचार के बीच स्वर्ण कलश, ध्वजादंड, ध्वजा परिवर्तन, हवन सहित अन्य धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करवाएं गए। इस प्राण प्रतिष्ठा के अंतिम दिन आसपास के गांवो से श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। श्रद्धालुओं ने मन्दिर पर हनुमानजी के दर्शन करके खुशहाली की कामनाएं की। इस प्राण-प्रतिष्ठा को लेकर महाप्रसादी का आयोजन भी हुआ। जिसमें हजारो की संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।

भामाशाहों सहित अन्य का किया सम्मान

इस कार्यक्रम के दौरान प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में स्वर्ण कलश, ध्वजादंड स्थापना, ध्वजा परिवर्तन एवं मूर्ति स्थापना सहित अन्य बोलिया लगाने वाले यजमानो, भामाशाहों, तीन दिन तक इस महोत्सव में व्यवस्थाए देखने वाले ग्रामीणों का ग्रामवासियों ने सम्मान किया। इस कार्यक्रम व्यवस्थाओ में वेणीराम, नाथुलाल, हरीराम, मांगीलाल गुर्जर, मदन सुथार, नारायण दास, मोतीदास, जगन्नाथदास, रामपुरी, श्याम लाल सुथार, राजकुमार टेलर, राजु वैष्णव, मोहन उस्ताद, पोखर डांगी, सुरजमल जाट, महेन्द्र डांगी, मोहन डांगी, लोगर प्रजापत, राम लाल नाई, किशन प्रजापत, भोली राम, शोभालाल, बाबू लाल डांगी, श्याम डोकलीया, लोगर डोकलीया, कालु डोकलीया, गणेश डांगी, डालु लोहार, शेखर, नाथु जाट, मुकेश गुर्जर, रमेश, छोगा जाट, मिठालाल लोहार, मांगी लाल, जितमल डोकलीया, दुदा डांगी, अमरा डांगी, लक्ष्मण जाट, रामचन्द्र जाट, बाबु डोकलीया, गोकुल जाट, खेमराज वातडा,भोला वातडा, राधेश्याम वैष्णव, कालुदास, बाबु डांगी, मुना महाराज, भैरुलाल जैन, विक्रम साहु, नरेश साहु, नरेश लोहार सहित अन्य ग्रामीण थे।

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