गुरुकूल जिनालय में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव की शुरुआत, शोभायात्रा में उमड़ा श्रद्धा का शेलाब, केसरियानाथ के नारों से गूंजा नगर
ऋषभदेव । भट्टारक यशकीर्ति गुरुकुल ट्रस्ट की ओर से एवं सकल दिगम्बर जैन समाज की ओर से रविवार को घट यात्रा निकाल एवं धर्म ध्वजा फहरा कर पंचकल्याणक महोत्सव की शुरुआत की गई। इससे पहले रविवार को गुरुकुल जिनालय से शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें समाज की महिलाओं ने अपने सिर पर घट धारण कर श्री जी के समक्ष भक्ति प्रकट की।

जिनालय से शुरू हुई शोभायात्रा आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ के सान्निध्य में सहकारिता मंत्री गौतम दक ने हरी झंडी दिखाई। बाद में शोभायात्रा हॉस्पिटल रोड पाटूना चौक, नेहरू बाजार, सदर बाजार, धर्मशाला रोड, पुराना बस स्टैंड मार्गों से होती हुई गुरुकुल ग्राउंड आयोध्या नगरी पहुंची और धर्मसभा में परिवर्तित हुई। रविवार से शुरू हुए एवं 15 फरवरी तक चलने वाले पंचकल्याणक महामहोत्सव के ध्वजारोहण का सेठ राजमल कोठारी परिवार को सौभाग्य प्राप्त हुआ। बाद में पांडाल उद्घाटन दिलीप दलावत परिवार ने किया।

आचार्य श्री एवं मुनि वृंदों की उपस्थिति में पांडाल शुद्धि मंडप शुद्धि, वेदी शुद्धि, मंडल शुद्धि, मंडप प्रतिष्ठा, वेदी प्रतिष्ठा, मंडल प्रतिष्ठा संस्कार की मांगलिक क्रियाएं प्रतिष्ठाचार्य सुधीर मार्तण्ड व प्रतिष्ठाचार्य हसमुख शास्त्री ने मंत्रोच्चार से संपन्न कर धर्मावलंबियों ने गर्भ कल्याणक पूर्व रूप उत्तर रूप की क्रियाएं संपन्न कराई। पंचकल्याणक में भगवान के माता पिता बनने पर सुरेश कोठारी परिवार का सम्मान पंचकल्याणक समिति की ओर से किया गया। इस अवसर पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज ने कहा कि जो जितना झुकता है, वह ऊंचाइयों पर पहुंचता है। यह मंडप मंदिर का रूप ले चुका है।

नवयुवक मंडल के अध्यक्ष हितेश भंवरा ने बताया कि रविवार को सुबह प्रात:कालीन बेला में 6.45 बजे मंगलाष्टक, दिग्बंधन, रक्षामंत्र, शांतिमंत्र, नित्यमह अभिषेक, शान्तिधारा, पूजन, तीर्थंकर बालक का जन्म, अयोध्या नगरी में बधाइयां, अयोध्या नगरी की परिक्रमा, अयोध्या में प्रवेश सौधर्म इंद्र शचि का अलौकिक दृश्य, सहस्त्र नेत्रों से तीर्थंकर बालक के दर्शन के अलावा ऐरावत हाथी पर आरूढ़ सौधर्मइंद्र शचि द्वारा तीर्थकर बालक को लेकर पंक वन की ओर प्रस्थान पांडुक शिला पर 1008 कलशों द्वारा तीर्थंकर बालक का अभिषेक श्रृंगार आदि कार्यक्रम के अलावा आचार्य श्री के प्रवचन, शांतिहवन, इंद्रसभा एवं राजदरबार, इंद्राणी द्वारा प्रथम दर्शन, इंद्रद्वारा सहस्राक्ष दर्शन तथा सायं 6:30 बजे संगीतमय महाआरती, शास्त्र प्रवचन, 7.30 बजे सौधर्म इंद्र की ओर से तांडव नृत्य बालक आदिकुमार का पालना झूलाना एवं बाल क्रीड़ा का मनोहारी दृश्य हुए।
