तारावट में हनुमानजी की प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव 24 अप्रैल को, तीन दिवसीय धार्मिक अनुष्ठानो की हुई सोमवार से शुरूआत

गणपति स्थापना के साथ भव्य निकाली कलश यात्रा, 1001 महिलाओं ने अपने सिर पर धारण किए कलश

मंदिर पर होगी स्वर्ण कलश, ध्वजादंड की स्थापना, ध्वजा परिवर्तन भी होगी

वल्लभनगर,कन्हैयालाल मेनारिया । उपखंड क्षेत्र के तारावट में स्थित प्राचीन हनुमान जी मंदिर में समस्त ग्रामवासियों के तत्वावधान में 24 अप्रैल को शुभ मुहूर्त में पंडित के सानिध्य में विभिन्न धार्मिक हवन, अनुष्ठान एवं पूर्णाहुति के साथ हनुमानजी की प्राण-प्रतिष्ठा, मंदिर पर स्वर्ण कलश एवं ध्वजादंड की स्थापना की जाएगी। प्राण प्रतिष्ठा, मंदिर पर स्वर्ण कलश एवं ध्वजादंड की स्थापना के आयोजन को लेकर सोमवार से तीन दिवसीय विभिन्न धार्मिक, मांगलिक कार्य शुरू हो गए है। सोमवार को आचार्य पुष्करलाल आमेटा के सानिध्य में पूर्ण मंत्रोच्चार के साथ शुभ वेला में गणपति जी की स्थापना हुई। महिलाओं ने मंगल गीत गाए। इस आयोजन को लेकर यज्ञशाला में हवन की शुरुआत हो गई है। जो 24 अप्रैल तक चलेगा।

इस आयोजन को लेकर समस्त ग्रामीण पिछले एक महीने से तैयारियां शुरू कर दी थी, सभी गांवो में निमंत्रण दिए जा चुके है। प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के तीन दिवसीय कार्यक्रम के तहत सोमवार को गणपति स्थापना हुई, आज मंगलवार सांय 4 बजे से मूर्ति नगर भ्रमण एवं रथयात्रा निकलेगी, ततपश्चात रात 8.30 बजे से एक शाम बालाजी के नाम भव्य भजन संध्या का आयोजन होगा। कल 24 अप्रैल बुधवार को स्वर्ण कलश, ध्वजादंड स्थापना, मंदिर पर ध्वजा परिवर्तन एवं श्री हनुमानजी की प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी, महाआरती होगी। ततपश्चात महाप्रसादी का आयोजन के साथ तीन दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम का समापन होगा। जिसमें हज़ारो श्रद्धालु जुटेंगे।

 

निकाली भव्य कलश यात्रा, जगह-जगह हुआ स्वागत

 

इस भव्य प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव को लेकर सोमवार को गांव के विभिन्न प्रमुख मार्गों से कलश यात्रा निकाली गई। सोमवार सुबह मंदिर परिसर में महिलाएं लाल चूंदड़ ओढ़ स्वर्ग आभूषणों से सुसज्जित हो सजधज कर पहुँची, तो पुरुष पारंपरिक वेशभूषा धोती, कुर्ता एवं पाग पहनकर पहुँचे। जहाँ 1001 महिलाओं ने कलश में गंगाजल भरकर सिर पर कलश धारण किया। कलश यात्रा में श्रद्धा का ज्वार उमड़ पड़ा। गली-गली मोहल्ले को श्रद्धालुओं ने श्रीराम, हनुमानजी के जयकारो से गुंजायमान कर दिया।

महिलाओ के सिर पर कलश धारण करने पर कलश यात्रा शुरू हुई जो मंदिर से शुरू होकर गांव के प्रमुख मार्गों से होते हुए पुनः मंदिर पहुँची। कलश यात्रा में सबसे आगे युवक धर्म का प्रतीक ध्वज लेकर चल रहे थे। रास्ते में ग्रामीण प्रसाद वितरित करते चल रहे थे। कलश यात्रा में बैंड बाजे पर मधुर बजते धार्मिक गीतों पर युवक, युवतियां नाचती गाती चल रही थी। बैंड बाजो पर बजते राम आएँगे तो, अंगना सजाऊँगी, दिप जलाके, दिवाली मनाऊँगी, मेरे जन्मो के सारे, पाप मिट जाएंगे, राम आएँगे भजनों पर अपने आप को नाचने से नहीं रोक सके और खूब थिरके। साथ ही इस पल को ग्रामीणों ने अपने कैमरे में कैद किया और खूब आनन्द लिया।

कलश यात्रा में पूरा मार्ग अबीर, गुलाल के साथ केसरिया रंग से पटा रहा। बैंड बाजे व श्रद्धालुओं द्वारा लगाए जा रहे श्रीराम, जय माता दी एवं हनुमानजी के गगनभेदी जयघोष से वातावरण गूंजायमान हो उठा। वही धार्मिक बजते गीतों से वातावरण भक्तिमय बना हुआ था। कलश यात्रा में गांव के अनेक स्थानों पर ड्रोन से पुष्प वर्षा की गई और रास्ते में श्रद्धालुओं ने जगह-जगह कलश यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं का स्वागत, सत्कार किया, कई जगहों पर फलाहार और अल्पाहार कराया गया। 1001 महिलाएं सिर पर कलश धारण करने के दौरान करीब एक किलोमीटर तक भक्तो का जनसैलाब दिखाई दे रहा था। कलश यात्रा के दौरान जगह-जगह आवाजाही में व्यवधान रहा। कलश यात्रा में हज़ारो श्रद्धालु गांव सहित आसपास के गांवो के शामिल हुए। कलश यात्रा के मंदिर पहुँचने पर महाआरती होने के बाद प्रसाद वितरण किया गया।

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