कैशियर के 3 गोलियां लगीं, लेकिन नहीं लुटने दिया बैंक,जयपुर में PNB में डकैती करने पहुंचे थे 2 भाई

जयपुर के एक बैंक में हुई लूट की कोशिश को वहां के कैशियर की हिम्मत ने फेल कर दिया। लुटेरों ने कैशियर को तीन गोली मारी, लेकिन उसकी हिम्मत के आगे आरोपी बेबस हो गए।

हालांकि, बैंक कैशियर इसमें बुरी तरह घायल हो गया और उसकी एक किडनी डैमेज हो गई। इलाज के दौरान उसकी किडनी निकालनी पड़ी है। फिलहाल उनका इलाज जयपुर के एक प्रावइेट हॉस्पिटल में किया जा रहा है।

मामाला शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे का है जब झोटवाड़ा की पंजाब नेशनल बैंक में घुसे 2 नकाबपोशों ने बैंक कर्मचारियों को बंधक बना लिया।

इसके बाद उन्होंने बैंक के स्ट्रांग रूम को लूटने की कोशिश की, लेकिन तभी बैंक कैशियर नरेंद्र सिंह शेखावत ने हिम्मत दिखाते हुए एक बदमाश को पकड़ लिया। वहीं, दूसरा बदमाश भाग निकला। हालांकि, उसे करीब ढाई घंटे के बाद पुलिस ने दबोच लिया। दोनों लुटरे मौसेरे भाई हैं।

एडि. कमिश्नर (फर्स्ट) कैलाश चन्द बिश्नोई ने बताया कि झुंझुनूं निवासी नरेन्द्र सिंह शेखावत (44) ने बताया कि वह गणेश नगर विस्तार करधनी में परिवार के साथ रहते हैं। पिछले करीब 3 साल से हैड कैशियर हैं।

शुक्रवार सुबह रोज की तरह 9:30 बजे बैंक ओपन हुआ था। सबसे पहले मैनेजर मनीष सैनी, महिला कर्मचारी विनेश चौधरी और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी रमेश सैनी आ गए थे। सुबह 10 बजे तक सभी कर्मचारियों के आने के बाद काम शुरू होता है।

बैंक ओपन होने के 10 मिनट बाद करीब 9.40 बजे हाथों में दस्ताने और मुंह पर मास्क लगाए दो लड़के आए। बैंक का माहौल देखने के लिए एक बदमाश अंदर चला गया।

दूसरा उसके इशारे के इंतजार में बैंक परिसर में लगे ATM बूथ में खड़ा होकर बाहर निगरानी करने लगा। महज 10 सेकंड बूथ में रुकने के बाद वह भी बैंक के अंदर आ गया।

मास्क के लिए टोकने पर निकाली पिस्टल

अंदर जाने के बाद दोनों बदमाश बैंक के लगे केबिन की ओर इधर-उधर घूमने लगे। बैंक मैनेजर मनीष सैनी ने मास्क लगा देखकर उन्हें टोका। मास्क को हटाने की कहने पर एक बदमाश ने पिस्टल निकालकर तान दी।

उसने बैंक में मौजूद मैनेजर सहित तीनों कर्मचारियों को चुपचाप रहने के लिए धमकाया। बैंक मैनेजर को अलग ले जाकर एक केबिन में बंद कर दिया।

बोले- कहां है कैश, चाबी बताओ

महिला बैंककर्मी विनेश और रमेश सैनी को गन पॉइंट पर लेकर धमकाया। बोला- कैश कहां है, चाबी बताओ। जल्दी करो नहीं तो गोली मार देंगे।

पिस्टल लेकर धमकाने वाले बदमाश ने इशारा कर अपने साथी को बैंक के मेन गेट की तरफ भेज दिया। गेट पर खड़ा होकर साथी बदमाश बाहर से आने वाले लोगों पर निगरानी रखने लगा। इसके बाद बदमाश दोनों बैंक कर्मचारियों को स्ट्रॉन्ग रुम की तरफ ले गया।

9.46 बजे आए शेखावत से हाथापाई

बदमाशों के बैंक में एंट्री के 6 मिनट बाद 9.46 बजे हैड कैशियर नरेन्द्र सिंह पहुंचे। उन्हें गेट पर मास्क लगाए एक लड़का खड़ा दिखा। सिंह स्ट्रॉन्ग रूम के पास गए तो मास्क पहने एक युवक के हाथ में पिस्टल देखी।

शेखावत ने बताया कि दोनों बदमाशों के पास पिस्टल थी। इसी दौरान गेट के पास खड़े बदमाश से उनकी हाथापाई हो गई। एक बदमाश को उन्होंने पकड़ लिया और हेलमेट से उस पर वार करना शुरू कर दिया।

इसी बीच पास ही खड़ा दूसरा बदमाश भी कैशियर के पास पहुंचा गया। उन्होंने दोनों बदमाशों को एक साथ पकड़ने की काेशिश की। इसमें तीनों जमीन पर गिर गए। एक बदमाश ने उन्हें पकड़ लिया और दूसरे लंबे बाल वाले बदमाश ने उन पर गोली चला दी।

तीन गोलियां लगने के बाद भी नहीं छोड़ा बैग

कैशियर ने बताया कि बदमाशों ने उन पर तीन गोलियां चलाईं। पहली गोली दाहिनी ओर पेट पर, दूसरी गोली पीठ पर और तीसरी गोली बाई ओर सीने के पास लगी। बदमाशों ने कैशियर के कंधे पर लटका बैग छीनने का प्रयास किया, लेकिन शेखावत ने बैग नहीं ले जाने दिया। घायल होने के बाद भी कैशियर ने हिम्मत दिखाते हुए लगभग सात मिनट तक उन दोनों से संघर्ष किया और पकड़े रखा।

लहूलुहान हालत में नरेन्द्र सिंह ने जमीन पर गिरकर एक बदमाश को पकड़ लिया। दूसरा बदमाश उसके चुंगल से भाग निकला। भागते समय भी बदमाश ने उन पर फायर किया।

एक बदमाश को पकड़ दूसरे को पकड़वाने के लिए नरेन्द्र ने चिल्लाकर शोर मचाया। गोली चलने की आवाज सुनकर पड़ोसी दुकानदाार भी बैंक के अंदर आ गए। बैंक कर्मचारी और लोगों की मदद से एक बदमाश को पकड़ लिया गया। इसके बाद गुस्साए लोगों ने उसकी जमकर धुनाई कर दी।

रस्सी से बदमाश के बांधे पैर

इस बीच बैंक के बाहर हंगामा होते देखकर ड्यूटी पर जा रही झोटवाड़ा थाने की महिला कॉन्स्टेबल मेनका दौड़कर पहुंची। लोगों की मदद से बदमाश को पकड़कर काबू में किया।

बैंक के बाहर लगी रेलिंग के पास बदमाश के पैर में रस्सी बांधकर बैठा दिया। इसके बाद गुस्साए लोगों से मेनका ने समझाइश की और थाने में फोन कर मदद मांगी।

बैंक कर्मचारियों ने लोगों की मदद से नरेन्द्र सिंह को नजदीक स्थित प्राइवेट हॉस्पिटल पहुंचाया। वहां से उन्हों हालत गंभीर होने पर मणिपाल हॉस्पिटल में एडमिट करवाया गया।

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